शुक्र प्रदोष की प्रचलित कथा में तीन मित्र हैं: एक राजकुमार, एक ब्राह्मण का बेटा और एक सेठ का बेटा। सेठ का बेटा माता-पिता और ससुराल वालों के मना करने पर भी शुक्र के अस्त रहते पत्नी को विदा करा लाता है; रास्ते में गाड़ी टूटती है, डाकू लूट लेते हैं और घर पहुँचते ही उसे साँप डस लेता है। ब्राह्मण-पुत्र की सलाह पर उसे पत्नी सहित ससुराल लौटा दिया जाता है, और वह ठीक होने लगता है।
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अगले शुक्र प्रदोष व्रत
- शुक्रवार, 6 नवंबर 2026शुक्र प्रदोष · कार्तिक कृष्ण त्रयोदशीपूजा का समय 5:33–8:10 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
- शुक्रवार, 5 मार्च 2027शुक्र प्रदोष · फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशीपूजा का समय 6:23–8:51 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
जिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी शुक्रवार को हो, उसे शुक्र प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। कथा में "शुक्र अस्त" के दिनों में बहू की विदाई न करने की बात लोक-मान्यता के रूप में आती है, जैसी पुस्तिकाओं में लिखी है; यह कथा का हिस्सा है, कोई नियम हम इससे नहीं दे रहे।
यह प्रचलित कथा है; इसके लिए किसी पुराण का अध्याय हमें नहीं मिला। प्रदोष व्रत की छपी पुस्तिकाओं में सातों वार की कथाएँ सूत जी शौनक आदि ऋषियों को सुनाते हैं। हमने यह कथा Drik Panchang और दो छपी पुस्तिकाओं से घटना-दर-घटना मिलाकर अपने शब्दों में लिखी है; जहाँ अंतर है, वह नीचे दिया है।
व्रत और कथा की विधि
- Drik Panchang और पुस्तिकाओं के अनुसार: शुक्र प्रदोष की पूजा सोम प्रदोष जैसी ही है।
- इस व्रत में सफ़ेद रंग की चीज़ें, जैसे खीर, खाने का महत्व बताया गया है।
- शिव पूजा का मुख्य समय सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल है, जब त्रयोदशी तिथि भी चल रही हो (Drik Panchang); अगली तारीखों का पूजा का समय ऊपर है। पूरी विधि प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।
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शुक्र प्रदोष की कथा: तीन मित्र और सेठ का बेटा
पुराने समय की बात है। एक नगर में तीन पक्के मित्र रहते थे: एक राजकुमार, एक ब्राह्मण का बेटा और एक सेठ का बेटा। राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र का विवाह हो चुका था। सेठ के बेटे का विवाह तो हो गया था, पर गौना नहीं हुआ था, यानी पत्नी अभी मायके में ही थी।
एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों के बारे में बात कर रहे थे। ब्राह्मण-पुत्र ने स्त्रियों की प्रशंसा में कहा कि बिना स्त्री का घर भूतों का डेरा होता है। यह सुनकर सेठ के बेटे ने तुरंत अपनी पत्नी को घर लाने का निश्चय किया और माता-पिता को बताया। उन्होंने कहा कि अभी शुक्र अस्त है; इन दिनों बहू-बेटियों को उनके घर से विदा कराकर लाना शुभ नहीं माना जाता, शुक्र उदय होने के बाद ले आना।
सेठ का बेटा नहीं माना और ससुराल जा पहुँचा। सास-ससुर ने भी समझाया, पर वह अड़ा रहा, तो उन्हें बेटी को विदा करना पड़ा। पति-पत्नी नगर से बाहर निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और एक बैल की टाँग टूट गई। पत्नी को भी काफ़ी चोट आई। वे किसी तरह आगे बढ़े तो डाकुओं ने उनका सारा धन लूट लिया।
रोते-बिलखते दोनों घर पहुँचे। पहुँचते ही सेठ के बेटे को साँप ने डस लिया। सेठ ने वैद्यों को बुलाया; उन्होंने देखकर कहा कि यह तीन दिन में मर जाएगा।
यह ख़बर ब्राह्मण-पुत्र तक पहुँची। उसने सेठ से कहा कि बेटे को बहू सहित वापस बहू के घर भेज दीजिए; ये सारी विपत्तियाँ इसलिए आईं कि वह शुक्र अस्त में पत्नी को विदा करा लाया है, और वहाँ पहुँच गया तो बच जाएगा। सेठ ने वैसा ही किया, और बहू के घर पहुँचते ही बेटे की हालत सुधरने लगी। शिव जी की कृपा से पति-पत्नी ने बाक़ी जीवन सुख से बिताया और अंत में उत्तम लोक को गए।
कथा के अलग-अलग रूप
- Drik Panchang में ब्राह्मण-पुत्र शुक्र प्रदोष व्रत का संकल्प करने की सलाह भी देता है; दोनों पुस्तिकाओं में व्रत की यह बात कथा में नहीं है, और अंत में पति-पत्नी "स्वर्ग लोक" जाते हैं।
कथा के बाद
कथा के बाद शिव जी की आरती की जाती है; प्रदोष की पुस्तिकाओं में इसके लिए "जय शिव ओंकारा" दी गई है। प्रदोष व्रत की पूरी विधि और स्कन्द पुराण वाली मूल कथा प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।
प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूची प्रदोष व्रत कथाअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शुक्र प्रदोष किसे कहते हैं?
जिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी शुक्रवार को हो, उसे शुक्र प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, इसलिए कभी यह द्वादशी के दिन भी पड़ता है। अगली तारीखें और पूजा का समय इस पन्ने के ऊपर हैं; प्रदोष की पुस्तिकाओं के अनुसार उस दिन यही कथा पढ़ी और सुनी जाती है।
स्रोत
- Drik Panchang, शुक्र प्रदोष व्रत कथा (drikpanchang.com/vrat-katha/pradosha/shukra-pradosha/shukra-pradosha-vrat-katha.html), 10 अक्टूबर 2026 को पढ़ी
- "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, सातों दिनों की अलग-अलग कथाओं सहित", कथावाचक पं. ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी, रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार (archive.org/details/PradoshVratKathaRandhirPrakashan)
- "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि", मानव विकास फाउंडेशन, मुंबई (आचार्य अखिलेश द्विवेदी), 2021 (archive.org/details/mvf_20240803_20240803_1531)
- Drik Panchang, प्रदोष व्रत की सूची, पूजा का समय और वार के अनुसार नाम (drikpanchang.com/vrats/pradoshdates.html)
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