व्रत और पर्व

कार्तिगै दीपम 2026 कब है: 24 नवंबर

मंगलवार, 24 नवंबर 2026

तमिल माह कार्तिगै, कृत्तिका नक्षत्र; इसी दिन कार्तिक पूर्णिमा

34 दिन बाद
कोड से बना चित्र: शाम के आकाश में अकेली पहाड़ी, जिसकी चोटी पर बड़ी लौ जल रही है, बगल में उगता पूरा चाँद, पहाड़ी की तलहटी में मंदिर के तीन गोपुरम और सामने देहरी पर मिट्टी के दीयों की कतार

दीप जलाने का समय और नक्षत्र

सूर्यास्तदीप परंपरा से संध्या को जलाए जाते हैं
5:25 PM
कृत्तिका (कार्तिगै) नक्षत्र
2:03 AM से 11:26 PM तक
पूर्णिमा तिथि
11:43 PM (23 नव॰) से 8:24 PM तक

नक्षत्र और तिथि एक ही क्षण पर बदलते हैं, इसलिए उनके समय पूरे भारत में एक ही हैं; सूर्यास्त शहर के अनुसार। तिरुवन्नामलै में भरणी दीपम और पहाड़ी पर महा दीपम का समय अरुणाचलेश्वर मंदिर घोषित करता है।

मंगलवार, 24 नवंबर 2026 के लिए, भारतीय मानक समय में, चुने हुए शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह-स्थिति से। अलग-अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है। गणना कैसे होती है

संक्षेप में

कार्तिगै दीपम 2026 में 24 नवंबर, मंगलवार को है। तमिल सौर माह कार्तिगै 17 नवंबर से शुरू होता है, और उसमें दीपों का यह पर्व उस दिन मनाया जाता है जिस दिन कृत्तिका (तमिल में कार्तिगै) नक्षत्र हो। 2026 में कृत्तिका नक्षत्र 24 नवंबर की रात 2:03 बजे से उसी रात 11:26 बजे तक है, और उसी दिन रात 8:24 बजे तक पूर्णिमा भी है; Drik Panchang का तमिल पंचांग (चेन्नई) भी कार्तिगै दीपम 24 नवंबर को देता है। तिरुवन्नामलै के अरुणाचलेश्वर मंदिर में परंपरा से इसी दिन तड़के भरणी दीपम और शाम को अण्णामलै पहाड़ी की चोटी पर महा दीपम जलता है; 2026 के समय मंदिर घोषित करेगा। उत्तर भारत की कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली भी इसी दिन हैं।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 11 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

शहर-वार समय

कृत्तिका नक्षत्र और पूर्णिमा के समय हर शहर में एक ही हैं; सूर्यास्त, जब से दीप जलाए जाते हैं, शहर के अनुसार बदलता है। दूसरे शहर के लिए ऊपर के बॉक्स में शहर चुनें।

शहरसूर्यास्त
चेन्नई5:39 PM
मदुरै5:53 PM
कोयंबटूर5:56 PM
बेंगलुरु5:50 PM
कोच्चि6:00 PM

एक नज़र में

तारीख
24 नवंबर 2026, मंगलवार (तमिल माह कार्तिगै का 8वाँ दिन)
कृत्तिका नक्षत्र
24 नवंबर, रात 2:03 से रात 11:26 बजे तक (Drik Panchang: 2:02 AM से 11:25 PM)
पूर्णिमा तिथि
23 नवंबर रात 11:43 से 24 नवंबर रात 8:24 बजे तक (Drik: 11:42 PM से 8:23 PM)
तमिल माह कार्तिगै
17 नवंबर 2026 से (वृश्चिक संक्रांति 16 नवंबर की शाम, सूर्यास्त के बाद)
तिरुवन्नामलै
तड़के मंदिर में भरणी दीपम, शाम को पहाड़ी पर महा दीपम (परंपरा); 2026 का समय मंदिर घोषित करेगा
आराध्य
शिव: अरुणाचलेश्वर (अण्णामलैयार), पंचभूत स्थलों में अग्नि-लिंग
केरल
तृक्कार्तिका, इसी दिन (Drik Panchang का मलयालम कैलेंडर)
उत्तर भारत में इसी दिन
कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली
अगला कार्तिगै दीपम
11 दिसंबर 2027 (Drik Panchang का तमिल पंचांग, चेन्नई)

तारीख कैसे तय होती है

तमिल कैलेंडर सौर है: हर महीना उस संक्रांति से शुरू होता है जब सूर्य अगली राशि में जाता है, और संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो महीना अगले दिन से गिना जाता है। 2026 में वृश्चिक संक्रांति 16 नवंबर की शाम 7:50 बजे है, चेन्नई में सूर्यास्त के बाद, इसलिए कार्तिगै माह 17 नवंबर से है। इस महीने में जिस दिन चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में हो, वह कार्तिगै दीपम है, और यह प्रायः पूर्णिमा के आसपास पड़ता है। 2026 में 23 नवंबर को पूरे दिन भरणी नक्षत्र है, जो 24 नवंबर की रात 2:03 बजे खत्म होता है; उसके बाद 24 नवंबर को सुबह, शाम और रात 11:26 बजे तक कृत्तिका है। इसलिए दिन में कोई संशय नहीं है, और Drik Panchang का चेन्नई का तमिल पंचांग भी 24 नवंबर देता है। कुछ वर्षों में कृत्तिका और पूर्णिमा अलग-अलग दिन पड़ते हैं; तब पर्व कृत्तिका की शाम को होता है। जैसे 2025 में कृत्तिका 3 दिसंबर की शाम लगभग 6 बजे लगी और पूर्णिमा 4 दिसंबर को थी, और तिरुवन्नामलै में महा दीपम 3 दिसंबर को जला (PTI)।

तिरुवन्नामलै: भरणी दीपम और महा दीपम

तिरुवन्नामलै (तमिलनाडु) का अरुणाचलेश्वर (अण्णामलैयार) मंदिर पंचभूत स्थलों में अग्नि-तत्त्व का स्थान माना जाता है, और कार्तिगै दीपम यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है। मंदिर तमिलनाडु सरकार के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के अधीन है। 18 अक्टूबर 2026 तक मंदिर ने 2026 के उत्सव की सूची नहीं छापी थी; नीचे का क्रम पिछले वर्षों की रिपोर्टों से है।

दस दिन का उत्सव

उत्सव ध्वज फहराने (कोडियेट्रम) से शुरू होता है और दसवें दिन दीपम पर पहुँचता है। 2025 में ध्वज 24 नवंबर को फहराया गया और महा दीपम 3 दिसंबर को जला; 2023 में ध्वज 17 नवंबर को फहराया गया और उत्सव 26 नवंबर को था। इसी गिनती से 2026 में ध्वज लगभग 15 नवंबर को फहराया जाएगा, पर पक्की तारीख मंदिर की सूचना से देखें।

PTI (The Week), 24 नवंबर 2025; DT Next, 19 अक्टूबर 2023

भरणी दीपम: तड़के, मंदिर में

दीपम के दिन तड़के गर्भगृह के सामने भरणी दीपम जलाया जाता है। 2013 की रिपोर्ट के अनुसार पुजारियों ने इसे सुबह 4 बजे जलाया था। नाम भरणी नक्षत्र से है, जो कृत्तिका से ठीक पहले का नक्षत्र है।

PTI, 24 नवंबर 2025; Deccan Chronicle, 18 नवंबर 2013

महा दीपम: शाम को, पहाड़ी की चोटी पर

शाम को मंदिर के पीछे की 2,668 फ़ुट ऊँची अण्णामलै पहाड़ी की चोटी पर एक बड़े पात्र में घी का दीप जलाया जाता है। 2013 में यह ठीक शाम 6 बजे जला, उसमें 3,500 किलो से अधिक घी लगा, और मंदिर के अनुसार दीप 11 दिन से अधिक जलता रहना था; दीप जलने से पहले अर्धनारीश्वर की उत्सव-मूर्ति को ध्वज-स्तंभ के चारों ओर ले जाया गया। 2026 का समय मंदिर घोषित करेगा; तिरुवन्नामलै में 24 नवंबर को सूर्यास्त लगभग 5:45 बजे है।

PTI, 24 नवंबर 2025 (ऊँचाई); Deccan Chronicle, 18 नवंबर 2013

गिरिवलम्

हर पूर्णिमा को हज़ारों यात्री नंगे पाँव अण्णामलै पहाड़ी की लगभग 14 किमी की परिक्रमा (गिरिवलम्) करते हैं, और दीपम के समय यह संख्या लाखों में होती है। 2025 में प्रशासन ने उत्सव में लगभग 40 लाख लोगों के आने का अनुमान रखा था।

Wikipedia: Arunachalesvara Temple; PTI, 24 नवंबर 2025

अरुणाचल: अग्नि का पर्वत

शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता) की कथा में ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद के समय शिव अग्नि के एक अनंत स्तंभ के रूप में प्रकट होते हैं; विष्णु वराह बनकर उसका मूल और ब्रह्मा हंस बनकर उसका सिरा खोजते हैं, और दोनों को अंत नहीं मिलता। उसी संहिता के नौवें अध्याय में शिव कहते हैं कि यह लिंग अग्नि के पर्वत की तरह उठा, इसलिए यह स्थान "अरुण" पर्वत, यानी अरुणाचल, नाम से प्रसिद्ध होगा (Motilal Banarsidass का अंग्रेज़ी अनुवाद, श्लोक 21)। उसी अध्याय में शिव के इस प्रकट होने का दिन मार्गशीर्ष माह का आर्द्रा नक्षत्र बताया गया है, जिसे दक्षिण में आरुद्रा दर्शनम के रूप में मनाया जाता है। कार्तिगै दीपम पर पहाड़ी पर जलने वाले दीप को तिरुवन्नामलै की परंपरा शिव के इसी अग्नि-रूप का स्मरण मानती है।

घर में दीप

तमिलनाडु में इस शाम घरों के दरवाज़ों, देहरी और आँगन में मिट्टी के दीयों (अगल विळक्कु) की कतारें जलाई जाती हैं। इस पर्व का उल्लेख संगम काल के ग्रंथ अकनानूरु और कवयित्री अव्वैयार के गीतों में मिलता है। दीप कितने और कहाँ रखें, और क्या प्रसाद बने, यह हर परिवार की अपनी रीति है; अपने घर और मंदिर की परंपरा से करें।

मुरुगन और छह कृत्तिकाएँ

तमिल परंपरा कार्तिगै दीपम को मुरुगन (कार्तिकेय, स्कंद) से भी जोड़ती है। कंद पुराणम् की कथा के अनुसार स्कंद के छह शिशु-रूपों को कृत्तिकाओं ने पाला, और बाद में पार्वती ने उन्हें एक कर दिया; परंपरा के अनुसार इसी से उनका नाम कार्तिकेय है। तमिलनाडु सरकार के पर्यटन विवरण के अनुसार यह पर्व कृत्तिकाओं और पार्वती द्वारा कार्तिकेय के छह रूपों को एक करने के दिन की याद में है। ये परंपरा की कथाएँ हैं।

केरल की तृक्कार्तिका

केरल में यही पर्व तृक्कार्तिका कहलाता है और देवी की आराधना के रूप में मनाया जाता है; घरों में दीप जलाए जाते हैं। Drik Panchang का मलयालम कैलेंडर (तिरुवनंतपुरम) भी इसे 24 नवंबर 2026 को देता है।

Drik Panchang से मिलान

इस पन्ने के समय हमारी पंचांग गणना से हैं (भारतीय मानक समय, लाहिड़ी अयनांश)। कार्तिगै दीपम की तारीख 24 नवंबर Drik Panchang के चेन्नई के तमिल पंचांग में है, जिसे हमने तमिल कैलेंडर के पन्नों के लिए 18 अक्टूबर 2026 को पढ़ा। Drik का कार्तिगै दीपम का अपना पन्ना उस दिन reCAPTCHA के कारण नहीं खुला; उसके खोज-परिणाम में कृत्तिका का आरंभ 24 नवंबर रात 2:02 बजे और अंत रात 11:25 बजे दिखा, और हमारी गणना 2:03 और 11:26 देती है। पूर्णिमा Drik की सूची में 23 नवंबर रात 11:42 से 24 नवंबर रात 8:23 तक है, हमारी गणना में 11:43 से 8:24 तक, यानी 1 मिनट बाद।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्तिगै दीपम 2026 कब है?

24 नवंबर, मंगलवार को। उस दिन कृत्तिका (कार्तिगै) नक्षत्र रात 2:03 बजे से रात 11:26 बजे तक है और पूर्णिमा रात 8:24 बजे तक; Drik Panchang का तमिल पंचांग (चेन्नई) भी यही दिन देता है।

तिरुवन्नामलै महा दीपम 2026 किस समय जलेगा?

महा दीपम 24 नवंबर की शाम को अण्णामलै पहाड़ी की चोटी पर जलेगा। पिछले वर्षों में यह लगभग शाम 6 बजे जला (2013 में ठीक 6 बजे, Deccan Chronicle), और उसी दिन तड़के मंदिर में भरणी दीपम (2013 में सुबह 4 बजे)। 2026 का पक्का समय अरुणाचलेश्वर मंदिर घोषित करेगा।

क्या कार्तिगै दीपम और कार्तिक पूर्णिमा एक ही दिन हैं?

2026 में हाँ: दोनों 24 नवंबर को हैं। पर हर वर्ष नहीं, क्योंकि कार्तिगै दीपम तमिल सौर माह कार्तिगै में कृत्तिका नक्षत्र के दिन होता है, और कार्तिक पूर्णिमा चंद्र माह की तिथि है। 2025 में कार्तिगै दीपम 3 दिसंबर को था और पूर्णिमा 4 दिसंबर को।

भरणी दीपम क्या है?

तिरुवन्नामलै के अरुणाचलेश्वर मंदिर में दीपम के दिन तड़के गर्भगृह के सामने जलाया जाने वाला दीप (PTI)। इसका नाम भरणी नक्षत्र से है, जो कृत्तिका से पहले आता है। शाम को इसी के बाद पहाड़ी पर महा दीपम जलता है।

कार्तिगै दीपम 2027 कब है?

11 दिसंबर 2027 को, Drik Panchang के तमिल पंचांग (चेन्नई) के अनुसार। उस वर्ष कार्तिगै माह 17 नवंबर 2027 से है।

घर में कार्तिगै दीपम कैसे मनाते हैं?

शाम को घर के दरवाज़े, देहरी और आँगन में मिट्टी के दीयों की कतारें जलाई जाती हैं। दीपों की संख्या, पूजा और प्रसाद हर परिवार की अपनी रीति से होते हैं। अपने शहर का सूर्यास्त ऊपर के बॉक्स में देखें।

अरुणाचल को अग्नि का पर्वत क्यों कहते हैं?

शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता (अध्याय 9) में शिव कहते हैं कि अग्नि-स्तंभ के रूप में प्रकट लिंग अग्नि के पर्वत की तरह उठा, इसलिए यह "अरुण" पर्वत कहलाएगा। तिरुवन्नामलै का मंदिर पंचभूत स्थलों में अग्नि-तत्त्व का स्थान माना जाता है।

तृक्कार्तिका क्या है?

केरल में कार्तिगै दीपम को तृक्कार्तिका कहते हैं; यह देवी की आराधना का दिन है और घरों में दीप जलाए जाते हैं। 2026 में यह भी 24 नवंबर को है (Drik Panchang, मलयालम कैलेंडर)।

स्रोत

  1. Drik Panchang: तमिल पंचांग, चेन्नई, नवंबर 2026 और दिसंबर 2027 (कार्तिगै दीपम 24 नवंबर 2026, 11 दिसंबर 2027) और मलयालम कैलेंडर, तिरुवनंतपुरम (तृक्कार्तिका), 18 अक्टूबर 2026 को पढ़े; कार्तिगै दीपम पन्ने के कृत्तिका-समय उसके खोज-परिणाम से (पन्ना reCAPTCHA के कारण नहीं खुला)
  2. Drik Panchang: पूर्णिमा सूची 2026, नई दिल्ली (कार्तिक पूर्णिमा: 23 नवंबर 11:42 PM से 24 नवंबर 8:23 PM)
  3. Haindavam, कार्तिगै दीपम 24 नवंबर 2026: "Krittika upto 11:25 PM", "Purnima upto 8:23 PM"
  4. PTI (The Week), 24 नवंबर 2025: तिरुवन्नामलै में दस दिन का उत्सव ध्वज फहराने से शुरू; भरणी दीपम और 2,668 फ़ुट ऊँची पहाड़ी पर महा दीपम 3 दिसंबर 2025
  5. DT Next, 19 अक्टूबर 2023: 2023 का उत्सव 17 नवंबर (ध्वज) से 26 नवंबर तक
  6. Deccan Chronicle, 18 नवंबर 2013: भरणी दीपम सुबह 4 बजे, महा दीपम शाम 6 बजे, 3,500 किलो से अधिक घी, अर्धनारीश्वर
  7. शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता, अध्याय 9 (अग्नि-स्तंभ; "अरुण" पर्वत, श्लोक 21; आर्द्रा नक्षत्र, श्लोक 15), Motilal Banarsidass का अंग्रेज़ी अनुवाद (wisdomlib.org)
  8. Wikipedia: Arunachalesvara Temple (शिव पुराण की कथा, HR&CE, गिरिवलम्) और Karthika Deepam (अकनानूरु, अव्वैयार, कंद पुराणम्, तृक्कार्तिका)
  9. तमिलनाडु सरकार: Karthigai festival (पर्यटन विवरण, Wikipedia के माध्यम से)
  10. घर के दीप और मंदिर-उत्सव की रीति: लोक परंपरा
  11. नक्षत्र, तिथि, सूर्यास्त और पारण: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang के तमिल पंचांग (चेन्नई) और एकादशी सूची (नई दिल्ली) से मिलान (18 अक्टूबर 2026)

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