हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र

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मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
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  1. मंत्र

    हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

    शब्दार्थ: हरे = हे हरि (भगवान)! गौड़ीय वैष्णव परंपरा में इसे ‘हरा’, यानी राधा, का संबोधन भी माना जाता है; राम = श्री राम; कृष्ण = श्रीकृष्ण। भावार्थ: यह भगवान के नामों का बार-बार प्रेम से किया गया संबोधन है। इसमें आठ बार ‘हरे’, चार बार ‘राम’ और चार बार ‘कृष्ण’ आते हैं, कुल सोलह नाम।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/hare-rama-hare-krishna/

संक्षेप में

“हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥” सोलह नामों का मंत्र है, जिसे महामंत्र कहा जाता है। यह कलिसंतरण उपनिषद् में आता है, जहाँ ब्रह्मा नारद को कलियुग पार करने के उपाय के रूप में यह मंत्र बताते हैं। चैतन्य महाप्रभु (1486–1534) की भक्ति-परंपरा से यह कीर्तन के रूप में दूर-दूर तक फैला।

पाठ के बारे में: कलिसंतरण उपनिषद् में ‘हरे राम’ वाली पंक्ति पहले है, और उपनिषद् इसे सोलह नामों वाला (षोडशक) मंत्र कहता है। इस्कॉन सहित गौड़ीय वैष्णव परंपरा में प्रायः ‘हरे कृष्ण’ वाली पंक्ति पहले गाई जाती है; शब्द वही रहते हैं। उपनिषद् के अनुसार इस मंत्र के जप की कोई विशेष विधि नहीं है, और इसे शुद्ध या अशुद्ध किसी भी अवस्था में जपा जा सकता है। कलिसंतरण एक छोटा और बाद का उपनिषद् है, जिसे कृष्ण यजुर्वेद से जोड़ा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह महामंत्र किस ग्रंथ से है?

कलिसंतरण उपनिषद् से। उसमें द्वापर युग के अंत में नारद ब्रह्मा से पूछते हैं कि कलियुग को कैसे पार करें, और ब्रह्मा उत्तर में यह सोलह नामों वाला मंत्र बताते हैं।

पहले ‘हरे राम’ बोलें या ‘हरे कृष्ण’?

उपनिषद् के पाठ में ‘हरे राम’ वाली पंक्ति पहले है, और बहुत से कीर्तनों में यही क्रम चलता है। इस्कॉन और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में ‘हरे कृष्ण’ पहले गाया जाता है। दोनों में शब्द वही हैं।

‘हरे’ का क्या अर्थ है?

संस्कृत में ‘हरे’ ‘हरि’ का संबोधन है: ‘हे हरि’। गौड़ीय वैष्णव इसे ‘हरा’, यानी राधा, का संबोधन भी मानते हैं।

इसका जप कैसे किया जाता है?

उपनिषद् कहता है कि इसकी कोई विशेष विधि नहीं है। लोग इसे कीर्तन में गाते हैं या माला पर जपते हैं; कई लोग तुलसी की माला पर 108 बार जपते हैं, जो परंपरा की संख्या है।

स्रोत

  1. कलिसंतरण उपनिषद् (sanskritdocuments.org और संस्कृत विकिस्रोत के पाठ)
  2. क्रम और परंपरा के लिए: Wikipedia, Hare Krishna (mantra)

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पाठ का मिलान: sanskritdocuments.org, sa.wikisource.org, en.wikipedia.org