आरतीदुर्गा

दुर्गे दुर्घट भारी: माँ दुर्गा की मराठी आरती

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 2 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. पद 1

    दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी। अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी। वारी वारी जन्म मरणांते वारी। हारी पडलो आता संकट निवारी॥

    हे दुर्गा, तुम्हारे बिना यह संसार बहुत कठिन (दुर्घट) है। हे अनाथों की नाथ, हे अंबा, अपनी करुणा फैलाओ। जन्म और मृत्यु के चक्र को दूर करो, दूर करो (वारी)। मैं हार चुका हूँ; अब मेरा संकट दूर करो।

  2. टेक (धृपद)

    जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी। सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥

    हे देवी, महिषासुर का मर्दन करने वाली, तुम्हारी जय हो, जय हो। तुम श्रेष्ठ देवताओं और ईश्वर को भी वर देने वाली हो, तारने वाली हो और नया जीवन देने वाली (संजीवनी) हो।

  3. पद 2

    त्रिभुवन भुवनी पाहता तुज ऐसी नाही। चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही। साही विवाद करिता पडले प्रवाही। ते तू भक्तांलागी पावसि लवलाही॥

    तीनों लोकों में खोजने पर भी तुम्हारे जैसी कोई नहीं मिलती। चारों (प्रायः चार वेद समझे जाते हैं) थक गए, पर तुम्हारे बारे में कुछ कह न सके। छहों (प्रायः छह शास्त्र या दर्शन समझे जाते हैं) वाद-विवाद करते-करते प्रवाह में बह गए। ऐसी तुम अपने भक्तों के लिए तुरंत (लवलाही) आ जाती हो।

  4. पद 3

    प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा। क्लेशांपासुनि सोडवि तोडी भवपाशा। अंबे तुजवाचून कोण पुरविल आशा। नरहरि तल्लिन झाला पदपंकजलेशा॥

    हे प्रसन्न मुख वाली, तुम अपने दासों पर प्रसन्न होती हो। दुखों से छुड़ाओ और संसार के बंधन (भवपाश) काट दो। हे अंबा, तुम्हारे बिना कौन आशा पूरी करेगा? नरहरि तुम्हारे चरण-कमलों के एक कण (लेश) में ही लीन हो गया है।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/durge-durghat-bhari/

संक्षेप में

“दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी” माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध मराठी आरतियों में से है। इसकी टेक “जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी” है। महाराष्ट्र में नवरात्रि के दिनों में और देवी की पूजा के अंत में इसे परंपरा से गाया जाता है। आरती में भक्त कहता है कि देवी के बिना यह संसार पार करना कठिन है, और उनसे करुणा और रक्षा माँगता है।

यह आरती मराठी में है और यहाँ इसका मूल मराठी पाठ दिया गया है। पाँच स्रोतों की पंक्तियाँ एक जैसी हैं; कुछ शब्दों में पाठभेद मिलता है: टेक में ‘महिषासुरमथिनी’ की जगह ‘महिषासुरमर्दिनी’ (अर्थ वही), और कहीं ‘जय देवी जय देवी जय महिषासुर…’; दूसरे पद में ‘तुजवीण भुवनी पाहता तुज ऐसे नाही’, ‘न बोलावे’ और ‘पडीलो प्रवाही’; तीसरे पद में ‘होती निजदासा’ और ‘सोडी तोडी’; पहले पद में ‘संकट नेवारी’। रचयिता के बारे में स्रोत एकमत नहीं हैं: मराठी विकिपीडिया के अनुसार यह आरती समर्थ रामदास को तुळजापूर की भवानी माता के दर्शन के समय स्फुरी, जबकि sanskritdocuments.org का मराठी आरती संग्रह इसे संत नरहरी सोनार की रचना बताता है। आरती की अंतिम पंक्ति में ‘नरहरि’ नाम आता है। महाराष्ट्र में टेक ‘जय देवी जय देवी’ हर पद के बाद गाई जाती है; यहाँ उसे पहले पद के बाद एक बार दिया गया है।

आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘दुर्गे दुर्घट भारी’ आरती किसने लिखी?

स्रोत एकमत नहीं हैं। मराठी विकिपीडिया इसे समर्थ रामदास से जोड़ता है, जिन्हें यह आरती तुळजापूर की भवानी माता के दर्शन के समय स्फुरी बताई जाती है। sanskritdocuments.org का मराठी आरती संग्रह इसे संत नरहरी सोनार की रचना बताता है। आरती की अंतिम पंक्ति में ‘नरहरि’ नाम आता है।

यह आरती किस भाषा में है?

मराठी में। इसलिए यहाँ मूल मराठी पाठ के साथ हर पद का सरल हिंदी अर्थ और अंग्रेज़ी अनुवाद दिया गया है।

‘दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी’ का क्या अर्थ है?

‘दुर्घट’ यानी जिसे पार करना कठिन हो, ‘भारी’ यानी बहुत, ‘तुजविण’ यानी तुम्हारे बिना, और ‘संसारी’ यानी संसार में। भाव यह है: हे दुर्गा, तुम्हारे बिना यह संसार बहुत कठिन है।

‘महिषासुरमथिनी’ का क्या अर्थ है?

महिषासुर का मर्दन करने वाली। दुर्गा सप्तशती के अध्याय 2 और 3 में देवी के हाथों महिषासुर के वध की कथा है। कुछ पुस्तकों में यहाँ ‘महिषासुरमर्दिनी’ छपा है; अर्थ वही है।

यह आरती कब गाई जाती है?

महाराष्ट्र में परंपरा से नवरात्रि के दिनों में, देवी की पूजा के अंत में और घर की आरती में।

स्रोत

  1. परंपरागत मराठी आरती पाठ (पाँच स्रोतों से मिलाया गया)
  2. रचयिता: समर्थ रामदास (मराठी विकिपीडिया) या संत नरहरी सोनार (sanskritdocuments.org); स्रोत एकमत नहीं

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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, mr.wikipedia.org, mr.wikipedia.org, sanskritdocuments.org, archive.org, archive.org, archive.org