विज्ञापन
दुर्गे दुर्घट भारी: माँ दुर्गा की मराठी आरती PDF डाउनलोड करें
विज्ञापन
अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/durge-durghat-bhari/
“दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी” माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध मराठी आरतियों में से है। इसकी टेक “जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी” है। महाराष्ट्र में नवरात्रि के दिनों में और देवी की पूजा के अंत में इसे परंपरा से गाया जाता है। आरती में भक्त कहता है कि देवी के बिना यह संसार पार करना कठिन है, और उनसे करुणा और रक्षा माँगता है।
यह आरती मराठी में है और यहाँ इसका मूल मराठी पाठ दिया गया है। पाँच स्रोतों की पंक्तियाँ एक जैसी हैं; कुछ शब्दों में पाठभेद मिलता है: टेक में ‘महिषासुरमथिनी’ की जगह ‘महिषासुरमर्दिनी’ (अर्थ वही), और कहीं ‘जय देवी जय देवी जय महिषासुर…’; दूसरे पद में ‘तुजवीण भुवनी पाहता तुज ऐसे नाही’, ‘न बोलावे’ और ‘पडीलो प्रवाही’; तीसरे पद में ‘होती निजदासा’ और ‘सोडी तोडी’; पहले पद में ‘संकट नेवारी’। रचयिता के बारे में स्रोत एकमत नहीं हैं: मराठी विकिपीडिया के अनुसार यह आरती समर्थ रामदास को तुळजापूर की भवानी माता के दर्शन के समय स्फुरी, जबकि sanskritdocuments.org का मराठी आरती संग्रह इसे संत नरहरी सोनार की रचना बताता है। आरती की अंतिम पंक्ति में ‘नरहरि’ नाम आता है। महाराष्ट्र में टेक ‘जय देवी जय देवी’ हर पद के बाद गाई जाती है; यहाँ उसे पहले पद के बाद एक बार दिया गया है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
हर सुबह तिथि, राहु काल और आने वाले व्रत-त्योहार, WhatsApp पर एक छोटे संदेश में।चैनल फ़ॉलो करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
‘दुर्गे दुर्घट भारी’ आरती किसने लिखी?
स्रोत एकमत नहीं हैं। मराठी विकिपीडिया इसे समर्थ रामदास से जोड़ता है, जिन्हें यह आरती तुळजापूर की भवानी माता के दर्शन के समय स्फुरी बताई जाती है। sanskritdocuments.org का मराठी आरती संग्रह इसे संत नरहरी सोनार की रचना बताता है। आरती की अंतिम पंक्ति में ‘नरहरि’ नाम आता है।
यह आरती किस भाषा में है?
मराठी में। इसलिए यहाँ मूल मराठी पाठ के साथ हर पद का सरल हिंदी अर्थ और अंग्रेज़ी अनुवाद दिया गया है।
‘दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी’ का क्या अर्थ है?
‘दुर्घट’ यानी जिसे पार करना कठिन हो, ‘भारी’ यानी बहुत, ‘तुजविण’ यानी तुम्हारे बिना, और ‘संसारी’ यानी संसार में। भाव यह है: हे दुर्गा, तुम्हारे बिना यह संसार बहुत कठिन है।
‘महिषासुरमथिनी’ का क्या अर्थ है?
महिषासुर का मर्दन करने वाली। दुर्गा सप्तशती के अध्याय 2 और 3 में देवी के हाथों महिषासुर के वध की कथा है। कुछ पुस्तकों में यहाँ ‘महिषासुरमर्दिनी’ छपा है; अर्थ वही है।
यह आरती कब गाई जाती है?
महाराष्ट्र में परंपरा से नवरात्रि के दिनों में, देवी की पूजा के अंत में और घर की आरती में।
स्रोत
- परंपरागत मराठी आरती पाठ (पाँच स्रोतों से मिलाया गया)
- रचयिता: समर्थ रामदास (मराठी विकिपीडिया) या संत नरहरी सोनार (sanskritdocuments.org); स्रोत एकमत नहीं
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
पाठ का मिलान: drikpanchang.com, mr.wikipedia.org, mr.wikipedia.org, sanskritdocuments.org, archive.org, archive.org, archive.org
