बुध प्रदोष की प्रचलित कथा में एक नया-नया ब्याहा पुरुष सबके मना करने पर भी बुधवार को पत्नी को ससुराल से विदा करा लाता है। रास्ते में उसी की शक्ल का एक दूसरा पुरुष उसकी पत्नी के पास आ जाता है, और पत्नी भी नहीं पहचान पाती कि असली पति कौन है। पुरुष शिव जी से क्षमा माँगता है, दूसरा पुरुष अंतर्धान हो जाता है, और तब से पति-पत्नी बुध प्रदोष का व्रत रखने लगते हैं।
रोमन अक्षरों में हिंदी: पढ़ने में मदद के लिए, मशीन से बनी। मूल देवनागरी पाठ ही आधार है।
दूसरी भाषा अभी नहीं खुल सकी। इसी भाषा में पढ़ें, या दोबारा दबाएँ।
हर सुबह तिथि, राहु काल और आने वाले व्रत-त्योहार, WhatsApp पर एक छोटे संदेश में।चैनल फ़ॉलो करें
अगले बुध प्रदोष व्रत
- बुधवार, 20 जनवरी 2027बुध प्रदोष · पौष शुक्ल त्रयोदशीपूजा का समय 5:50–8:31 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
- बुधवार, 3 फ़रवरी 2027बुध प्रदोष · माघ कृष्ण त्रयोदशीपूजा का समय 6:02–8:39 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
- बुधवार, 2 जून 2027बुध प्रदोष · ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशीपूजा का समय 7:15–9:17 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
- बुधवार, 16 जून 2027बुध प्रदोष · ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशीपूजा का समय 7:21–9:21 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
अगला प्रदोष किसी और वार को: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, शुक्र प्रदोष व्रत कथा
प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूचीजिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी बुधवार को हो, उसे बुध प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। कथा में बुधवार को बेटी की विदाई न करने की बात लोक-मान्यता के रूप में आती है; यह कथा का हिस्सा है, इसे हमने किसी शास्त्र में नहीं जाँचा।
यह प्रचलित कथा है; इसके लिए किसी पुराण का अध्याय हमें नहीं मिला। प्रदोष व्रत की छपी पुस्तिकाओं में सातों वार की कथाएँ सूत जी शौनक आदि ऋषियों को सुनाते हैं। हमने यह कथा Drik Panchang और दो छपी पुस्तिकाओं से घटना-दर-घटना मिलाकर अपने शब्दों में लिखी है; जहाँ अंतर है, वह नीचे दिया है।
व्रत और कथा की विधि
- पुस्तिकाओं के अनुसार: इस व्रत में दिन में केवल एक बार भोजन किया जाता है, और हरी वस्तुओं का प्रयोग बताया गया है।
- शिव जी की पूजा धूप, बेलपत्र आदि से की जाती है।
- शिव पूजा का मुख्य समय सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल है, जब त्रयोदशी तिथि भी चल रही हो (Drik Panchang); अगली तारीखों का पूजा का समय ऊपर है। पूरी विधि प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।
रोमन अक्षरों में हिंदी: पढ़ने में मदद के लिए, मशीन से बनी। मूल देवनागरी पाठ ही आधार है।
दूसरी भाषा अभी नहीं खुल सकी। इसी भाषा में पढ़ें, या दोबारा दबाएँ।
बुध प्रदोष की कथा: बुधवार की विदाई
पुराने समय की बात है। एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ था। कुछ दिन बाद वह पत्नी को लिवाने अपनी ससुराल गया और सास से कहा कि वह बुधवार को ही पत्नी को लेकर अपने नगर लौटेगा।
सास-ससुर और साले-सालियों ने उसे समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले जाना शुभ नहीं माना जाता। पर वह अपनी ज़िद पर अड़ा रहा। आख़िर सास-ससुर ने भारी मन से बेटी और दामाद को उसी दिन विदा कर दिया।
पति-पत्नी बैलगाड़ी से चले। नगर से थोड़ा बाहर निकले ही थे कि पत्नी को प्यास लगी। पति लोटा लेकर पानी लाने गया। लौटा तो देखा कि उसकी पत्नी किसी दूसरे पुरुष के लाए लोटे से पानी पी रही है और हँस-हँसकर उससे बातें कर रही है। गुस्से में वह उस आदमी से झगड़ने पहुँचा, तो हैरान रह गया: उस आदमी की शक्ल हूबहू उसी जैसी थी।
दोनों एक-से दिखने वाले पुरुष झगड़ते रहे। आने-जाने वालों की भीड़ लग गई और एक सिपाही भी आ गया। सिपाही ने स्त्री से पूछा कि इनमें तेरा पति कौन है। वह बेचारी असमंजस में पड़ गई, क्योंकि दोनों बिल्कुल एक जैसे थे।
अपनी पत्नी को बीच रास्ते ऐसे छिनते देख पुरुष की आँखें भर आईं। उसने मन ही मन शिव जी से प्रार्थना की: "हे भगवान, मेरी और मेरी पत्नी की रक्षा करो। मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैं बुधवार को पत्नी को विदा करा लाया; आगे ऐसा कभी नहीं करूँगा।" प्रार्थना पूरी होते ही दूसरा पुरुष अंतर्धान हो गया, और वह पत्नी के साथ सकुशल घर पहुँचा। उस दिन के बाद पति-पत्नी नियम से बुध प्रदोष का व्रत रखने लगे।
कथा के बाद
कथा के बाद शिव जी की आरती की जाती है; प्रदोष की पुस्तिकाओं में इसके लिए "जय शिव ओंकारा" दी गई है। प्रदोष व्रत की पूरी विधि और स्कन्द पुराण वाली मूल कथा प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।
प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूची प्रदोष व्रत कथाअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुध प्रदोष किसे कहते हैं?
जिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी बुधवार को हो, उसे बुध प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, इसलिए कभी यह द्वादशी के दिन भी पड़ता है। अगली तारीखें और पूजा का समय इस पन्ने के ऊपर हैं; प्रदोष की पुस्तिकाओं के अनुसार उस दिन यही कथा पढ़ी और सुनी जाती है।
स्रोत
- Drik Panchang, बुध प्रदोष व्रत कथा (drikpanchang.com/vrat-katha/pradosha/budha-pradosha/budha-pradosha-vrat-katha.html), 10 अक्टूबर 2026 को पढ़ी
- "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, सातों दिनों की अलग-अलग कथाओं सहित", कथावाचक पं. ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी, रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार (archive.org/details/PradoshVratKathaRandhirPrakashan)
- "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि", मानव विकास फाउंडेशन, मुंबई (आचार्य अखिलेश द्विवेदी), 2021 (archive.org/details/mvf_20240803_20240803_1531)
- Drik Panchang, प्रदोष व्रत की सूची, पूजा का समय और वार के अनुसार नाम (drikpanchang.com/vrats/pradoshdates.html)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
