भौम (मंगल) प्रदोष की प्रचलित कथा में एक बुढ़िया हर मंगलवार हनुमान जी का व्रत रखती है और उस दिन न घर लीपती है, न मिट्टी खोदती है। हनुमान जी साधु बनकर उसकी परीक्षा लेते हैं और उसके बेटे मंगलिया की पीठ पर आग जलाकर भोजन बनवाते हैं। भोजन के बाद पुकारने पर मंगलिया हँसता हुआ जीवित आ जाता है, और हनुमान जी अपने असली रूप में दर्शन देते हैं।
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- मंगलवार, 5 जनवरी 2027भौम प्रदोष · पौष कृष्ण त्रयोदशीपूजा का समय 5:38–8:21 PM (नई दिल्ली) · अपने शहर का समय
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अगला प्रदोष किसी और वार को: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, शुक्र प्रदोष व्रत कथा
प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूचीजिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी मंगलवार को हो, उसे भौम प्रदोष या मंगल प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। पुस्तिकाओं में सूत जी इसे रोगों से छुटकारे का व्रत बताते हैं और उस बुढ़िया की कथा सुनाते हैं जिसने यह व्रत किया। कथा हनुमान जी की है; प्रदोष की पूजा फिर भी शिव जी की होती है।
यह प्रचलित कथा है; इसके लिए किसी पुराण का अध्याय हमें नहीं मिला। प्रदोष व्रत की छपी पुस्तिकाओं में सातों वार की कथाएँ सूत जी शौनक आदि ऋषियों को सुनाते हैं। हमने यह कथा Drik Panchang और दो छपी पुस्तिकाओं से घटना-दर-घटना मिलाकर अपने शब्दों में लिखी है; जहाँ अंतर है, वह नीचे दिया है।
व्रत और कथा की विधि
- Drik Panchang और पुस्तिकाओं के अनुसार: इस व्रत में दिन में एक बार गेहूँ और गुड़ का भोजन किया जाता है।
- पूजा में लाल फूल चढ़ाए जाते हैं और व्रत करने वाला लाल वस्त्र पहनता है।
- शिव पूजा का मुख्य समय सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल है, जब त्रयोदशी तिथि भी चल रही हो (Drik Panchang); अगली तारीखों का पूजा का समय ऊपर है। पूरी विधि प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।
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भौम प्रदोष की कथा: बुढ़िया, मंगलिया और साधु
बहुत पुराने समय की बात है। एक नगर में एक बूढ़ी स्त्री रहती थी। उसका मंगलिया नाम का एक बेटा था। बुढ़िया की हनुमान जी में बड़ी श्रद्धा थी। वह हर मंगलवार हनुमान जी का व्रत रखकर विधि से उन्हें भोग लगाती थी, और मंगलवार को न घर लीपती थी, न मिट्टी खोदती थी।
बहुत दिन इसी तरह बीत गए तो हनुमान जी ने उसकी श्रद्धा परखने की सोची। वे साधु का वेश धरकर उसके दरवाज़े पर आए और पुकारा, "है कोई हनुमान का भक्त, जो मेरी इच्छा पूरी करे?" बुढ़िया बाहर आई और पूछा कि महाराज, क्या आज्ञा है। साधु ने कहा कि मुझे भूख लगी है, भोजन बनाऊँगा; तू थोड़ी-सी ज़मीन लीप दे। बुढ़िया दुविधा में पड़ गई और हाथ जोड़कर बोली कि लीपने और मिट्टी खोदने के सिवा जो कहें, वह करूँगी।
साधु ने तीन बार परखा, फिर कहा, "अपने बेटे को बुला। मैं उसे पेट के बल लिटाकर उसकी पीठ पर आग जलाऊँगा और भोजन बनाऊँगा।" यह सुनकर बुढ़िया के पैरों तले ज़मीन खिसक गई, पर वह वचन दे चुकी थी। उसने मंगलिया को बुलाकर साधु को सौंप दिया। साधु ने बुढ़िया के हाथों ही मंगलिया को लिटवाया और उसकी पीठ पर आग जलवाई। बुढ़िया दुखी मन से घर के भीतर चली गई।
भोजन बन गया तो साधु ने बुढ़िया को बुलाकर कहा कि मंगलिया को भी पुकार, वह भी आकर भोग लगा ले। बुढ़िया की आँखें भर आईं; उसने कहा कि अब उसका नाम लेकर मेरा दिल और न दुखाइए। साधु नहीं माने, तो उसने मंगलिया को पुकारा। पुकारते ही मंगलिया हँसता हुआ दौड़ा चला आया। बेटे को जीवित देखकर बुढ़िया साधु के चरणों में गिर पड़ी। तब साधु ने अपने असली रूप में दर्शन दिए। अपने आँगन में हनुमान जी को देखकर बुढ़िया को लगा कि उसका जीवन सफल हो गया। पुस्तिका के अनुसार इसी व्रत से उसे मोक्ष मिला।
कथा के बाद
कथा के बाद शिव जी की आरती की जाती है; प्रदोष की पुस्तिकाओं में इसके लिए "जय शिव ओंकारा" दी गई है। प्रदोष व्रत की पूरी विधि और स्कन्द पुराण वाली मूल कथा प्रदोष व्रत कथा के पन्ने पर है।
प्रदोष व्रत 2026-27 की पूरी सूची प्रदोष व्रत कथाअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भौम प्रदोष किसे कहते हैं?
जिस प्रदोष व्रत की त्रयोदशी मंगलवार को हो, उसे भौम प्रदोष कहते हैं (Drik Panchang)। व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, इसलिए कभी यह द्वादशी के दिन भी पड़ता है। अगली तारीखें और पूजा का समय इस पन्ने के ऊपर हैं; प्रदोष की पुस्तिकाओं के अनुसार उस दिन यही कथा पढ़ी और सुनी जाती है।
स्रोत
- Drik Panchang, भौम प्रदोष व्रत कथा (drikpanchang.com/vrat-katha/pradosha/bhauma-pradosha/bhauma-pradosha-vrat-katha.html), 10 अक्टूबर 2026 को पढ़ी
- "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, सातों दिनों की अलग-अलग कथाओं सहित", कथावाचक पं. ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी, रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार (archive.org/details/PradoshVratKathaRandhirPrakashan)
- "प्रदोष (त्रयोदशी) व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि", मानव विकास फाउंडेशन, मुंबई (आचार्य अखिलेश द्विवेदी), 2021 (archive.org/details/mvf_20240803_20240803_1531)
- Drik Panchang, प्रदोष व्रत की सूची, पूजा का समय और वार के अनुसार नाम (drikpanchang.com/vrats/pradoshdates.html)
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