नवरात्रि · नौवाँ दिन

महानवमी: माँ सिद्धिदात्री

सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

अष्टमी, दोपहर से पहले नवमी · रंग: मोरपंखी हरा

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 5 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली माँ सिद्धिदात्री की प्रतिमा, पास में सिंह
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

महानवमी पर माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है। 2026 में नवमी तिथि 10:53 AM से 12:52 PM (20 अक्टूबर) तक (नई दिल्ली) है। Drik Panchang महानवमी की पूजा सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को बताता है, क्योंकि उस दिन अष्टमी सुबह ही समाप्त होकर नवमी लग जाती है; सूर्योदय वाली नवमी 20 अक्टूबर को है।

नवरात्रि का पारण Drik Panchang के अनुसार 20 अक्टूबर को नवमी समाप्त होने के बाद होता है (नई दिल्ली में 12:52 PM के बाद)। कई परिवार कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोल लेते हैं; अपनी परंपरा के अनुसार करें।

दुर्गा अष्टमी और महानवमी 2026: दोनों 19 अक्टूबर को क्यों, कन्या पूजन और पारण कब

नवरात्रि 2026, सोमवार, 19 अक्टूबर 2026: रंग मोरपंखी हरा, माँ सिद्धिदात्री
आज की तस्वीर सेव करें और WhatsApp स्टेटस पर लगाएँ। सभी 9 दिन

माँ सिद्धिदात्री का ध्यान श्लोक

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
सिद्ध, गंधर्व, यक्ष आदि, असुर और देवता भी जिनकी सदा सेवा करते हैं, सिद्धि देने वाली वे सिद्धिदात्री सदा सिद्धि प्रदान करने वाली हों।परंपरा से प्रचलित ध्यान श्लोक

स्वरूप

  • चार भुजाएँ: चक्र, गदा, शंख और कमल।
  • वाहन सिंह; कमल पर भी विराजमान।

पूजा कैसे करें

  1. स्नान के बाद कलश और देवी की पूजा: जल, रोली, अक्षत, फूल और दीपक।
  2. माँ सिद्धिदात्री का ध्यान श्लोक पढ़कर उनका ध्यान करें।
  3. दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या अपनी परंपरा का पाठ।
  4. अंत में दुर्गा जी की आरती; भोग अपनी परंपरा के अनुसार।

यह नवरात्रि में रोज़ की पूजा का सामान्य क्रम है; विधि अपने पुरोहित या परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती है।

माँ सिद्धिदात्री का भोग

हलवा-पूरी और चना, या तिल

प्रचलित परंपरा के अनुसार नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री को यह भोग लगाया जाता है। ज़्यादातर सूचियाँ हलवा, पूरी, चना और खीर बताती हैं, जो कन्या पूजन में भी बनता है; कुछ सूचियाँ तिल। अपने परिवार की रीति अलग हो तो वही मानें।

देवी भागवत पुराण (स्कंध 8, अध्याय 24) देवी के नैवेद्य तिथि के अनुसार बताता है, नौ रूपों के नाम से नहीं। इस दिन की तिथि के लिए उसमें है: नवमी को लाजा (धान का लावा, खील); तिल वहाँ दशमी का नैवेद्य है।

नौ दिन के सभी भोग, तारीख के साथ →

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि के नौवें दिन किस देवी की पूजा होती है?

माँ सिद्धिदात्री की। देवी कवच में दिए नवदुर्गा के क्रम में वे नौवें स्थान पर हैं।

2026 में यह दिन कब है?

सोमवार, 19 अक्टूबर 2026।

माँ सिद्धिदात्री को कौन सा भोग लगाते हैं?

प्रचलित परंपरा के अनुसार हलवा-पूरी और चना, या तिल। ज़्यादातर सूचियाँ हलवा, पूरी, चना और खीर बताती हैं, जो कन्या पूजन में भी बनता है; कुछ सूचियाँ तिल। अपने परिवार की रीति अलग हो तो वही मानें।

इस दिन का रंग कौन सा है?

मोरपंखी हरा। दिन के अनुसार रंग पहनना शास्त्र का नियम नहीं, एक आधुनिक रिवाज है।

स्रोत

  1. ध्यान श्लोक: परंपरा से प्रचलित; गीता प्रेस “नवदुर्गा” और कल्याण “शक्ति अंक” (पृ. 642) से मिलान
  2. नवदुर्गा का क्रम: देवी कवच (दुर्गा सप्तशती से पहले पढ़ा जाने वाला), श्लोक 3–5
  3. स्वरूप: गीता प्रेस “नवदुर्गा”, Drik Panchang (नवदुर्गा)
  4. तारीख, तिथि और रंग: Drik Panchang, शारदीय नवरात्रि 2026 (नई दिल्ली); SanatanBodh पंचांग गणना
  5. भोग: प्रचलित परंपरा, वेबदुनिया, अमर उजाला, पंजाब केसरी, ईटीवी भारत और फ़्री प्रेस जर्नल की सूचियों से मिलान; तिथि का नैवेद्य: देवी भागवत पुराण, स्कंध 8, अध्याय 24

कुछ गलत लगा? गलती बताएँ