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हनुमान जी की आरती: आरती कीजै हनुमान लला की PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/hanuman-aarti/
“आरती कीजै हनुमान लला की” हनुमान जी की सबसे प्रचलित आरती है। इसमें सीता की खोज, लंका दहन, संजीवनी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाने और अहिरावण के वध जैसे प्रसंगों को संक्षेप में याद किया गया है। यह मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती पर, हनुमान चालीसा या सुंदरकांड पाठ के बाद, और दशहरे के आसपास होने वाले रामायण पाठ में गाई जाती है।
कुछ संग्रहों (जैसे द्रिक पंचांग) में अंतिम दो पंक्तियाँ ‘लंक विध्वंस किये रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥’ नहीं हैं; कुछ में ये ‘लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई॥’ के रूप में ‘जो हनुमानजी की आरती गावे’ से पहले आती हैं। अन्य अंतर: ‘दे बीरा’ की जगह ‘दे वीरा’, ‘आनि संजीवन’ की जगह ‘लाये संजीवन’, ‘गिरिवर’ की जगह ‘गिरवर’ और ‘बसि बैकुंठ’ की जगह ‘बसहिं बैकुंठ’। अंतिम पंक्ति में तुलसीदास का नाम आने से कई लोग इसे उनकी रचना मानते हैं, पर यह स्थापित नहीं है। गाते समय पहली दो पंक्तियाँ (टेक) हर पद के बाद दोहराई जाती हैं।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह आरती कब गाई जाती है?
मंगलवार और शनिवार को, हनुमान जयंती पर, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड के पाठ के बाद, और रामायण पाठ के समापन पर।
क्या यह आरती तुलसीदास की रचना है?
अंतिम पंक्ति ‘तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई’ के कारण कई लोग इसे तुलसीदास की रचना मानते हैं, पर यह स्थापित नहीं है, और कुछ संग्रहों में यह पंक्ति है ही नहीं। इसकी रचना का कोई प्रामाणिक इतिहास ज्ञात नहीं है।
“दे बीरा रघुनाथ पठाए” का क्या अर्थ है?
बीरा यानी पान का बीड़ा। पुराने समय में किसी कठिन काम का ज़िम्मा सौंपते समय बीड़ा दिया जाता था, और उसे उठाने वाला काम पूरा करने का वचन देता था (‘बीड़ा उठाना’ मुहावरा यहीं से है)। पंक्ति का भाव है कि श्रीराम ने सीता की खोज का काम हनुमान जी को सौंपकर भेजा।
अहिरावण का प्रसंग कहाँ से है?
अहिरावण (महिरावण) द्वारा राम-लक्ष्मण को पाताल ले जाने और हनुमान जी द्वारा उन्हें छुड़ाने की कथा वाल्मीकि रामायण में नहीं है। यह बाद की रामकथा परंपराओं और लोककथाओं में मिलती है। लंका दहन और संजीवनी के प्रसंग वाल्मीकि रामायण के सुंदरकाण्ड और युद्धकाण्ड में हैं।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
- लंका दहन और संजीवनी: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकाण्ड और युद्धकाण्ड
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, bhaktibharat.com, hindi.webdunia.com, vedadhara.com
