सोम प्रदोष व्रत कथा

अगला सोम प्रदोष: सोमवार, 21 दिसंबर 2026

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 5 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
पत्थर के मंदिर में बेलपत्र और धतूरे से सजे शिवलिंग की आरती, सामने नंदी
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

सोम प्रदोष की प्रचलित कथा में एक विधवा ब्राह्मणी भिक्षा माँगकर अपने बेटे को पालती है। उसे विदर्भ का एक राजकुमार मिलता है, जिसका राज्य शत्रु ने छीन लिया था; वह उसे भी पालती है। गन्धर्व कन्या अंशुमती से राजकुमार का विवाह होता है, और ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के प्रभाव और गन्धर्वराज की सेना से राजकुमार अपना राज्य वापस पाता है।

कथा पढ़ें:

अगले सोम प्रदोष व्रत

  • सोमवार, 21 दिसंबर 2026सोम प्रदोष · मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशीपूजा का समय 5:37–8:13 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
  • सोमवार, 3 मई 2027सोम प्रदोष · वैशाख कृष्ण त्रयोदशीपूजा का समय 8:05–9:06 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
  • सोमवार, 17 मई 2027सोम प्रदोष · वैशाख शुक्ल त्रयोदशीपूजा का समय 7:06–9:10 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
  • सोमवार, 13 सितंबर 2027सोम प्रदोष · भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशीपूजा का समय 6:29–8:48 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय

अगला प्रदोष किसी और वार को: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, शुक्र प्रदोष व्रत कथा

प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूची

जिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी सोमवार को हो, उसे सोम प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। यह कथा स्कन्द पुराण वाली प्रदोष-कथा (शाण्डिल्य ऋषि, शुचिव्रत और धर्मगुप्त) का छोटा रूप है; पुस्तिकाओं में यही रूप सोम प्रदोष की कथा के नाम से पढ़ा जाता है। पूरी कथा प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।

यह प्रचलित कथा है; इसके लिए किसी पुराण का अध्याय हमें नहीं मिला। प्रदोष व्रत की छपी पुस्तिकाओं में सातों वार की कथाएँ सूत जी शौनक आदि ऋषियों को सुनाते हैं। हमने यह कथा Drik Panchang और दो छपी पुस्तिकाओं से घटना-दर-घटना मिलाकर अपने शब्दों में लिखी है; जहाँ अंतर है, वह नीचे दिया है।

व्रत और कथा की विधि

  • Drik Panchang और पुस्तिकाओं के अनुसार: सुबह स्नान करके शिव-पार्वती का ध्यान और पूजा करें और अर्घ्य दें।
  • "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जप करें, फिर शिव जी से प्रार्थना करें कि वे दुखों और कर्ज़ के बोझ से रक्षा करें।
  • शिव पूजा का मुख्य समय सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल है, जब त्रयोदशी तिथि भी चल रही हो (Drik Panchang); अगली तारीखों का पूजा का समय ऊपर है। पूरी विधि प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।

सोम प्रदोष की कथा: ब्राह्मणी और विदर्भ का राजकुमार

एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का देहांत हो चुका था और उसका कोई सहारा नहीं था। वह रोज़ सुबह अपने बेटे को साथ लेकर भिक्षा माँगने निकलती और जो मिलता, उसी से दोनों का पेट भरती।

एक दिन भिक्षा से लौटते समय उसे रास्ते में एक लड़का बहुत बुरी हालत में मिला। ब्राह्मणी को उस पर दया आई और वह उसे अपने घर ले आई। वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। पड़ोसी राजा ने उसके पिता के राज्य पर हमला करके उसे छीन लिया था, इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था। ब्राह्मणी के घर वह उसके बेटे के साथ पलने लगा।

एक दिन दोनों बालक खेल रहे थे, तब कुछ गन्धर्व कन्याओं ने उन्हें देखा और राजकुमार पर मोहित हो गईं। ब्राह्मण-बालक घर लौट आया, पर राजकुमार अंशुमती नाम की एक गन्धर्व कन्या से बातें करता रह गया। अगले दिन अंशुमती अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई; उन्हें भी वह अच्छा लगा। कुछ दिन बाद शिव जी ने अंशुमती के माता-पिता को स्वप्न में आज्ञा दी कि वे अपनी पुत्री का विवाह इस राजकुमार से कर दें, और उन्होंने ऐसा ही किया।

ऋषियों ने ब्राह्मणी से कहा था कि वह सदा प्रदोष व्रत करती रहे। उसके व्रत के प्रभाव से और गन्धर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने शत्रुओं को विदर्भ से भगा दिया और पिता का राज्य वापस पाकर सुख से राज करने लगा। उसने ब्राह्मणी के बेटे को अपना प्रधानमंत्री बनाया। कथा कहती है कि जैसे ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत से इन दोनों के दिन फिरे, वैसे ही शिव जी अपने दूसरे भक्तों के दिन भी फेरते हैं।

कथा के अलग-अलग रूप

  • मानव विकास फाउंडेशन की पुस्तिका में राजकुमार घायल मिलता है और शत्रुओं ने उसके पिता को बंदी बना लिया था; Drik Panchang और रणधीर प्रकाशन की पुस्तिका में पड़ोसी राजा ने राज्य छीना था।
  • स्कन्द पुराण वाली विस्तृत कथा में राजकुमार के पिता युद्ध में मारे गए थे, शाण्डिल्य ऋषि पूजा की विधि बताते हैं, विवाह के लिए शिव जी गन्धर्वराज को कैलास पर आज्ञा देते हैं (स्वप्न में नहीं), और ब्राह्मण-बालक शुचिव्रत मंत्री नहीं, राजा का भाई कहलाता है।

कथा के बाद

कथा के बाद शिव जी की आरती की जाती है; प्रदोष की पुस्तिकाओं में इसके लिए "जय शिव ओंकारा" दी गई है। प्रदोष व्रत की पूरी विधि और स्कन्द पुराण वाली मूल कथा प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।

प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूची प्रदोष व्रत कथा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोम प्रदोष किसे कहते हैं?

जिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी सोमवार को हो, उसे सोम प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, इसलिए कभी यह द्वादशी के दिन भी पड़ता है। अगली तारीखें और पूजा का समय इस पन्ने के ऊपर हैं; प्रदोष की पुस्तिकाओं के अनुसार उस दिन यही कथा पढ़ी और सुनी जाती है।

स्रोत

  1. Drik Panchang, सोम प्रदोष व्रत कथा (drikpanchang.com/vrat-katha/pradosha/soma-pradosha/soma-pradosha-vrat-katha.html), 10 अक्टूबर 2026 को पढ़ी
  2. "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, सातों दिनों की अलग-अलग कथाओं सहित", कथावाचक पं. ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी, रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार (archive.org/details/PradoshVratKathaRandhirPrakashan)
  3. "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि", मानव विकास फाउंडेशन, मुंबई (आचार्य अखिलेश द्विवेदी), 2021 (archive.org/details/mvf_20240803_20240803_1531)
  4. स्कन्द पुराण, ब्रह्म खण्ड, ब्रह्मोत्तर खण्ड, अध्याय 6 "प्रदोष का महत्त्व" और 7 "शिव पूजा की विधि", जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद (मोतीलाल बनारसीदास), wisdomlib.org पर (10 अक्टूबर 2026 को पढ़ा)
  5. Drik Panchang, प्रदोष व्रत की सूची, पूजा का समय और वार के अनुसार नाम (drikpanchang.com/vrats/pradoshdates.html)

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