व्रत और पर्व

तुलसी विवाह 2026 कब है: 21 नवंबर

शनिवार, 21 नवंबर 2026

कार्तिक शुक्ल द्वादशी (कई परिवारों में एकादशी की शाम)

31 दिन बाद
तुलसी विवाह की तैयारी: गन्ने के मंडप के नीचे लाल चुनरी ओढ़े तुलसी चौरा, चारों ओर जलते दीये और रंगोली
चित्र: AI से बनाया गया

विवाह का समय

गोधूलि मुहूर्तसूर्यास्त से; विवाह परंपरा से शाम को
5:25–5:52 PM
सूर्यास्त
5:25 PM
द्वादशी तिथि
6:33 AM से 4:58 AM (22 नव॰) तक
एकादशी तिथि (देवउठनी)
7:17 AM (20 नव॰) से 6:33 AM तक

तिथि एक ही क्षण पर बदलती है, इसलिए तिथि के समय पूरे भारत में एक ही हैं; गोधूलि और सूर्यास्त शहर के अनुसार। कई परिवार एक दिन पहले, देवउठनी एकादशी की शाम को ही विवाह करते हैं।

शनिवार, 21 नवंबर 2026 के लिए, भारतीय मानक समय में, चुने हुए शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह-स्थिति से। अलग-अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है। गणना कैसे होती है

संक्षेप में

तुलसी विवाह 2026 में 21 नवंबर, शनिवार को है। Drik Panchang इसे कार्तिक शुक्ल द्वादशी के दिन देता है; इस बार द्वादशी तिथि 21 नवंबर को 6:33 AM से 22 नवंबर को 4:58 AM तक है। कई परिवार एक दिन पहले, देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) की शाम ही विवाह करते हैं। परंपरा से शाम को तुलसी के पौधे का विवाह शालग्राम, या विष्णु अथवा श्रीकृष्ण की प्रतिमा से, विवाह की पूरी रीति से कराया जाता है। अपने शहर का गोधूलि मुहूर्त नीचे देखें।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 8 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

शहर-वार समय

द्वादशी तिथि हर शहर में एक ही क्षण पर है; गोधूलि मुहूर्त और सूर्यास्त शहर के अनुसार बदलते हैं। दूसरे शहर के लिए ऊपर के बॉक्स में शहर चुनें।

शहरगोधूलि मुहूर्तसूर्यास्त
नई दिल्ली5:25–5:52 PM5:25 PM
मुंबई5:59–6:25 PM5:59 PM
कोलकाता4:52–5:18 PM4:52 PM
चेन्नई5:39–6:04 PM5:39 PM
बेंगलुरु5:50–6:15 PM5:50 PM
हैदराबाद5:40–6:05 PM5:40 PM
अहमदाबाद5:54–6:20 PM5:54 PM
जयपुर5:34–6:01 PM5:34 PM
लखनऊ5:14–5:40 PM5:14 PM
पटना4:59–5:26 PM4:59 PM
वाराणसी5:08–5:35 PM5:08 PM
पुणे5:56–6:22 PM5:56 PM

एक नज़र में

तिथि
कार्तिक शुक्ल द्वादशी (Drik Panchang); कई परिवारों में देवउठनी एकादशी की शाम
2026 में
शनिवार, 21 नवंबर; देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर
वधू
तुलसी का पौधा (तुलसी देवी)
वर
शालग्राम शिला, या विष्णु अथवा श्रीकृष्ण की प्रतिमा
समय
शाम, गोधूलि वेला में (परंपरा)
अन्य दिन
कई स्थानों पर एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक कोई भी दिन
अन्य नाम
तुलसी कल्याणम् (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना), तुलसी-शालग्राम विवाह
इसके बाद
कई घरों में विवाह के मुहूर्त तुलसी विवाह के बाद ही शुरू माने जाते हैं

तुलसी विवाह 2026: एकादशी या द्वादशी?

Drik Panchang 2026 में तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को देता है, जो कार्तिक शुक्ल द्वादशी का दिन है। नई दिल्ली के लिए Drik में द्वादशी तिथि 21 नवंबर को 6:31 AM से 22 नवंबर को 4:56 AM तक है (हमारी गणना में 6:33 AM से 4:58 AM, लगभग 2 मिनट बाद), इसलिए 21 नवंबर के सूर्योदय (6:48 AM) पर द्वादशी ही है। एक दिन पहले, शुक्रवार 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी का व्रत है; एकादशी तिथि 20 नवंबर को 7:15 AM से 21 नवंबर को 6:31 AM तक है (Drik; हमारी गणना 7:17 AM से 6:33 AM)। कई परिवार देवउठनी एकादशी की शाम ही तुलसी विवाह करते हैं, इसलिए उनके लिए यह दिन 20 नवंबर है। Drik Panchang यह भी बताता है कि कुछ ग्रंथ कार्तिक शुक्ल नवमी का दिन देते हैं और कुछ प्रबोधिनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा (इस बार 24 नवंबर) तक के दिनों को इसके लिए शुभ मानते हैं; आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तुलसी कल्याणम् प्रायः द्वादशी (क्षीराब्धि द्वादशी) को होता है। अपने परिवार की रीति मानें।

तुलसी विवाह की कथा

प्रचलित कथा के अनुसार शिव के तेज से समुद्र में जन्मा असुरराज जालंधर बहुत बलवान था, और उसकी पत्नी वृंदा, असुर कालनेमि की पुत्री, ऐसी पतिव्रता थी कि उसके रहते जालंधर को कोई हरा नहीं सकता था। जालंधर ने शिव का रूप धरकर पार्वती को छलना चाहा; पार्वती पहचान गईं और उन्होंने यह बात भगवान विष्णु को बताई। तब विष्णु एक तपस्वी के वेश में वन में वृंदा के सामने आए। उनकी माया से दो वानर जालंधर का कटा सिर और धड़ ले आए, और वृंदा की विनती पर तपस्वी ने उसे जीवित कर दिया, पर उस देह में स्वयं विष्णु थे। वृंदा उन्हें पति मानती रही, उसका व्रत टूट गया, और जालंधर शिव से युद्ध में हार गया। सच जानकर वृंदा ने विष्णु को पत्थर हो जाने का शाप दिया। विष्णु ने शाप स्वीकार किया और शालग्राम शिला बन गए। सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा, तो देवताओं की प्रार्थना पर वृंदा ने शाप लौटा लिया और अग्नि में देह त्याग दी। जहाँ उसकी राख गिरी, वहाँ तुलसी का पौधा उगा। भगवान ने कहा कि अपने पतिव्रत के कारण वृंदा उन्हें लक्ष्मी से भी प्रिय है, तुलसी के रूप में वह सदा उनके साथ रहेगी, और जो उनके शालग्राम रूप से तुलसी का विवाह कराएगा, उसे इस लोक और परलोक में यश मिलेगा। इसी से हर वर्ष कार्तिक में तुलसी विवाह की परंपरा मानी जाती है।

पुराणों में यह कथा

ऊपर की प्रचलित कथा पुराणों की दो अलग कथाओं से मिलकर बनी है: वृंदा और जालंधर की, और तुलसी और शंखचूड़ की। पत्थर (शालग्राम) का शाप दूसरी कथा में है। नीचे वही बातें हैं जो हमने इन अध्यायों के अनुवाद और पाठ में जाँचीं।

शिव पुराण: वृंदा का शाप

शिव पुराण में वृंदा विष्णु को पत्थर का नहीं, पत्नी-वियोग का शाप देती है: जो दो राक्षस उसे दिखे थे, वे राक्षस बनकर विष्णु की पत्नी का हरण करेंगे, और विष्णु अपने शिष्य बने शेष के साथ पत्नी के वियोग में भटकेंगे; अनुवाद की टिप्पणियाँ इसे राम, सीता और लक्ष्मण से जोड़ती हैं। फिर वृंदा अग्नि में प्रवेश करती है और उसका तेज पार्वती में मिल जाता है।

शिव पुराण, रुद्र संहिता, युद्ध खंड, अध्याय 23

शिव पुराण: तुलसी कैसे उगी

वृंदा की चिता के पास विष्णु मोह में बैठे रहे। तब देवताओं ने मूल प्रकृति की स्तुति की, और उनके दिए बीजों से आँवला (धात्री), मालती और तुलसी के पौधे उगे; इसके बाद विष्णु का मोह दूर हुआ।

शिव पुराण, रुद्र संहिता, युद्ध खंड, अध्याय 26

पद्म पुराण: वृंदा

पद्म पुराण में भी वृंदा का शाप पत्नी-हरण का है: तपस्वी का वेश धरे कोई विष्णु की पत्नी को ले जाएगा। वहीं वन में वृंदा के पसीने से तुलसी के उत्पन्न होने की बात आती है।

पद्म पुराण, उत्तर खंड, अध्याय 15

पत्थर का शाप: तुलसी और शंखचूड़

तुलसी असुर शंखचूड़ की पत्नी थी। शिव और शंखचूड़ के युद्ध के समय विष्णु ने ब्राह्मण बनकर शंखचूड़ का कवच ले लिया और फिर शंखचूड़ का रूप धरकर तुलसी के पास गए। सच जानकर तुलसी ने उन्हें पत्थर हो जाने का शाप दिया। तब बताया गया कि तुलसी की देह गंडकी नदी बनेगी, वह स्वयं तुलसी का पौधा बनेगी, और विष्णु गंडकी के तट पर शालग्राम शिला के रूप में रहेंगे; शिव पुराण में यह शिव कहते हैं, देवी भागवत में स्वयं हरि।

शिव पुराण, रुद्र संहिता, युद्ध खंड, अध्याय 41; देवी भागवत पुराण 9.24

विवाह का संकेत

देवी भागवत में हरि तुलसी से कहते हैं कि वह दिव्य देह में उनकी पत्नी होगी। अगले अध्याय में तुलसी के आठ नामों में वृंदा और वृंदावनी भी गिने गए हैं (नीचे श्लोक देखें), और कार्तिक पूर्णिमा को तुलसी का उत्सव बताया गया है। तुलसी विवाह की रीति का विधान हमें जाँचे गए अध्यायों में नहीं मिला; Drik Panchang इसकी विधि व्रत परिचय के आधार पर देता है।

देवी भागवत पुराण 9.24–9.25

कहने के दूसरे रूप

कुछ कहने वालों के अनुसार युद्ध के समय वृंदा पति की जीत के लिए पूजा पर बैठी थी; विष्णु जालंधर के रूप में आए, उन्हें देखकर वह पूजा से उठ गई और उसका संकल्प टूट गया (आज तक)। वेबदुनिया के रूप में शाप लौटाने की बात नहीं है: वृंदा शाप देकर सती हो जाती है।

लोक परंपरा

विवाह की रीति: परंपरा

तुलसी विवाह विवाह की ही रीति से होता है: तुलसी वधू होती हैं, और शालग्राम या विष्णु-कृष्ण की प्रतिमा वर। यह रीति परंपरा से चलती है और क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदलती है; नीचे की विधि Drik Panchang, भक्ति भारत और नवभारत लाइव में दी गई प्रचलित रीति है, और क्षेत्रों की बातें Drik Panchang और विकिपीडिया (उसमें उद्धृत पुस्तकों) से। कई घरों में विवाह के मुहूर्त तुलसी विवाह के बाद ही शुरू माने जाते हैं।

ब्रज (मथुरा, वृंदावन)

दिन भर व्रत के बाद शाम को विवाह होता है, और कृष्ण मंदिरों में तुलसी और श्रीकृष्ण के विवाह में हल्दी, मेहँदी, जयमाला, फेरे और बारात जैसी सब रस्में होती हैं।

Drik Panchang; भक्ति भारत

महाराष्ट्र

वर और वधू के बीच अंतरपट (सफ़ेद कपड़ा) रखकर मंगलाष्टक पढ़े जाते हैं, अक्षत बरसाकर पट हटाया जाता है। कई जगह कोई निःसंतान दंपती तुलसी के माता-पिता बनकर कन्यादान करता है; प्रसाद में गन्ना, नारियल, फल और मूँगफली।

Drik Panchang; विकिपीडिया (Tulasi Vivaha)

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

तुलसी कल्याणम् में विष्णु आँवले की डाली के रूप में तुलसी के पास रखे जाते हैं; तुलसी को दुल्हन की तरह सजाकर षोडशोपचार पूजा और विवाह होता है।

Drik Panchang; विकिपीडिया (Tulasi Vivaha)

बिहार (सौंजा, प्रभु धाम)

कार्तिक शुक्ल एकादशी से त्रयोदशी तक तीन दिन का उत्सव: पहले दिन रामायण या रामचरितमानस का पाठ, दूसरे दिन शोभा यात्रा, तीसरे दिन तिलक और विवाह, और छप्पन भोग।

Drik Panchang; विकिपीडिया (Tulasi Vivaha)

पूजा विधि

  1. चरण 1

    व्रत और तैयारी

    कई परिवारों में विवाह कराने वाले दिन भर व्रत रखते हैं, और विवाह शाम को होता है। तुलसी के गमले को आँगन, छत या पूजा-स्थान में लकड़ी की चौकी पर रखें।

  2. चरण 2

    गन्ने का मंडप

    तुलसी के ऊपर गन्नों का मंडप बनाकर उसे सजाएँ (लोक परंपरा)।

  3. चरण 3

    वधू का श्रृंगार

    तुलसी को लाल चुनरी ओढ़ाएँ और चूड़ी, बिंदी, सिंदूर जैसी सुहाग की चीज़ें चढ़ाएँ।

  4. चरण 4

    वर

    शालग्राम, या विष्णु अथवा श्रीकृष्ण की प्रतिमा को वस्त्र पहनाकर वर के रूप में तुलसी के पास रखें।

  5. चरण 5

    हल्दी और पूजा

    दोनों को हल्दी लगाएँ, फिर धूप, दीप, फूल और नैवेद्य से पूजा करें; कई घर मौसम के फल और कंद भी चढ़ाते हैं।

  6. चरण 6

    कन्यादान और फेरे

    गोधूलि वेला में मंगलाष्टक पढ़कर परिवार तुलसी का कन्यादान करता है, और शालग्राम को हाथ में लेकर तुलसी की परिक्रमा (फेरे) कराई जाती है।

  7. चरण 7

    आरती और प्रसाद

    तुलसी और विष्णु की आरती के बाद प्रसाद बाँटें; कई जगह विवाह जैसा भोज होता है।

कार्तिक मास: स्नान, दीपदान, तुलसी पूजा और महीने के त्योहार

श्लोक

वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।पुष्पसारा नन्दनी च तुलसी कृष्णजीवनी॥
वृंदा, वृंदावनी, विश्व में पूजी जाने वाली, विश्व को पवित्र करने वाली, फूलों का सार, आनंद देने वाली, तुलसी और श्रीकृष्ण की जीवन-स्वरूपा: ये तुलसी के आठ नाम हैं।देवी भागवत पुराण 9.25.32 (तुलसी नामाष्टक); कुछ पाठों में "नन्दनी" के स्थान पर "नन्दिनी"

तुलसी के रिश्ते

ज्ञान-ग्राफ़ में देखें

देवता, पात्र और ऋषि 1

  • विष्णु · वर (शालग्राम रूप में)ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड; लोक परंपरा

पर्व 1

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी विवाह 2026 कब है?

21 नवंबर, शनिवार को (Drik Panchang), कार्तिक शुक्ल द्वादशी के दिन। द्वादशी तिथि 21 नवंबर को 6:33 AM से 22 नवंबर को 4:58 AM तक है। कई परिवार एक दिन पहले, देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) की शाम ही विवाह करते हैं।

तुलसी विवाह एकादशी को करें या द्वादशी को?

दोनों परंपराएँ हैं। Drik Panchang द्वादशी का दिन देता है, इस बार 21 नवंबर; कई परिवार देवउठनी एकादशी की शाम (20 नवंबर) विवाह करते हैं; और कई जगह एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा (24 नवंबर) तक कोई भी दिन चुना जाता है। अपने परिवार या पुरोहित की रीति मानें।

तुलसी विवाह किस समय करें?

परंपरा से शाम को। Drik Panchang की विधि में विष्णु की पूजा और तुलसी का कन्यादान गोधूलि वेला में होता है; 21 नवंबर को नई दिल्ली में गोधूलि मुहूर्त 5:25 PM से 5:52 PM तक है (सूर्यास्त 5:25 PM)। अपने शहर का समय ऊपर देखें।

तुलसी का विवाह किससे होता है?

शालग्राम शिला से, जो विष्णु का शिला-रूप मानी जाती है; कई घरों और मंदिरों में विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा से। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में आँवले की डाली विष्णु के रूप में रखी जाती है।

तुलसी विवाह की कथा क्या है?

प्रचलित कथा में जालंधर की पतिव्रता पत्नी वृंदा का व्रत विष्णु छल से तोड़ते हैं; वृंदा उन्हें पत्थर होने का शाप देती है, जिससे वे शालग्राम बनते हैं, और उसकी राख से तुलसी उगती है। पुराणों में पत्थर का शाप तुलसी और शंखचूड़ की कथा में है (शिव पुराण, युद्ध खंड 41; देवी भागवत 9.24)।

क्या तुलसी विवाह के बाद शादियाँ शुरू होती हैं?

परंपरा में चातुर्मास देवउठनी एकादशी पर पूरा होता है, और कई घरों में विवाह के मुहूर्त तुलसी विवाह के बाद ही शुरू माने जाते हैं। फिर भी शादी की तारीख पंचांग में शुद्ध मुहूर्त देखकर ही तय होती है; नवंबर 2026 के विवाह मुहूर्त अलग पन्ने पर हैं।

स्रोत

  1. शिव पुराण, रुद्र संहिता, युद्ध खंड, अध्याय 23, 26 और 41 (वृंदा का शाप; आँवला, मालती और तुलसी; तुलसी और शंखचूड़)
  2. देवी भागवत पुराण 9.24–9.25 (तुलसी का शाप, गंडकी और शालग्राम; तुलसी नामाष्टक 9.25.32)
  3. पद्म पुराण, उत्तर खंड, अध्याय 15 (वृंदा का शाप)
  4. Drik Panchang: तुलसी विवाह 2026 (नई दिल्ली), तुलसी विवाह व्रत कथा, और 20–21 नवंबर 2026 का पंचांग (गोधूलि मुहूर्त)
  5. प्रचलित कथा: वेबदुनिया, भक्ति भारत, आज तक (2024)
  6. रीति: Drik Panchang (व्रत परिचय के आधार पर), भक्ति भारत, नवभारत लाइव (2025), विकिपीडिया "Tulasi Vivaha" और उसमें उद्धृत पुस्तकें
  7. तुलसी नामाष्टक: sa.wikisource (देवी भागवत 9.25) और sanskritdocuments.org
  8. मुहूर्त और तिथि: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026) से मिलान

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