मंत्रहनुमान

मनोजवं मारुततुल्यवेगं

रचना: बुधकौशिक (रामरक्षा स्तोत्र के ऋषि, परंपरा अनुसार)

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 2 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
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  1. श्लोक

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

    शब्दार्थ: मनोजवम् = मन जैसी गति वाले; मारुततुल्यवेगम् = वायु के समान वेग वाले; जितेन्द्रियम् = इंद्रियों को जीतने वाले; बुद्धिमताम् वरिष्ठम् = बुद्धिमानों में श्रेष्ठ; वातात्मजम् = वायु के पुत्र; वानरयूथमुख्यम् = वानरों के दल के प्रमुख; श्रीरामदूतम् = श्री राम के दूत की; शरणं प्रपद्ये = मैं शरण लेता हूँ। भावार्थ: जो मन के समान तेज़ और वायु के समान वेगवान हैं, जिन्होंने इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायु के पुत्र, वानरों के दल के प्रमुख और श्री राम के दूत हैं, उन हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/manojavam-marutatulyavegam/

संक्षेप में

“मनोजवं मारुततुल्यवेगं” हनुमान जी की शरण लेने का संस्कृत श्लोक है। यह रामरक्षा स्तोत्र का 33वाँ श्लोक है, जिसके ऋषि परंपरा में बुधकौशिक माने जाते हैं। इसमें हनुमान जी को मन जैसी गति वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ और श्री राम के दूत कहा गया है। परंपरा में हनुमान पूजा में और मंगलवार व शनिवार को इसका पाठ होता है।

स्रोत के बारे में: रामरक्षा स्तोत्र के आरंभ के विनियोग में इसके ऋषि बुधकौशिक बताए गए हैं। sanskritdocuments.org और संस्कृत विकिस्रोत, दोनों के पाठ में यह श्लोक 33वाँ है। कुछ संस्करणों में ‘वरिष्ठम्’ की जगह ‘वरिष्ठं’ लिखा मिलता है; शब्द वही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह श्लोक किस ग्रंथ से है?

रामरक्षा स्तोत्र से, जहाँ यह 33वाँ श्लोक है। स्तोत्र के ऋषि परंपरा में बुधकौशिक माने जाते हैं।

इस श्लोक में हनुमान जी के कौन-से गुण बताए गए हैं?

मन जैसी गति, वायु जैसा वेग, इंद्रियों पर विजय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठता, वायु-पुत्र होना, वानरों के दल का प्रमुख होना और श्री राम का दूत होना।

इसका पाठ कब किया जाता है?

परंपरा में हनुमान पूजा में, मंगलवार और शनिवार को, और रामरक्षा स्तोत्र के पूरे पाठ के साथ।

स्रोत

  1. रामरक्षा स्तोत्र, श्लोक 33 (sanskritdocuments.org और संस्कृत विकिस्रोत के पाठ)
  2. पाठ का मिलान: greenmesg.org

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पाठ का मिलान: sanskritdocuments.org, sa.wikisource.org, greenmesg.org