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श्री विनायक अष्टोत्तर शतनामावली: गणेश जी के 108 नाम

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 9 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. 1

    ॐ विनायकाय नमः।

    सबसे श्रेष्ठ नायक, विनायक को नमस्कार।

  2. 2

    ॐ विघ्नराजाय नमः।

    विघ्नों के स्वामी को नमस्कार।

  3. 3

    ॐ गौरीपुत्राय नमः।

    गौरी (पार्वती) के पुत्र को नमस्कार।

  4. 4

    ॐ गणेश्वराय नमः।

    गणों (शिव के गणों) के स्वामी को नमस्कार।

  5. 5

    ॐ स्कन्दाग्रजाय नमः।

    स्कन्द (कार्तिकेय) के बड़े भाई को नमस्कार।

  6. 6

    ॐ अव्ययाय नमः।

    कभी नष्ट न होने वाले, अविनाशी को नमस्कार।

  7. 7

    ॐ पूताय नमः।

    पवित्र और शुद्ध स्वरूप वाले को नमस्कार।

  8. 8

    ॐ दक्षाय नमः।

    कुशल और समर्थ को नमस्कार।

  9. 9

    ॐ अध्यक्षाय नमः।

    सबकी देखरेख करने वाले अध्यक्ष को नमस्कार।

  10. 10

    ॐ द्विजप्रियाय नमः।

    द्विजों (ब्राह्मण आदि) के प्रिय को नमस्कार।

  11. 11

    ॐ अग्निगर्भच्छिदे नमः।

    ‘अग्निगर्भ’ को भेदने वाले (शब्दार्थ; जाँचे गए स्रोत इस नाम का प्रसंग नहीं बताते) को नमस्कार।

  12. 12

    ॐ इन्द्रश्रीप्रदाय नमः।

    इन्द्र को श्री (ऐश्वर्य) देने वाले को नमस्कार।

  13. 13

    ॐ वाणीप्रदाय नमः।

    वाणी (बोलने की शक्ति और विद्या) देने वाले को नमस्कार।

  14. 14

    ॐ अव्ययाय नमः।

    फिर से, अविनाशी (अव्यय) को नमस्कार।

  15. 15

    ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः।

    सब सिद्धियाँ (सफलताएँ) देने वाले को नमस्कार।

  16. 16

    ॐ शर्वतनयाय नमः।

    शर्व (शिव) के पुत्र को नमस्कार।

  17. 17

    ॐ शर्वरीप्रियाय नमः।

    शर्वरी (रात्रि) से प्रेम करने वाले (शब्दार्थ) को नमस्कार।

  18. 18

    ॐ सर्वात्मकाय नमः।

    सबकी आत्मा, सबमें व्याप्त को नमस्कार।

  19. 19

    ॐ सृष्टिकर्त्रे नमः।

    सृष्टि रचने वाले को नमस्कार।

  20. 20

    ॐ देवाय नमः।

    देव, दिव्य और प्रकाशमान को नमस्कार।

  21. 21

    ॐ अनेकार्चिताय नमः।

    अनेक (बहुत-से भक्तों और देवताओं) द्वारा पूजित को नमस्कार।

  22. 22

    ॐ शिवाय नमः।

    शिव, अर्थात् कल्याणकारी को नमस्कार।

  23. 23

    ॐ शुद्धाय नमः।

    शुद्ध, निर्मल को नमस्कार।

  24. 24

    ॐ बुद्धिप्रियाय नमः।

    बुद्धि (ज्ञान) से प्रेम करने वाले को नमस्कार।

  25. 25

    ॐ शान्ताय नमः।

    शान्त स्वभाव वाले को नमस्कार।

  26. 26

    ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।

    ब्रह्मचारी (संयम में रहने वाले) को नमस्कार।

  27. 27

    ॐ गजाननाय नमः।

    हाथी के मुख वाले को नमस्कार।

  28. 28

    ॐ द्वैमात्रेयाय नमः।

    दो माताओं वाले को नमस्कार।

  29. 29

    ॐ मुनिस्तुत्याय नमः।

    मुनियों द्वारा स्तुति के योग्य को नमस्कार।

  30. 30

    ॐ भक्तविघ्नविनाशनाय नमः।

    भक्तों के विघ्नों का नाश करने वाले को नमस्कार।

  31. 31

    ॐ एकदन्ताय नमः।

    एक दाँत वाले को नमस्कार।

  32. 32

    ॐ चतुर्बाहवे नमः।

    चार भुजाओं वाले को नमस्कार।

  33. 33

    ॐ चतुराय नमः।

    चतुर, कुशल बुद्धि वाले को नमस्कार।

  34. 34

    ॐ शक्तिसंयुताय नमः।

    शक्ति से युक्त को नमस्कार।

  35. 35

    ॐ लम्बोदराय नमः।

    लम्बे (बड़े) उदर वाले को नमस्कार।

  36. 36

    ॐ शूर्पकर्णाय नमः।

    सूप जैसे बड़े कानों वाले को नमस्कार।

  37. 37

    ॐ हरये नमः।

    हरि, अर्थात् दुख और पाप हरने वाले को नमस्कार।

  38. 38

    ॐ ब्रह्मविदुत्तमाय नमः।

    ब्रह्म को जानने वालों में श्रेष्ठ को नमस्कार।

  39. 39

    ॐ कालाय नमः।

    काल (समय) के स्वरूप को नमस्कार।

  40. 40

    ॐ ग्रहपतये नमः।

    ग्रहों के स्वामी को नमस्कार।

  41. 41

    ॐ कामिने नमः।

    कामी, अर्थात् प्रेम और इच्छा रखने वाले (शब्दार्थ) को नमस्कार।

  42. 42

    ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः।

    चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि रूपी तीन नेत्रों वाले को नमस्कार।

  43. 43

    ॐ पाशाङ्कुशधराय नमः।

    पाश (फंदा) और अंकुश धारण करने वाले को नमस्कार।

  44. 44

    ॐ चण्डाय नमः।

    प्रचण्ड, उग्र रूप वाले को नमस्कार।

  45. 45

    ॐ गुणातीताय नमः।

    तीनों गुणों (सत्त्व, रज, तम) से परे को नमस्कार।

  46. 46

    ॐ निरञ्जनाय नमः।

    निर्मल, दोषरहित को नमस्कार।

  47. 47

    ॐ अकल्मषाय नमः।

    पाप और मैल से रहित को नमस्कार।

  48. 48

    ॐ स्वयंसिद्धाय नमः।

    अपने आप में सिद्ध (पूर्ण) को नमस्कार।

  49. 49

    ॐ सिद्धार्चितपदाम्बुजाय नमः।

    सिद्धों द्वारा पूजे गए चरण-कमलों वाले को नमस्कार।

  50. 50

    ॐ बीजपूरफलासक्ताय नमः।

    बीजपूर (बिजौरा) फल को पसंद करने वाले को नमस्कार।

  51. 51

    ॐ वरदाय नमः।

    वर देने वाले को नमस्कार।

  52. 52

    ॐ शाश्वताय नमः।

    शाश्वत, सदा रहने वाले को नमस्कार।

  53. 53

    ॐ कृतिने नमः।

    कृती, अर्थात् कुशल और कृतार्थ को नमस्कार।

  54. 54

    ॐ द्विजप्रियाय नमः।

    फिर से, द्विजों (ब्राह्मण आदि) के प्रिय को नमस्कार।

  55. 55

    ॐ वीतभयाय नमः।

    भय से मुक्त को नमस्कार।

  56. 56

    ॐ गदिने नमः।

    गदा धारण करने वाले को नमस्कार।

  57. 57

    ॐ चक्रिणे नमः।

    चक्र धारण करने वाले को नमस्कार।

  58. 58

    ॐ इक्षुचापधृते नमः।

    गन्ने का धनुष धारण करने वाले को नमस्कार।

  59. 59

    ॐ श्रीदाय नमः।

    श्री (समृद्धि) देने वाले को नमस्कार।

  60. 60

    ॐ अजाय नमः।

    अजन्मा को नमस्कार।

  61. 61

    ॐ उत्पलकराय नमः।

    हाथ में उत्पल (नील कमल) लिए हुए को नमस्कार।

  62. 62

    ॐ श्रीपतये नमः।

    श्री (लक्ष्मी, समृद्धि) के स्वामी को नमस्कार।

  63. 63

    ॐ स्तुतिहर्षिताय नमः।

    स्तुति से प्रसन्न होने वाले को नमस्कार।

  64. 64

    ॐ कुलाद्रिभेत्त्रे नमः।

    कुल-पर्वतों (बड़े पर्वतों) को भी भेद देने वाले को नमस्कार।

  65. 65

    ॐ जटिलाय नमः।

    जटाधारी को नमस्कार।

  66. 66

    ॐ कलिकल्मषनाशनाय नमः।

    कलियुग के पापों का नाश करने वाले को नमस्कार।

  67. 67

    ॐ चन्द्रचूडामणये नमः।

    चन्द्रमा को सिर के आभूषण (चूड़ामणि) की तरह धारण करने वाले को नमस्कार।

  68. 68

    ॐ कान्ताय नमः।

    सुन्दर और मनोहर को नमस्कार।

  69. 69

    ॐ पापहारिणे नमः।

    पाप हरने वाले को नमस्कार।

  70. 70

    ॐ समाहिताय नमः।

    एकाग्र, ध्यान में स्थिर को नमस्कार।

  71. 71

    ॐ आश्रिताय नमः।

    सबके आश्रय (जिनकी शरण ली जाती है) को नमस्कार।

  72. 72

    ॐ श्रीकराय नमः।

    श्री (मंगल और समृद्धि) लाने वाले को नमस्कार।

  73. 73

    ॐ सौम्याय नमः।

    सौम्य, कोमल स्वभाव वाले को नमस्कार।

  74. 74

    ॐ भक्तवाञ्छितदायकाय नमः।

    भक्तों की मनचाही वस्तु देने वाले को नमस्कार।

  75. 75

    ॐ शान्ताय नमः।

    फिर से, शान्त स्वरूप को नमस्कार।

  76. 76

    ॐ कैवल्यसुखदाय नमः।

    कैवल्य (मोक्ष) का सुख देने वाले को नमस्कार।

  77. 77

    ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः।

    सत्, चित् और आनन्द रूप देह वाले को नमस्कार।

  78. 78

    ॐ ज्ञानिने नमः।

    ज्ञानी को नमस्कार।

  79. 79

    ॐ दयायुताय नमः।

    दया से भरे हुए को नमस्कार।

  80. 80

    ॐ दान्ताय नमः।

    इन्द्रियों को वश में रखने वाले को नमस्कार।

  81. 81

    ॐ ब्रह्मद्वेषविवर्जिताय नमः।

    ब्रह्म (वेद और ब्राह्मण) के प्रति द्वेष से पूरी तरह रहित को नमस्कार।

  82. 82

    ॐ प्रमत्तदैत्यभयदाय नमः।

    मद में चूर दैत्यों को भय देने वाले को नमस्कार।

  83. 83

    ॐ श्रीकण्ठाय नमः।

    सुन्दर कण्ठ वाले को नमस्कार।

  84. 84

    ॐ विबुधेश्वराय नमः।

    विबुधों (देवताओं और ज्ञानियों) के ईश्वर को नमस्कार।

  85. 85

    ॐ रमार्चिताय नमः।

    रमा (लक्ष्मी) द्वारा पूजित को नमस्कार।

  86. 86

    ॐ विधये नमः।

    विधि, अर्थात् सबका विधान करने वाले को नमस्कार।

  87. 87

    ॐ नागराजयज्ञोपवीतवते नमः।

    नागराज (सर्प) को यज्ञोपवीत (जनेऊ) की तरह पहनने वाले को नमस्कार।

  88. 88

    ॐ स्थूलकण्ठाय नमः।

    मोटे कण्ठ वाले को नमस्कार।

  89. 89

    ॐ स्वयङ्कर्त्रे नमः।

    स्वयं (अपने आप) सब करने वाले को नमस्कार।

  90. 90

    ॐ सामघोषप्रियाय नमः।

    सामवेद के गान को पसंद करने वाले को नमस्कार।

  91. 91

    ॐ परस्मै नमः।

    पर, अर्थात् सबसे परे और परम को नमस्कार।

  92. 92

    ॐ स्थूलतुण्डाय नमः।

    मोटी सूँड़ वाले को नमस्कार।

  93. 93

    ॐ अग्रण्ये नमः।

    सबसे आगे चलने वाले, अगुआ को नमस्कार।

  94. 94

    ॐ धीराय नमः।

    धीर, स्थिर बुद्धि वाले को नमस्कार।

  95. 95

    ॐ वागीशाय नमः।

    वाणी के स्वामी को नमस्कार।

  96. 96

    ॐ सिद्धिदायकाय नमः।

    सिद्धि (सफलता) देने वाले को नमस्कार।

  97. 97

    ॐ दूर्वाबिल्वप्रियाय नमः।

    दूर्वा और बिल्व-पत्र पसंद करने वाले को नमस्कार।

  98. 98

    ॐ अव्यक्तमूर्तये नमः।

    अव्यक्त (इन्द्रियों से न दिखने वाले) स्वरूप को नमस्कार।

  99. 99

    ॐ अद्भुतमूर्तिमते नमः।

    अद्भुत रूप वाले को नमस्कार।

  100. 100

    ॐ शैलेन्द्रतनुजोत्सङ्गखेलनोत्सुकमानसाय नमः।

    शैलेन्द्र (हिमालय) की पुत्री पार्वती की गोद में खेलने को उत्सुक मन वाले को नमस्कार।

  101. 101

    ॐ स्वलावण्यसुधासारजितमन्मथविग्रहाय नमः।

    अपने सौन्दर्य रूपी अमृत के सार से कामदेव के रूप को भी जीत लेने वाले को नमस्कार।

  102. 102

    ॐ समस्तजगदाधाराय नमः।

    सारे जगत के आधार को नमस्कार।

  103. 103

    ॐ मायिने नमः।

    माया के स्वामी को नमस्कार।

  104. 104

    ॐ मूषकवाहनाय नमः।

    मूषक (चूहे) को वाहन बनाने वाले को नमस्कार।

  105. 105

    ॐ हृष्टाय नमः।

    सदा हर्षित रहने वाले को नमस्कार।

  106. 106

    ॐ तुष्टाय नमः।

    सदा सन्तुष्ट रहने वाले को नमस्कार।

  107. 107

    ॐ प्रसन्नात्मने नमः।

    प्रसन्न मन वाले को नमस्कार।

  108. 108

    ॐ सर्वसिद्धिप्रदायकाय नमः।

    सब सिद्धियाँ देने वाले को नमस्कार।

श्री विनायक अष्टोत्तर शतनामावली: गणेश जी के 108 नाम PDF डाउनलोड करें

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/ganesh-108-naam/

संक्षेप में

यह गणेश जी के 108 नामों की सूची है; हर नाम ‘ॐ … नमः’ कहकर लिया जाता है। इसे श्री विनायक या विघ्नेश्वर अष्टोत्तर शतनामावली कहते हैं। नाम उसी क्रम में हैं जिसमें वे ‘विनायको विघ्नराजो…’ से शुरू होने वाले विघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्र में आते हैं। परंपरा में अर्चना के समय हर नाम पर दूर्वा, फूल या अक्षत चढ़ाते हैं। गणेश चतुर्थी, बुधवार और संकष्टी चतुर्थी पर इसका पाठ प्रचलित है।

यह सूची ‘विनायको विघ्नराजो गौरीपुत्रो गणेश्वरः…’ से शुरू होने वाले श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्र से बनी है और श्री विनायक या विघ्नेश्वर अष्टोत्तर शतनामावली कहलाती है। स्तोत्र के अंतिम श्लोकों के अनुसार शंकर ने त्रिपुर को मारने निकलते समय इन्हीं 108 नामों से अपने पुत्र की स्तुति की थी। मद्रास से छपे बृहत्स्तोत्ररत्नाकर (1927 और 1953 के संस्करण) की पुष्पिका के अनुसार यह स्तोत्र भविष्योत्तर पुराण का है; बाकी जाँचे गए स्रोत पुराण का नाम नहीं देते। ‘श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली’ नाम से एक दूसरी सूची भी छपती है (जैसे द्रिक पंचांग पर), जो गजानन, गणाध्यक्ष, विघ्नराज, विनायक, द्वैमातुर, द्विमुख… से शुरू होती है। कुछ साइटें ‘विनायक अष्टोत्तर शतनामावली’ नाम से एक और पाठ देती हैं, जिसके पहले बारह नाम लगभग यही हैं, पर तेरहवाँ नाम ‘वाणीप्रदायक’ है और आगे चिन्तामणिद्वीपपति, परमात्मा जैसे नाम आते हैं। पाठभेद: sanskritdocuments.org के स्तोत्र और नामावली में नाम 13–14 (वाणीप्रदाय, अव्ययाय) की जगह एक ही नाम ‘वाणीबलप्रदाय’ है, और नाम 101 को ‘स्वलावण्यसुधासाराय’ और ‘जितमन्मथविग्रहाय’ दो नामों में बाँटा गया है; यहाँ 1927 के छपे पाठ और अधिकतर स्रोतों वाला रूप लिया गया है। वहाँ की नामावली नाम 38 और 81 को भी दो-दो नामों में बाँटती है और ‘विद्वत्प्रियाय’ जोड़ती है, इसलिए उसमें 111 नाम हैं। नाम 11: कुछ स्रोतों में ‘अग्निगर्वच्छिदे’। नाम 54: एक स्रोत में ‘विद्वत्प्रियाय’। नाम 87: sanskritdocuments.org पर ‘नागराजयज्ञोपवीतकाय’। नाम 91: sanskritdocuments.org की नामावली में ‘पराय’। नाम 104: कुछ सूचियों में ‘मूषिकवाहनाय’ (अर्थ वही)। अव्ययाय (6, 14), द्विजप्रियाय (10, 54) और शान्ताय (25, 75) स्तोत्र में ही दो-दो बार आते हैं, इसलिए यहाँ भी दोहराए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस नामावली में कितने नाम हैं और यह कहाँ से आती है?

इसमें गणेश जी के 108 नाम हैं, जो ‘विनायको विघ्नराजो…’ से शुरू होने वाले विघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्र से उसी क्रम में लिए गए हैं। स्तोत्र के अंत में कहा गया है कि शंकर ने त्रिपुर को मारने निकलते समय इन्हीं नामों से अपने पुत्र की स्तुति की थी; मद्रास से छपे बृहत्स्तोत्ररत्नाकर की पुष्पिका इसे भविष्योत्तर पुराण का बताती है।

नामावली से गणेश जी की अर्चना कैसे करते हैं?

परंपरा में हर नाम ‘ॐ … नमः’ बोलकर गणेश जी को एक दूर्वा, एक फूल या थोड़े अक्षत चढ़ाए जाते हैं। स्तोत्र का अंतिम श्लोक भी दूर्वादल, बिल्वपत्र, फूल, चन्दन और अक्षत से पूजा की बात कहता है।

नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?

स्तोत्र श्लोकों में है, जिनमें नाम एक के बाद एक जुड़े हुए आते हैं। नामावली में वही नाम उसी क्रम में अलग-अलग ‘ॐ … नमः’ के साथ बोले जाते हैं, ताकि हर नाम पर कुछ अर्पित किया जा सके।

अलग-अलग किताबों और साइटों में नाम अलग क्यों मिलते हैं?

गणेश जी के 108 नामों की कई अलग सूचियाँ हैं, जैसे गजानन, गणाध्यक्ष… से शुरू होने वाली सूची। इस सूची के भी कुछ पाठभेद हैं (जैसे वाणीप्रदाय की जगह वाणीबलप्रदाय); इस पेज की टिप्पणी में वे नाम के क्रमांक के साथ दिए गए हैं।

इसका पाठ कब किया जाता है?

परंपरा के अनुसार गणेश चतुर्थी, बुधवार और संकष्टी चतुर्थी पर इसका पाठ किया जाता है।

स्रोत

  1. बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, भाग 1 (टी. रामस्वामी शास्त्रुलु एंड सन, मद्रास, 1927), पृ. 2–4: श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, archive.org पर स्कैन (पृष्ठों के चित्रों से मिलाया)
  2. विघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, संस्कृत विकिस्रोत (बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, भाग 1 के 1953 संस्करण का पाठ)
  3. श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, sanskritdocuments.org (Sunder Hattangadi द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
  4. श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामावलिः, sanskritdocuments.org (PSA Easwaran द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
  5. विघ्नेश्वर अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्रम्, amritanilayam.org
  6. Vinayaka Chaviti Vratham, तेलुगु लिपि में टाइप किया गया पूजा-संकलन, archive.org
  7. श्री विघ्नेश्वर अष्टोत्तर शतनामावली (तेलुगु लिपि), hindutemplesguide.com
  8. अष्टोत्तर अर्चना (रोमन लिपि), sankalpamforpuja.blogspot.com; विनायक पूजा विधान (तेलुगु लिपि), reading4mobile.blogspot.com
  9. तुलना के लिए दूसरी सूचियाँ: श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली, द्रिक पंचांग; विनायक अष्टोत्तर शतनामावली का दूसरा पाठ, hindunidhi.com और dharmsutra.org; वर्णक्रम में लगी सूची, sa.wikisource.org

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पाठ का मिलान: archive.org, sa.wikisource.org, sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, amritanilayam.org, archive.org, hindutemplesguide.com, sankalpamforpuja.blogspot.com, reading4mobile.blogspot.com, drikpanchang.com, hindunidhi.com, dharmsutra.org, sa.wikisource.org