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श्री विनायक अष्टोत्तर शतनामावली: गणेश जी के 108 नाम PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/ganesh-108-naam/
यह गणेश जी के 108 नामों की सूची है; हर नाम ‘ॐ … नमः’ कहकर लिया जाता है। इसे श्री विनायक या विघ्नेश्वर अष्टोत्तर शतनामावली कहते हैं। नाम उसी क्रम में हैं जिसमें वे ‘विनायको विघ्नराजो…’ से शुरू होने वाले विघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्र में आते हैं। परंपरा में अर्चना के समय हर नाम पर दूर्वा, फूल या अक्षत चढ़ाते हैं। गणेश चतुर्थी, बुधवार और संकष्टी चतुर्थी पर इसका पाठ प्रचलित है।
यह सूची ‘विनायको विघ्नराजो गौरीपुत्रो गणेश्वरः…’ से शुरू होने वाले श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्र से बनी है और श्री विनायक या विघ्नेश्वर अष्टोत्तर शतनामावली कहलाती है। स्तोत्र के अंतिम श्लोकों के अनुसार शंकर ने त्रिपुर को मारने निकलते समय इन्हीं 108 नामों से अपने पुत्र की स्तुति की थी। मद्रास से छपे बृहत्स्तोत्ररत्नाकर (1927 और 1953 के संस्करण) की पुष्पिका के अनुसार यह स्तोत्र भविष्योत्तर पुराण का है; बाकी जाँचे गए स्रोत पुराण का नाम नहीं देते। ‘श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली’ नाम से एक दूसरी सूची भी छपती है (जैसे द्रिक पंचांग पर), जो गजानन, गणाध्यक्ष, विघ्नराज, विनायक, द्वैमातुर, द्विमुख… से शुरू होती है। कुछ साइटें ‘विनायक अष्टोत्तर शतनामावली’ नाम से एक और पाठ देती हैं, जिसके पहले बारह नाम लगभग यही हैं, पर तेरहवाँ नाम ‘वाणीप्रदायक’ है और आगे चिन्तामणिद्वीपपति, परमात्मा जैसे नाम आते हैं। पाठभेद: sanskritdocuments.org के स्तोत्र और नामावली में नाम 13–14 (वाणीप्रदाय, अव्ययाय) की जगह एक ही नाम ‘वाणीबलप्रदाय’ है, और नाम 101 को ‘स्वलावण्यसुधासाराय’ और ‘जितमन्मथविग्रहाय’ दो नामों में बाँटा गया है; यहाँ 1927 के छपे पाठ और अधिकतर स्रोतों वाला रूप लिया गया है। वहाँ की नामावली नाम 38 और 81 को भी दो-दो नामों में बाँटती है और ‘विद्वत्प्रियाय’ जोड़ती है, इसलिए उसमें 111 नाम हैं। नाम 11: कुछ स्रोतों में ‘अग्निगर्वच्छिदे’। नाम 54: एक स्रोत में ‘विद्वत्प्रियाय’। नाम 87: sanskritdocuments.org पर ‘नागराजयज्ञोपवीतकाय’। नाम 91: sanskritdocuments.org की नामावली में ‘पराय’। नाम 104: कुछ सूचियों में ‘मूषिकवाहनाय’ (अर्थ वही)। अव्ययाय (6, 14), द्विजप्रियाय (10, 54) और शान्ताय (25, 75) स्तोत्र में ही दो-दो बार आते हैं, इसलिए यहाँ भी दोहराए गए हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस नामावली में कितने नाम हैं और यह कहाँ से आती है?
इसमें गणेश जी के 108 नाम हैं, जो ‘विनायको विघ्नराजो…’ से शुरू होने वाले विघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्र से उसी क्रम में लिए गए हैं। स्तोत्र के अंत में कहा गया है कि शंकर ने त्रिपुर को मारने निकलते समय इन्हीं नामों से अपने पुत्र की स्तुति की थी; मद्रास से छपे बृहत्स्तोत्ररत्नाकर की पुष्पिका इसे भविष्योत्तर पुराण का बताती है।
नामावली से गणेश जी की अर्चना कैसे करते हैं?
परंपरा में हर नाम ‘ॐ … नमः’ बोलकर गणेश जी को एक दूर्वा, एक फूल या थोड़े अक्षत चढ़ाए जाते हैं। स्तोत्र का अंतिम श्लोक भी दूर्वादल, बिल्वपत्र, फूल, चन्दन और अक्षत से पूजा की बात कहता है।
नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?
स्तोत्र श्लोकों में है, जिनमें नाम एक के बाद एक जुड़े हुए आते हैं। नामावली में वही नाम उसी क्रम में अलग-अलग ‘ॐ … नमः’ के साथ बोले जाते हैं, ताकि हर नाम पर कुछ अर्पित किया जा सके।
अलग-अलग किताबों और साइटों में नाम अलग क्यों मिलते हैं?
गणेश जी के 108 नामों की कई अलग सूचियाँ हैं, जैसे गजानन, गणाध्यक्ष… से शुरू होने वाली सूची। इस सूची के भी कुछ पाठभेद हैं (जैसे वाणीप्रदाय की जगह वाणीबलप्रदाय); इस पेज की टिप्पणी में वे नाम के क्रमांक के साथ दिए गए हैं।
इसका पाठ कब किया जाता है?
परंपरा के अनुसार गणेश चतुर्थी, बुधवार और संकष्टी चतुर्थी पर इसका पाठ किया जाता है।
स्रोत
- बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, भाग 1 (टी. रामस्वामी शास्त्रुलु एंड सन, मद्रास, 1927), पृ. 2–4: श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, archive.org पर स्कैन (पृष्ठों के चित्रों से मिलाया)
- विघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, संस्कृत विकिस्रोत (बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, भाग 1 के 1953 संस्करण का पाठ)
- श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, sanskritdocuments.org (Sunder Hattangadi द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
- श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामावलिः, sanskritdocuments.org (PSA Easwaran द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
- विघ्नेश्वर अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्रम्, amritanilayam.org
- Vinayaka Chaviti Vratham, तेलुगु लिपि में टाइप किया गया पूजा-संकलन, archive.org
- श्री विघ्नेश्वर अष्टोत्तर शतनामावली (तेलुगु लिपि), hindutemplesguide.com
- अष्टोत्तर अर्चना (रोमन लिपि), sankalpamforpuja.blogspot.com; विनायक पूजा विधान (तेलुगु लिपि), reading4mobile.blogspot.com
- तुलना के लिए दूसरी सूचियाँ: श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली, द्रिक पंचांग; विनायक अष्टोत्तर शतनामावली का दूसरा पाठ, hindunidhi.com और dharmsutra.org; वर्णक्रम में लगी सूची, sa.wikisource.org
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पाठ का मिलान: archive.org, sa.wikisource.org, sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, amritanilayam.org, archive.org, hindutemplesguide.com, sankalpamforpuja.blogspot.com, reading4mobile.blogspot.com, drikpanchang.com, hindunidhi.com, dharmsutra.org, sa.wikisource.org
