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सुखकर्ता दुखहर्ता: गणपति की मराठी आरती PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/sukhkarta-dukhharta/
“सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची” गणपति की सबसे प्रसिद्ध मराठी आरती है, जिसे परंपरा संत समर्थ रामदास (1608 से 1682) की रचना मानती है। महाराष्ट्र में पूजा के अंत में गाई जाने वाली आरतियों में यह प्रायः पहली होती है। गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेशोत्सव में और प्रतिदिन की पूजा में इसे घर-घर गाया जाता है।
यह आरती मराठी में है और यहाँ इसका मूल मराठी पाठ दिया गया है। अलग-अलग स्रोतों में वर्तनी थोड़ी भिन्न मिलती है, जैसे ‘दुःखहर्ता’, ‘विघ्नांची’, ‘उटि’, ‘कुमकुम केशरा’, ‘हिरे जड़ित’, ‘फणिवर बंधना’ और टेक में ‘मन कामना पूर्ती’। मराठी विकिपीडिया के अनुसार ‘नुरवी’ को अक्सर गलती से ‘नुर्वी’ पढ़ा जाता है। अंतिम पद में ‘दास रामाचा’ (राम का दास) शब्दों को रामदास की छाप माना जाता है, और मराठी विकिपीडिया के अनुसार माना जाता है कि मोरगाँव के मयूरेश्वर गणपति के दर्शन से उन्हें यह आरती रचने की प्रेरणा मिली। महाराष्ट्र में टेक ‘जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती’ हर पद के बाद गाई जाती है; यहाँ उसे पहले पद के बाद एक बार दिया गया है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुखकर्ता दुखहर्ता आरती किसने लिखी?
परंपरा के अनुसार संत समर्थ रामदास (1608 से 1682) ने, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के समय के मराठी संत-कवि थे। अंतिम पद में ‘दास रामाचा’ शब्द उनकी छाप माने जाते हैं।
यह आरती किस भाषा में है?
मराठी में। महाराष्ट्र से बाहर भी गणेशोत्सव में यह बहुत गाई जाती है, इसलिए यहाँ मूल मराठी पाठ के साथ हिंदी अर्थ दिया गया है।
‘वार्ता विघ्नाची नुरवी’ का क्या अर्थ है?
‘वार्ता’ यानी बात या चर्चा, ‘विघ्नाची’ यानी विघ्न की, और ‘नुरवी’ यानी शेष नहीं रहने देते। भाव यह है कि गणपति विघ्नों की बात तक नहीं रहने देते।
यह आरती कब गाई जाती है?
गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेशोत्सव में सुबह-शाम, प्रतिदिन की पूजा में, और महाराष्ट्र में प्रायः किसी भी पूजा के अंत में आरतियों के क्रम में सबसे पहले।
क्या यह ‘जय गणेश देवा’ से अलग आरती है?
हाँ। ‘जय गणेश जय गणेश देवा’ हिंदी की आरती है, जबकि ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ मराठी की आरती है, जिसे समर्थ रामदास से जोड़ा जाता है।
स्रोत
- परंपरागत मराठी आरती पाठ
- समर्थ रामदास रचित (परंपरा अनुसार)
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, mr.wikipedia.org, marathi.webdunia.com, amit.chakradeo.net
