रवि प्रदोष व्रत कथा

अगला रवि प्रदोष: रविवार, 22 नवंबर 2026

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 4 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
पत्थर के मंदिर में बेलपत्र और धतूरे से सजे शिवलिंग की आरती, सामने नंदी
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

रवि प्रदोष की प्रचलित कथा में एक गरीब ब्राह्मण की पत्नी प्रदोष व्रत रखती है। उसका बेटा गंगा स्नान को जाते हुए पहले डाकुओं से बच जाता है, फिर राजा के सिपाही उसे चोर समझकर पकड़ लेते हैं। माँ के व्रत के प्रभाव से राजा को स्वप्न आता है कि बालक निर्दोष है; राजा उसे छोड़ देता है और परिवार को पाँच गाँव दान में देता है।

कथा पढ़ें:

अगले रवि प्रदोष व्रत

  • रविवार, 22 नवंबर 2026रवि प्रदोष · कार्तिक शुक्ल त्रयोदशीपूजा का समय 5:25–8:06 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
  • रविवार, 6 दिसंबर 2026रवि प्रदोष · मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशीपूजा का समय 5:24–8:07 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
  • रविवार, 4 अप्रैल 2027रवि प्रदोष · चैत्र कृष्ण त्रयोदशीपूजा का समय 6:41–8:58 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
  • रविवार, 18 अप्रैल 2027रवि प्रदोष · चैत्र शुक्ल त्रयोदशीपूजा का समय 6:48–9:01 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय

अगला प्रदोष किसी और वार को: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, शुक्र प्रदोष व्रत कथा

प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूची

जिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी रविवार को हो, उसे रवि प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। प्रदोष की पुस्तिकाओं में सातों वार की कथाओं में यह पहली है। इसके आरंभ में भागीरथी के तट पर ऋषियों की सभा में सूत जी बताते हैं कि यह व्रत भगवान शंकर ने सती जी को सुनाया था और उनके गुरु ने उन्हें।

यह प्रचलित कथा है; इसके लिए किसी पुराण का अध्याय हमें नहीं मिला। प्रदोष व्रत की छपी पुस्तिकाओं में सातों वार की कथाएँ सूत जी शौनक आदि ऋषियों को सुनाते हैं। हमने यह कथा Drik Panchang और दो छपी पुस्तिकाओं से घटना-दर-घटना मिलाकर अपने शब्दों में लिखी है; जहाँ अंतर है, वह नीचे दिया है।

व्रत और कथा की विधि

  • Drik Panchang और पुस्तिकाओं के अनुसार: सुबह स्नान करके निराहार रहें, शिव जी का ध्यान करें और शिव मंदिर जाकर पूजा करें।
  • पूजा में बेलपत्र, धूप, दीप, अक्षत और मौसम के फल चढ़ाए जाते हैं, माथे पर त्रिपुंड लगाया जाता है और रुद्राक्ष की माला पर "ॐ नमः शिवाय" का जप किया जाता है।
  • ब्राह्मण को भोजन और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दी जाती है। उस दिन मौन रखने, सच बोलने, धरती पर सोने और एक बार भोजन करने का नियम बताया गया है; पुस्तिकाओं में श्रावण के महीने में इस व्रत का विशेष महत्व लिखा है।
  • शिव पूजा का मुख्य समय सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल है, जब त्रयोदशी तिथि भी चल रही हो (Drik Panchang); अगली तारीखों का पूजा का समय ऊपर है। पूरी विधि प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।

रवि प्रदोष की कथा: ब्राह्मणी का बेटा और राजा का स्वप्न

एक गाँव में एक बहुत गरीब ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी धर्म पर चलने वाली थी और प्रदोष का व्रत रखती थी। उनका एक ही बेटा था। एक दिन वह बेटा गंगा स्नान करने निकला। रास्ते में डाकुओं ने उसे घेर लिया और धमकाया कि अपने पिता का छिपा धन कहाँ है, बता, नहीं तो मार डालेंगे।

बालक ने डरते हुए कहा कि वे बहुत गरीब हैं, उनके पास धन कहाँ। डाकुओं ने पूछा कि उसकी पोटली में क्या बँधा है। उसने सीधे-सीधे बता दिया कि माँ ने रास्ते के लिए रोटियाँ बाँध दी हैं। तब एक डाकू ने दूसरों से कहा कि यह बेचारा तो सचमुच गरीब है, इसे छोड़ दो। डाकू उसे छोड़कर चले गए।

बालक आगे चलकर एक नगर के पास पहुँचा और थककर बरगद के एक पेड़ की छाया में सो गया। उस नगर के सिपाही डाकुओं को ढूँढ रहे थे। उन्होंने सोते बालक को भी चोर समझा और पकड़कर राजा के सामने ले गए। राजा ने उसे कारागार में डालने की आज्ञा दे दी।

उधर बालक की माँ प्रदोष का व्रत करके शिव जी से बेटे के सकुशल लौटने की प्रार्थना कर रही थी। उसी रात राजा को स्वप्न आया कि यह बालक चोर नहीं है; सुबह होते ही इसे छोड़ दो, नहीं तो तुम्हारा राज्य और वैभव जल्दी नष्ट हो जाएगा।

सुबह राजा ने बालक से सारी बात पूछी, और बालक ने डाकुओं से लेकर पकड़े जाने तक सब कह सुनाया। राजा ने सिपाही भेजकर उसके माता-पिता को बुलवाया। वे डरते हुए आए तो राजा ने कहा, "डरो मत, तुम्हारा बेटा निर्दोष है।" उनकी गरीबी देखकर राजा ने उन्हें पाँच गाँव दान में दिए। शिव जी की कृपा से वह ब्राह्मण परिवार सुख से रहने लगा। कथा कहती है कि जो इस व्रत को श्रद्धा से करता है, उसे भी ऐसा ही सुख मिलता है।

कथा के अलग-अलग रूप

  • Drik Panchang और दोनों पुस्तिकाओं में कथा एक-सी है। कथा में कहीं रविवार का नाम नहीं आता; पुस्तिकाओं में यह "रविवार त्रयोदशी" के शीर्षक के नीचे है।

कथा के बाद

कथा के बाद शिव जी की आरती की जाती है; प्रदोष की पुस्तिकाओं में इसके लिए "जय शिव ओंकारा" दी गई है। प्रदोष व्रत की पूरी विधि और स्कन्द पुराण वाली मूल कथा प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।

प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूची प्रदोष व्रत कथा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवि प्रदोष किसे कहते हैं?

जिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी रविवार को हो, उसे रवि प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, इसलिए कभी यह द्वादशी के दिन भी पड़ता है। अगली तारीखें और पूजा का समय इस पन्ने के ऊपर हैं; प्रदोष की पुस्तिकाओं के अनुसार उस दिन यही कथा पढ़ी और सुनी जाती है।

स्रोत

  1. Drik Panchang, रवि प्रदोष व्रत कथा (drikpanchang.com/vrat-katha/pradosha/ravi-pradosha/ravi-pradosha-vrat-katha.html), 10 अक्टूबर 2026 को पढ़ी
  2. "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, सातों दिनों की अलग-अलग कथाओं सहित", कथावाचक पं. ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी, रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार (archive.org/details/PradoshVratKathaRandhirPrakashan)
  3. "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि", मानव विकास फाउंडेशन, मुंबई (आचार्य अखिलेश द्विवेदी), 2021 (archive.org/details/mvf_20240803_20240803_1531)
  4. Drik Panchang, प्रदोष व्रत की सूची, पूजा का समय और वार के अनुसार नाम (drikpanchang.com/vrats/pradoshdates.html)

कुछ गलत लगा? गलती बताएँ