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श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/durga-108-naam/
इस नामावली में देवी दुर्गा के 108 नाम हैं, हर नाम “ॐ … नमः” के रूप में। यह सूची उस श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र से है जिसे गीता प्रेस दुर्गासप्तशती में छापती है। इसमें शिव पार्वती को ये नाम सुनाते हैं, और स्तोत्र की पुष्पिका इसे विश्वसार तन्त्र का बताती है। परंपरा में हर नाम पर कुमकुम, लाल फूल या अक्षत चढ़ाते हैं, और नवरात्रि, दुर्गाष्टमी तथा मंगलवार-शुक्रवार को इसका पाठ प्रचलित है।
यह गीता प्रेस की दुर्गासप्तशती में छपे श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र (“सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी…”) का नामावली रूप है; स्तोत्र की पुष्पिका के अनुसार यह विश्वसार तन्त्र से है। नाम और उनकी गिनती गीता प्रेस के हिंदी अनुवाद की क्रम-संख्या के अनुसार हैं: श्लोकों के “च”, “तथा”, “सदा” नाम नहीं हैं, और “भव्याभव्या”, “अपर्णानेकवर्णा”, “विमलोत्कर्षिणी” में दो-दो नाम हैं। “अनन्ता” नाम 25 और 103 पर दो बार आता है, जैसे श्लोकों में। नाम 15 और 16 श्लोक के “महातपाः” और “मनः” से “महातपसे” और “मनसे” बनते हैं; एक ऑनलाइन नामावली में यहाँ “महातपायै” और “मनरूपायै” है। बृहत् तन्त्रसार में यही स्तोत्र कुछ अलग पाठ के साथ है, जैसे नाम 14 चन्द्रघण्टा, 23 सत्या, 47 कुलसुन्दरी, 65 वाक्प्रदा। दुर्गा के 108 नामों की दूसरी सूचियाँ भी छपती हैं: दक्षिण भारत के संग्रहों में अधिक मिलने वाली एक सूची “ॐ दुर्गायै नमः, ॐ शिवायै नमः, ॐ महालक्ष्म्यै नमः, ॐ महागौर्यै नमः, ॐ चण्डिकायै नमः” से शुरू होती है, और एक अन्य “ॐ श्रियै नमः, ॐ उमायै नमः, ॐ भारत्यै नमः” से।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा जी के ये 108 नाम किस ग्रंथ से हैं?
ये नाम श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र से हैं, जिसे गीता प्रेस अपनी दुर्गासप्तशती में छापती है। स्तोत्र में शिव पार्वती को ये नाम सुनाते हैं, और उसकी पुष्पिका (“इति श्रीविश्वसारतन्त्रे …”) के अनुसार यह विश्वसार तन्त्र का अंश है।
नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?
स्तोत्र में यही 108 नाम श्लोकों में पिरोए गए हैं, साथ में आरंभ और फल बताने वाले श्लोक हैं। नामावली में हर नाम अलग से “ॐ … नमः” के साथ बोला जाता है, ताकि हर नाम पर कुछ अर्पित किया जा सके।
नामावली से अर्चना कैसे की जाती है?
परंपरा में हर नाम बोलकर देवी को थोड़ा कुमकुम, एक लाल फूल या अक्षत अर्पित करते हैं। स्तोत्र का एक श्लोक कहता है कि कुमारी का पूजन करके और देवी का ध्यान करके इन 108 नामों का पाठ करें।
दूसरी किताबों में दुर्गा के 108 नाम अलग क्यों मिलते हैं?
दुर्गा के 108 नामों की कई अलग सूचियाँ हैं; “ॐ दुर्गायै नमः, ॐ शिवायै नमः …” से शुरू होने वाली सूची इससे अलग नामावली है। इसी स्तोत्र के पाठ में भी कुछ शब्दों का अंतर मिलता है, जैसे बृहत् तन्त्रसार वाले पाठ में।
यह पाठ कब किया जाता है?
परंपरा में नवरात्रि, दुर्गाष्टमी और मंगलवार व शुक्रवार को इसका पाठ अधिक होता है। स्तोत्र के अंतिम श्लोक इसके नित्य पाठ की प्रशंसा करते हैं; यह ग्रंथ का अपना कथन है।
स्रोत
- गीता प्रेस, गोरखपुर: श्रीदुर्गासप्तशती सचित्र, हिंदी अनुवाद सहित (अनुवादक पाण्डेय पं. रामनारायणदत्त शास्त्री), श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र और अनुवाद में नामों की क्रम-संख्या (archive.org पर स्कैन)
- गीता प्रेस, गोरखपुर: श्रीदुर्गासप्तशती (मूल, पाठविधि सहित), स्तोत्र का मूल पाठ और पुष्पिका (archive.org पर स्कैन)
- श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, sanskritdocuments.org (Girish Beeharry द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
- श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामावलिः (इसी स्तोत्र का नामावली रूप), sanskritdocuments.org
- दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली, vedadhara.com
- बृहत् तन्त्रसार, परिच्छेद 16, संस्कृत विकिस्रोत (इसी स्तोत्र का भिन्न पाठ और पुष्पिका)
- श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, drikpanchang.com (मिलान के लिए)
- श्री दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्, bhaktibharat.com (मिलान के लिए)
- दुर्गा के 108 नामों की दूसरी सूचियाँ (“ॐ दुर्गायै नमः …” और “ॐ श्रियै नमः …”), sanskritdocuments.org और drikpanchang.com
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पाठ का मिलान: archive.org, archive.org, sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, vedadhara.com, sa.wikisource.org, drikpanchang.com, bhaktibharat.com, sanskritdocuments.org, drikpanchang.com
