मंत्रलक्ष्मी

कराग्रे वसते लक्ष्मीः

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  1. श्लोक

    कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

    शब्दार्थ: कराग्रे = हथेली के अग्र भाग (उँगलियों की ओर) में; वसते = वास करती हैं; लक्ष्मीः = लक्ष्मी; करमध्ये = हथेली के बीच में; सरस्वती = सरस्वती; करमूले = हथेली के मूल (कलाई की ओर) में; तु = और; गोविन्दः = गोविंद (विष्णु, श्रीकृष्ण); प्रभाते = सुबह; करदर्शनम् = हथेलियों का दर्शन। भावार्थ: हथेली के अग्र भाग में लक्ष्मी, बीच में सरस्वती और मूल में गोविंद का वास है; इसलिए सुबह उठकर अपनी हथेलियों का दर्शन करना चाहिए।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/karagre-vasate-lakshmi/

संक्षेप में

“कराग्रे वसते लक्ष्मीः” सुबह उठते ही अपनी हथेलियों को देखते हुए बोला जाने वाला संस्कृत श्लोक है; इस रीति को करदर्शन कहते हैं। इसमें हथेली के अग्र भाग में लक्ष्मी, बीच में सरस्वती और मूल में गोविंद का वास बताया गया है। परंपरा में दिन की शुरुआत इसी श्लोक से की जाती है। इसका मूल ग्रंथ और रचयिता प्रामाणिक रूप से ज्ञात नहीं है।

पाठ-भेद: कुछ घरों में तीसरा चरण ‘करमूले स्थिता गौरी’ (मूल में गौरी, यानी पार्वती) और चौथा ‘मङ्गलं करदर्शनम्’ बोला जाता है; कहीं ‘करमूले स्थितो ब्रह्मा’ पाठ भी मिलता है। सबसे प्रचलित पाठ ऊपर दिया गया है। कहीं ‘लक्ष्मी’ और ‘गोविन्द’ बिना विसर्ग के लिखे मिलते हैं; संस्कृत व्याकरण के अनुसार विसर्ग वाला रूप (लक्ष्मीः, गोविन्दः) शुद्ध है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह श्लोक कब बोला जाता है?

परंपरा में सुबह जागते ही, बिस्तर से उठने से पहले, दोनों हथेलियाँ जोड़कर उन्हें देखते हुए। इसे करदर्शन कहते हैं।

हथेली में लक्ष्मी, सरस्वती और गोविंद का वास क्यों बताया गया है?

एक प्रचलित व्याख्या है कि हमारे हाथ ही धन (लक्ष्मी), विद्या (सरस्वती) और धर्ममय कर्म के साधन हैं, इसलिए दिन की शुरुआत उन्हें आदर से देखकर की जाए। श्लोक स्वयं इसका कारण नहीं बताता।

क्या इसके अलग-अलग पाठ हैं?

हाँ। कहीं ‘करमूले तु गोविन्दः’ की जगह ‘करमूले स्थिता गौरी’ और अंत में ‘मङ्गलं करदर्शनम्’ बोला जाता है, और कहीं ‘करमूले स्थितो ब्रह्मा’। सबसे प्रचलित पाठ ‘करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्’ है।

स्रोत

  1. परंपरागत प्रातःस्मरण श्लोक
  2. पाठ का मिलान: sanskrit.today, shlokam.org; पाठ-भेद: blog.practicalsanskrit.com

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पाठ का मिलान: sanskrit.today, shlokam.org, blog.practicalsanskrit.com