शाक्त सम्प्रदाय देवी, यानी शक्ति, को परम सत्ता मानकर उनकी उपासना करने वाली परंपरा है। देवी को कहीं स्वयं परम देवता के रूप में और कहीं शिव की शक्ति के रूप में पूजा जाता है, और दुर्गा, काली, पार्वती, लक्ष्मी जैसे सभी देवी-रूप उन्हीं के रूप माने जाते हैं। इसके मूल ग्रंथ मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) और शाक्त तंत्र हैं, और यह परंपरा बंगाल और असम में विशेष रूप से प्रबल है।
- संस्थापक
- कोई एक संस्थापक नहीं
- दर्शन
- शक्ति ही सृष्टि करने वाली और सृष्टि भी; हिमालयन अकादमी के अनुसार अद्वैतवादी
- मुख्य ग्रंथ
- देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती, मार्कण्डेय पुराण का अंश), देवी भागवत पुराण, ललिता सहस्रनाम (ब्रह्माण्ड पुराण), शाक्त तंत्र
- मुख्य केंद्र
- बंगाल और असम; कामाख्या (गुवाहाटी), शक्तिपीठ
- तिलक
- स्रोतों में कोई एक सर्वमान्य चिह्न दर्ज नहीं; क्षेत्र और गुरु-परंपरा के अनुसार
- मुख्य पर्व
- नवरात्रि, दुर्गा पूजा
शाक्त सम्प्रदाय क्या है
शक्ति का अर्थ है बल या ऊर्जा। शाक्त देवी को परम सत्ता मानते हैं: कहीं वे स्वयं सर्वोच्च देवी हैं, और कहीं शिव की पत्नी और उनकी शक्ति। बहुत से हिंदू देवी को ऐसी माँ के रूप में पूजते हैं जो पूर्ण समर्पण माँगती है; सभी देवियाँ उन्हीं के रूप मानी जाती हैं, और उन्हें केवल “देवी” भी कहा जाता है।
उनके सौम्य रूप उमा, पार्वती और अम्बिका हैं, और उग्र रूप काली और महिषासुर का वध करने वाली दुर्गा। विष्णु की पत्नी लक्ष्मी के रूप में भी उनकी पूजा होती है।
संक्षिप्त इतिहास
ब्रिटानिका के अनुसार 5वीं सदी के अंत तक मातृ-देवी की उपासना भारतीय धार्मिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान पा चुकी थी। मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य (लगभग 5वीं–6वीं सदी) पहला ऐसा संस्कृत ग्रंथ है जो पूरी तरह देवी को परम देवता के रूप में केंद्र में रखता है; इसी में दुर्गा के रूप में देवी महिषासुर का वध करती हैं।
बाद की सदियों में शाक्त तंत्र लिखे गए, जैसे कुलार्णव तंत्र और 11वीं सदी के लक्ष्मणदेशिक का शारदातिलक, और देवी भागवत पुराण, जिसमें सृष्टि का आरंभ देवी से बताया गया है। तंत्र और शाक्त उपासना, दोनों के मुख्य केंद्र बंगाल, बिहार और असम रहे; ब्रिटानिका के अनुसार असम का कामरूप तंत्र-परंपरा के विकास की भूमि था, जहाँ गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर है।
विश्वास और साधना
ब्रिटानिका के अनुसार शाक्त धर्म शैव विचार और मातृ-देवी परंपराओं का मेल है: शैव मत में शिव की शक्ति ही सक्रिय है, और शाक्त इसे और आगे ले जाते हैं: शक्ति ही सृष्टि करने वाली है और स्वयं सृष्टि भी।
योग-परंपरा में शक्ति को शरीर में सोई हुई कुंडलिनी माना जाता है, जिसे जगाकर मुक्ति पाई जाती है। ब्रिटानिका शाक्त उपासना और तंत्र को अलग रखता है: तंत्र मंत्र, मंडल और गुप्त विधियों से आध्यात्मिक शक्ति और मुक्ति खोजने की परंपरा है, जो शैव, वैष्णव और शाक्त, तीनों में मिलती है। हिमालयन अकादमी शाक्त धर्म के चार रूप बताती है: भक्ति-प्रधान, लोक-परंपरा, योग-प्रधान और सर्वसमावेशी।
शाखाएँ और केंद्र
शाक्त परंपरा का कोई एक संगठन नहीं है; गुरु-परंपराएँ, तंत्र की शाखाएँ और देवी के अलग-अलग रूपों के मंदिर इसके केंद्र हैं। असम का कामाख्या मंदिर, बंगाल और देश भर के शक्तिपीठ इसके प्रमुख तीर्थ हैं। नवरात्रि में देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा होती है; उसी दिन से बंगाल, असम और पूर्वी भारत में दुर्गा पूजा शुरू होती है, जो महिषासुर पर देवी की विजय का उत्सव है।
स्रोतों में अंतर
- देवी का स्थान: ब्रिटानिका के अनुसार शक्ति को कहीं स्वयं परम देवी माना जाता है और कहीं किसी पुरुष देवता, सामान्यतः शिव, की पत्नी के रूप में।
- आरंभ: ब्रिटानिका देवी-उपासना को 5वीं सदी के अंत में महत्वपूर्ण बताता है; हिमालयन अकादमी शाक्त धर्म के संगठित रूप को लगभग 5वीं सदी का बताती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शाक्त सम्प्रदाय क्या है?
देवी (शक्ति) को परम सत्ता मानकर उनकी उपासना करने वाली परंपरा। दुर्गा, काली, पार्वती, लक्ष्मी जैसी सभी देवियाँ इसमें एक ही देवी के रूप मानी जाती हैं।
शाक्त सम्प्रदाय के मुख्य ग्रंथ कौन से हैं?
मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), देवी भागवत पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण का ललिता सहस्रनाम, और कुलार्णव तंत्र जैसे शाक्त तंत्र।
शाक्त और शैव में क्या संबंध है?
बहुत गहरा। शैव मत में शिव की शक्ति ही सक्रिय मानी जाती है, और शाक्त इसी विचार को आगे ले जाकर शक्ति को ही परम मानते हैं। कई शाक्त परंपराओं में देवी शिव की पत्नी पार्वती के रूप में पूजी जाती हैं।
शाक्त परंपरा कहाँ अधिक प्रचलित है?
ब्रिटानिका के अनुसार बंगाल और असम में; तंत्र और शाक्त उपासना के मुख्य केंद्र बंगाल, बिहार और असम रहे हैं। असम का कामाख्या मंदिर इसका प्रमुख तीर्थ है।
स्रोत
- एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: “Shaktism”, “Hinduism: Tantric traditions and Shaktism”, “Devi Mahatmya”
- एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: “Devī Bhāgavata Purāṇa”, “Kamarupa”, “Navratri”, “Durga Puja”
- ललिता सहस्रनाम स्तोत्र, समापन वाक्य: “इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे उत्तरखण्डे श्रीहयग्रीवागस्त्यसंवादे …”
- हिमालयन अकादमी (कौआई हिंदू मठ): “The Four Denominations of Hinduism”
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