नामावलीहनुमान

श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 6 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. 1

    ॐ आञ्जनेयाय नमः।

    माता अञ्जना के पुत्र आञ्जनेय को नमस्कार।

  2. 2

    ॐ महावीराय नमः।

    महान वीर (महावीर) को नमस्कार।

  3. 3

    ॐ हनूमते नमः।

    वाल्मीकि रामायण के अनुसार इन्द्र के वज्र से चिह्नित हनु (ठुड्डी) वाले हनुमान को नमस्कार।

  4. 4

    ॐ मारुतात्मजाय नमः।

    मरुत (वायु देव) के पुत्र को नमस्कार।

  5. 5

    ॐ तत्त्वज्ञानप्रदाय नमः।

    तत्त्व का, यानी परम सत्य का ज्ञान देने वाले को नमस्कार।

  6. 6

    ॐ सीतादेवीमुद्राप्रदायकाय नमः।

    सीता देवी को श्रीराम की मुद्रिका (अँगूठी) देने वाले को नमस्कार।

  7. 7

    ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमः।

    लंका की अशोक वाटिका को उजाड़ने वाले को नमस्कार।

  8. 8

    ॐ सर्वमायाविभञ्जनाय नमः।

    हर प्रकार की माया और छल को तोड़ने वाले को नमस्कार।

  9. 9

    ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः।

    सब बन्धनों से छुड़ाने वाले को नमस्कार।

  10. 10

    ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः।

    राक्षसों का विनाश करने वाले को नमस्कार।

  11. 11

    ॐ परविद्यापरिहाराय नमः।

    दूसरों की अहित करने वाली विद्या को दूर करने वाले को नमस्कार।

  12. 12

    ॐ परशौर्यविनाशनाय नमः।

    शत्रुओं के शौर्य (पराक्रम) को नष्ट करने वाले को नमस्कार।

  13. 13

    ॐ परमन्त्रनिराकर्त्रे नमः।

    दूसरों के अहितकारी मन्त्रों को निष्फल करने वाले को नमस्कार।

  14. 14

    ॐ परयन्त्रप्रभेदकाय नमः।

    दूसरों के अहितकारी यन्त्रों को तोड़ने वाले को नमस्कार।

  15. 15

    ॐ सर्वग्रहविनाशिने नमः।

    सब ग्रहों की बाधाओं का नाश करने वाले को नमस्कार।

  16. 16

    ॐ भीमसेनसहायकृते नमः।

    भीमसेन (महाभारत के भीम) की सहायता करने वाले को नमस्कार।

  17. 17

    ॐ सर्वदुःखहराय नमः।

    सब दुःख हरने वाले को नमस्कार।

  18. 18

    ॐ सर्वलोकचारिणे नमः।

    सब लोकों में विचरने वाले को नमस्कार।

  19. 19

    ॐ मनोजवाय नमः।

    मन के समान वेग वाले को नमस्कार।

  20. 20

    ॐ पारिजातद्रुमूलस्थाय नमः।

    पारिजात वृक्ष के मूल (जड़) के पास रहने वाले को नमस्कार।

  21. 21

    ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते नमः।

    सब मन्त्र जिनका स्वरूप हैं, उन सर्वमन्त्रस्वरूप को नमस्कार।

  22. 22

    ॐ सर्वतन्त्रस्वरूपिणे नमः।

    सब तन्त्र जिनका स्वरूप हैं, उन सर्वतन्त्रस्वरूप को नमस्कार।

  23. 23

    ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः।

    सब यन्त्रों में आत्मा रूप से स्थित को नमस्कार।

  24. 24

    ॐ कपीश्वराय नमः।

    कपियों (वानरों) के ईश्वर को नमस्कार।

  25. 25

    ॐ महाकायाय नमः।

    विशाल शरीर वाले को नमस्कार।

  26. 26

    ॐ सर्वरोगहराय नमः।

    सब रोग हरने वाले को नमस्कार।

  27. 27

    ॐ प्रभवे नमः।

    प्रभु, यानी समर्थ स्वामी को नमस्कार।

  28. 28

    ॐ बलसिद्धिकराय नमः।

    बल और सिद्धि देने वाले को नमस्कार।

  29. 29

    ॐ सर्वविद्यासम्पत्प्रदायकाय नमः।

    सब विद्याएँ और सम्पत्ति देने वाले को नमस्कार।

  30. 30

    ॐ कपिसेनानायकाय नमः।

    वानर-सेना के नायक को नमस्कार।

  31. 31

    ॐ भविष्यच्चतुराननाय नमः।

    परंपरा में भावी ब्रह्मा (चार मुख वाले) माने जाने वाले को नमस्कार।

  32. 32

    ॐ कुमारब्रह्मचारिणे नमः।

    कुमार अवस्था से ही ब्रह्मचारी को नमस्कार।

  33. 33

    ॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते नमः।

    रत्नों के कुण्डलों से दमकने वाले को नमस्कार।

  34. 34

    ॐ चञ्चलद्वालसन्नद्धलम्बमानशिखोज्ज्वलाय नमः।

    चंचल पूँछ से युक्त और लम्बी लटकती शिखा से दीप्त को नमस्कार।

  35. 35

    ॐ गन्धर्वविद्यातत्त्वज्ञाय नमः।

    गन्धर्व-विद्या (संगीत) का तत्त्व जानने वाले को नमस्कार।

  36. 36

    ॐ महाबलपराक्रमाय नमः।

    महान बल और पराक्रम वाले को नमस्कार।

  37. 37

    ॐ कारागृहविमोक्त्रे नमः।

    कारागार (बन्दीगृह) से मुक्त कराने वाले को नमस्कार।

  38. 38

    ॐ शृङ्खलाबन्धमोचकाय नमः।

    जंजीरों के बन्धन खोलने वाले को नमस्कार।

  39. 39

    ॐ सागरोत्तारकाय नमः।

    स्वयं सागर लाँघने वाले और दूसरों को सागर पार कराने वाले को नमस्कार।

  40. 40

    ॐ प्राज्ञाय नमः।

    प्राज्ञ, यानी बुद्धिमान और ज्ञानी को नमस्कार।

  41. 41

    ॐ रामदूताय नमः।

    श्रीराम के दूत को नमस्कार।

  42. 42

    ॐ प्रतापवते नमः।

    प्रताप (तेजस्वी पराक्रम) वाले को नमस्कार।

  43. 43

    ॐ वानराय नमः।

    वानर रूप वाले को नमस्कार।

  44. 44

    ॐ केसरिसुताय नमः।

    वानर-श्रेष्ठ केसरी के पुत्र को नमस्कार।

  45. 45

    ॐ सीताशोकनिवारकाय नमः।

    सीता का शोक दूर करने वाले को नमस्कार।

  46. 46

    ॐ अञ्जनागर्भसम्भूताय नमः।

    माता अञ्जना के गर्भ से जन्मे को नमस्कार।

  47. 47

    ॐ बालार्कसदृशाननाय नमः।

    उगते सूर्य जैसे मुख वाले को नमस्कार।

  48. 48

    ॐ विभीषणप्रियकराय नमः।

    विभीषण का हित करने वाले को नमस्कार।

  49. 49

    ॐ दशग्रीवकुलान्तकाय नमः।

    दशग्रीव (रावण) के कुल का अन्त करने वाले को नमस्कार।

  50. 50

    ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः।

    औषधि लाकर लक्ष्मण को प्राण लौटाने वाले को नमस्कार।

  51. 51

    ॐ वज्रकायाय नमः।

    वज्र जैसे कठोर शरीर वाले को नमस्कार।

  52. 52

    ॐ महाद्युतये नमः।

    महान कान्ति (तेज) वाले को नमस्कार।

  53. 53

    ॐ चिरञ्जीविने नमः।

    चिरंजीवी, यानी युगों तक जीवित रहने वाले को नमस्कार।

  54. 54

    ॐ रामभक्ताय नमः।

    श्रीराम के भक्त को नमस्कार।

  55. 55

    ॐ दैत्यकार्यविघातकाय नमः।

    दैत्यों के कामों को विफल करने वाले को नमस्कार।

  56. 56

    ॐ अक्षहन्त्रे नमः।

    रावण के पुत्र अक्षकुमार का वध करने वाले को नमस्कार।

  57. 57

    ॐ काञ्चनाभाय नमः।

    सोने जैसी आभा वाले को नमस्कार।

  58. 58

    ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।

    पाँच मुखों वाले (पंचमुखी) को नमस्कार।

  59. 59

    ॐ महातपसे नमः।

    महान तप करने वाले तपस्वी को नमस्कार।

  60. 60

    ॐ लङ्किणीभञ्जनाय नमः।

    लंका की रक्षिका लंकिणी को परास्त करने वाले को नमस्कार।

  61. 61

    ॐ श्रीमते नमः।

    श्री (शोभा और ऐश्वर्य) से सम्पन्न को नमस्कार।

  62. 62

    ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय नमः।

    राक्षसी सिंहिका के प्राण हरने वाले को नमस्कार।

  63. 63

    ॐ गन्धमादनशैलस्थाय नमः।

    गन्धमादन पर्वत पर रहने वाले को नमस्कार।

  64. 64

    ॐ लङ्कापुरविदाहकाय नमः।

    लंका नगरी को जलाने वाले को नमस्कार।

  65. 65

    ॐ सुग्रीवसचिवाय नमः।

    सुग्रीव के मन्त्री को नमस्कार।

  66. 66

    ॐ धीराय नमः।

    धीर, यानी धैर्यवान को नमस्कार।

  67. 67

    ॐ शूराय नमः।

    शूर, यानी निडर वीर को नमस्कार।

  68. 68

    ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः।

    दैत्यों के कुल का अन्त करने वाले को नमस्कार।

  69. 69

    ॐ सुरार्चिताय नमः।

    देवताओं द्वारा पूजित को नमस्कार।

  70. 70

    ॐ महातेजसे नमः।

    महान तेज वाले को नमस्कार।

  71. 71

    ॐ रामचूडामणिप्रदाय नमः।

    सीता की चूडामणि श्रीराम तक पहुँचाने वाले को नमस्कार।

  72. 72

    ॐ कामरूपिणे नमः।

    इच्छा के अनुसार रूप धारण करने वाले को नमस्कार।

  73. 73

    ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः।

    पिंगल (भूरी-सुनहरी) आँखों वाले को नमस्कार।

  74. 74

    ॐ वार्धिमैनाकपूजिताय नमः।

    समुद्र और मैनाक पर्वत द्वारा सम्मानित को नमस्कार।

  75. 75

    ॐ कबलीकृतमार्ताण्डमण्डलाय नमः।

    बालपन में सूर्य-मण्डल को मुँह का कौर बनाने वाले को नमस्कार।

  76. 76

    ॐ विजितेन्द्रियाय नमः।

    इन्द्रियों को जीत लेने वाले को नमस्कार।

  77. 77

    ॐ रामसुग्रीवसन्धात्रे नमः।

    श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता कराने वाले को नमस्कार।

  78. 78

    ॐ महारावणमर्दनाय नमः।

    महारावण (कुछ पाठों में ‘महिरावण’) को कुचलने वाले को नमस्कार।

  79. 79

    ॐ स्फटिकाभाय नमः।

    स्फटिक जैसी निर्मल आभा वाले को नमस्कार।

  80. 80

    ॐ वागधीशाय नमः।

    वाणी के स्वामी को नमस्कार।

  81. 81

    ॐ नवव्याकृतिपण्डिताय नमः।

    परंपरा के अनुसार नौ व्याकरणों के पण्डित को नमस्कार।

  82. 82

    ॐ चतुर्बाहवे नमः।

    चार भुजाओं वाले को नमस्कार।

  83. 83

    ॐ दीनबन्धवे नमः।

    दीनों के बन्धु (सहायक) को नमस्कार।

  84. 84

    ॐ महात्मने नमः।

    महान आत्मा (महात्मा) को नमस्कार।

  85. 85

    ॐ भक्तवत्सलाय नमः।

    भक्तों से स्नेह करने वाले को नमस्कार।

  86. 86

    ॐ सञ्जीवननगाहर्त्रे नमः।

    संजीवनी औषधि वाला पर्वत लाने वाले को नमस्कार।

  87. 87

    ॐ शुचये नमः।

    शुचि, यानी पवित्र और शुद्ध को नमस्कार।

  88. 88

    ॐ वाग्मिने नमः।

    वाग्मी, यानी कुशल वक्ता को नमस्कार।

  89. 89

    ॐ दृढव्रताय नमः।

    दृढ़ व्रत, यानी अटल संकल्प वाले को नमस्कार।

  90. 90

    ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमः।

    कालनेमि राक्षस का नाश करने वाले को नमस्कार।

  91. 91

    ॐ हरिमर्कटमर्कटाय नमः।

    हरि (श्रीराम) के वानरों में श्रेष्ठ वानर को नमस्कार।

  92. 92

    ॐ दान्ताय नमः।

    इन्द्रियों को वश में रखने वाले संयमी को नमस्कार।

  93. 93

    ॐ शान्ताय नमः।

    शान्त स्वभाव वाले को नमस्कार।

  94. 94

    ॐ प्रसन्नात्मने नमः।

    प्रसन्न चित्त वाले को नमस्कार।

  95. 95

    ॐ शतकण्ठमदापहृते नमः।

    शतकण्ठ (सौ कण्ठों वाले) का मद हरने वाले को नमस्कार।

  96. 96

    ॐ योगिने नमः।

    योगी, यानी योग में स्थित को नमस्कार।

  97. 97

    ॐ रामकथालोलाय नमः।

    श्रीराम की कथा के रसिक को नमस्कार।

  98. 98

    ॐ सीतान्वेषणपण्डिताय नमः।

    सीता की खोज में निपुण को नमस्कार।

  99. 99

    ॐ वज्रदंष्ट्राय नमः।

    वज्र जैसी दाढ़ों वाले को नमस्कार।

  100. 100

    ॐ वज्रनखाय नमः।

    वज्र जैसे नखों वाले को नमस्कार।

  101. 101

    ॐ रुद्रवीर्यसमुद्भवाय नमः।

    रुद्र (शिव) के तेज से उत्पन्न को नमस्कार।

  102. 102

    ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवारकाय नमः।

    इन्द्रजित (मेघनाद) के चलाए अचूक ब्रह्मास्त्र का निवारण करने वाले को नमस्कार।

  103. 103

    ॐ पार्थध्वजाग्रसंवासिने नमः।

    पार्थ (अर्जुन) की ध्वजा के शिखर पर बसने वाले को नमस्कार।

  104. 104

    ॐ शरपञ्जरभेदकाय नमः।

    बाणों के पिंजरे को तोड़ने वाले को नमस्कार।

  105. 105

    ॐ दशबाहवे नमः।

    दस भुजाओं वाले को नमस्कार।

  106. 106

    ॐ लोकपूज्याय नमः।

    सारे लोकों में पूजित को नमस्कार।

  107. 107

    ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः।

    जाम्बवान की प्रीति (प्रसन्नता) बढ़ाने वाले को नमस्कार।

  108. 108

    ॐ सीतासमेतश्रीरामपादसेवाधुरन्धराय नमः।

    सीता सहित श्रीराम के चरणों की सेवा में सबसे आगे रहने वाले को नमस्कार।

श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम PDF डाउनलोड करें

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/hanuman-108-naam/

संक्षेप में

यह श्री हनुमान (आञ्जनेय) अष्टोत्तर शतनामावली है: हनुमान जी के 108 नाम, हर नाम ‘ॐ … नमः’ के रूप में। यह ‘ॐ आञ्जनेयाय नमः’ से शुरू होने वाली सूची है; इसका श्लोक-रूप ‘आञ्जनेयो महावीरो हनूमान्मारुतात्मजः’ से आरम्भ होने वाला अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र है। परंपरा में अर्चना के समय हर नाम पर फूल, अक्षत, सिन्दूर या तुलसी-दल चढ़ाते हैं। मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती पर इसका पाठ प्रचलित है।

यह वह नामावली है जो ‘ॐ आञ्जनेयाय नमः, ॐ महावीराय नमः, ॐ हनूमते नमः’ से शुरू होती है; इसे श्रीमदाञ्जनेयाष्टोत्तरशतनामावली या आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनामावली भी कहते हैं। हनुमान जी की दूसरी 108-नाम सूचियाँ भी छपती हैं, जैसे ‘हनुमते, अञ्जनापुत्राय, वायुसूनवे, महाबलाय…’ से या ‘अञ्जनीगर्भसम्भूताय, वायुपुत्राय, चिरञ्जीविने…’ से शुरू होने वाली; वे अलग सूचियाँ हैं। इस सूची के स्रोतों में कुछ नाम अलग पढ़े जाते हैं। यहाँ हर नाम का वह पाठ है जो जाँचे गए अधिकतर स्रोतों में है। sanskritdocuments.org की नामावली और stotram.lalitaalaalitah.com का स्तोत्र-पाठ इन जगहों पर अलग पढ़ते हैं: नाम 11 ‘परविद्यापरिहर्त्रे’, 23 ‘सर्वयन्त्रात्मिकाय’, 44 ‘केसरीसूनवे’, 45 ‘सीताशोकनिवारणाय’, 74 ‘वर्धिमैनाकपूजिताय’, 78 ‘महिरावणमर्दनाय’, 89 ‘धृतव्रताय’, 91 ‘हरिर्मर्कटमर्कटाय’, 95 ‘शतकण्ठमदापहाय’ (sanskritdocuments.org की नामावली में ‘दशकण्ठमदापहाय’), 102 ‘…ब्रह्मास्त्रविनिवर्तकाय’ और 104 ‘शरपञ्जरहेलकाय’। उस नामावली में 15 ‘सर्वग्रहविनाशकाय’ और 103 ‘पार्थध्वजाग्रसंवासाय’ भी है। sanskritdocuments.org के स्तोत्र-पाठ में नाम 34 ‘सञ्चलद्वाल…’ और अंतिम नाम ‘सीतासमेतश्रीरामभद्रपूजाधुरन्धरः’ है। द्रिक पंचांग में नाम 71 ‘रामचूडामणिप्रदायकाय’ है। कोई नाम दोहराया नहीं गया है। श्लोक-रूप के 21 श्लोकों में यही 108 नाम इसी क्रम में आते हैं, इसलिए गिनती पर कोई संदेह नहीं; कुछ वेबसाइटें लम्बे नामों को तोड़कर 111 गिन लेती हैं। sanskritdocuments.org पर स्तोत्र के शीर्षक में ‘कालिकारहस्यतः’ (कालिका रहस्य से) लिखा है; जाँचे गए स्रोतों की समापन-पंक्ति (पुष्पिका) कोई ग्रन्थ नहीं बताती, और हमने वह ग्रन्थ स्वयं नहीं देखा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान जी के 108 नामों की यह सूची कहाँ से है?

यह ‘ॐ आञ्जनेयाय नमः’ से शुरू होने वाली आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनामावली है। इसका श्लोक-रूप श्रीमदाञ्जनेयाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र है, जिसके 21 श्लोकों में यही 108 नाम इसी क्रम में आते हैं। sanskritdocuments.org पर स्तोत्र के शीर्षक में इसे कालिका रहस्य से बताया गया है; दूसरे जाँचे गए स्रोत कोई मूल ग्रन्थ नहीं बताते।

इस नामावली से अर्चना कैसे करते हैं?

परंपरा में हर नाम ‘ॐ … नमः’ बोलकर हनुमान जी को एक फूल, थोड़े अक्षत, सिन्दूर या एक तुलसी-दल अर्पित करते हैं, और इस तरह 108 बार अर्पण होता है। विधि में अपने घर या मंदिर की परंपरा चलती है।

नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?

स्तोत्र श्लोकों में है और उसमें नाम कर्ता कारक में आते हैं, जैसे ‘आञ्जनेयो महावीरो’। नामावली में वही नाम चतुर्थी में, ‘ॐ … नमः’ के साथ एक-एक करके बोले जाते हैं, जैसे ‘ॐ आञ्जनेयाय नमः’, ताकि हर नाम पर अर्पण हो सके।

अलग-अलग किताबों में कुछ नाम अलग क्यों मिलते हैं?

यह सूची कई छपे संस्करणों और वेबसाइटों में चलती है, और उनमें कुछ शब्द अलग मिलते हैं, जैसे नाम 78 ‘महारावणमर्दनाय’ या ‘महिरावणमर्दनाय’। यहाँ हर नाम का वह पाठ है जो अधिकतर स्रोतों में है; मुख्य अंतर ऊपर की टिप्पणी में दिए हैं।

हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कब करते हैं?

परंपरा में मंगलवार और शनिवार को, और हनुमान जयंती पर इसका पाठ विशेष रूप से प्रचलित है। इसे किसी भी दिन हनुमान जी की पूजा में पढ़ा जा सकता है।

स्रोत

  1. श्रीमदाञ्जनेयाष्टोत्तरशतनामावली, sanskritdocuments.org (रविशंकर मायावरम द्वारा टंकित, प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
  2. श्रीमदाञ्जनेयाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (श्लोक-रूप, ‘हनुमत्स्तवमञ्जरी’ से), sanskritdocuments.org; यही पाठ संस्कृत विकिस्रोत और द्रिक पंचांग के स्तोत्र-पृष्ठ पर भी है
  3. भगवान हनुमान की अष्टोत्तर शतनामावली, द्रिक पंचांग (drikpanchang.com)
  4. श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, stotram.lalitaalaalitah.com
  5. विविध देवता अष्टोत्तर शत सहस्र नामावली (तेलुगु लिपि, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् के नाम से), archive.org पर स्कैन; चुने हुए नाम मिलाए गए
  6. श्री हनुमान अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली, भक्ति भारत (bhaktibharat.com), और shrinathdham.com की नामावली

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पाठ का मिलान: sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, sa.wikisource.org, drikpanchang.com, drikpanchang.com, stotram.lalitaalaalitah.com, archive.org, bhaktibharat.com, shrinathdham.com