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श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/krishna-108-naam/
यह श्री कृष्ण की अष्टोत्तर शतनामावली है: भगवान कृष्ण के 108 नाम, हर नाम “ॐ … नमः” के रूप में। नाम श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र (“श्रीकृष्णः कमलानाथो वासुदेवः सनातनः…”) के क्रम में हैं; इसकी पुष्पिका इसे नारदपंचरात्र का बताती है और थोड़े भेद के साथ ये श्लोक ब्रह्माण्ड पुराण में भी हैं। परंपरा में अर्चना करते हुए हर नाम पर तुलसी दल, फूल या अक्षत चढ़ाते हैं, विशेषकर जन्माष्टमी और एकादशी पर।
यह वही सूची है जो Drik Panchang और sanskritdocuments.org पर “श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामावलि” नाम से छपी है (श्रीकृष्णाय, कमलानाथाय, वासुदेवाय, सनातनाय…); नाम श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र के क्रम में हैं। इसी शीर्षक से दूसरी सूचियाँ भी मिलती हैं, जैसे “प्रेमामृतरसायन” नामावली (श्रीकृष्णाय, कृष्णेन्दिरानन्दाय, गोविन्दाय…) और नारायणीय-माहात्म्य की नामावली (गोलोकनाथाय, गोविन्दाय, गोपिकाजनवल्लभाय…); गोपाल के 108 नाम (गोपालाय, गोपतये, गोप्त्रे…) भी अलग सूची है। गिनती: इन स्रोतों में आने वाले सारे नाम अलग-अलग गिनें तो 109 होते हैं। यहाँ sanskritdocuments की तरह “अव्यक्त” और “गीतामृतमहोदधि” को एक नाम (93) गिना है; Drik Panchang इन्हें दो नाम गिनकर अंतिम “परात्पराय” छोड़ देता है, इसलिए यहाँ के नाम 94–107 वहाँ 95–108 पर हैं। कुछ सूचियाँ “तमालश्यामलाकृतये” (38) छोड़ती हैं और एक छपी पुस्तक (OCR से पढ़ी गई) “त्रिभङ्गि-मधुराकृति” को एक नाम गिनती है। पाठ-भेद: 1–2 कुछ वेबसाइटों और पुस्तिकाओं में “कृष्णाय”, “कमलनाथाय”; 11 “…शङ्खाम्बुजायुधाय”; 24 “नवनीतनवाहाराय” या “नवनीतलवाहारिणे”; 31 “गोविदाम्पतये” (स्तोत्र में भी यही); 34 “धेनुकासुरमर्दनाय”; 43 “परस्मै ज्योतिषे”; 64 “कुब्जाकृष्टाम्बरधराय”, अर्थात् जिनका उत्तरीय कुब्जा ने खींचा (भागवत पुराण 10.42.9 का प्रसंग); 83 “जिष्णवे”; 97 “दानवेन्द्रविनाशनाय”; 103 “तीर्थपादाय”; 106 “सर्वभूतात्मकाय”; 108 “परात्परस्मै”। स्तोत्र के पाठ में 32–33 की जगह “वत्सपालनसञ्चारी” और 89 की जगह “बकारिर्बाणबाहुकृत्” भी मिलता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली में कितने नाम हैं और यह कहाँ से ली गई है?
इसमें श्री कृष्ण के 108 नाम हैं। ये श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र से लिए गए हैं, जिसकी पुष्पिका (जैसे 1912 की “बृहत्स्तोत्ररत्नाकर” में) इसे नारदपंचरात्र का बताती है; थोड़े पाठ-भेद के साथ यही श्लोक ब्रह्माण्ड पुराण के मध्यभाग के अध्याय 36 में भी हैं।
इस नामावली से अर्चना कैसे की जाती है?
परंपरा में हर नाम “ॐ … नमः” के साथ बोलते हुए भगवान को एक तुलसी दल, फूल या अक्षत चढ़ाया जाता है। 108 नाम पूरे होने पर आरती की जाती है; विधि अपने कुल या पुरोहित की रीति से करें।
नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?
स्तोत्र में यही नाम श्लोकों में आते हैं (“श्रीकृष्णः कमलानाथो वासुदेवः सनातनः…”)। नामावली में हर नाम को अलग मंत्र बनाया जाता है: नाम चतुर्थी विभक्ति में, आगे “ॐ” और पीछे “नमः”, जैसे “ॐ कमलानाथाय नमः”।
अलग-अलग किताबों और वेबसाइटों में नाम या क्रम अलग क्यों दिखते हैं?
इन सूचियों में आने वाले सारे नाम अलग-अलग गिनें तो 109 होते हैं, इसलिए हर स्रोत 108 तक पहुँचने के लिए किसी एक जगह दो नाम जोड़ता है या एक नाम छोड़ता है। कुछ शब्दों के पाठ-भेद भी हैं; मुख्य भेद ऊपर की टिप्पणी में दिए हैं।
यह नामावली कब पढ़ी जाती है?
परंपरा में इसे जन्माष्टमी पर, एकादशी को और रोज़ की कृष्ण-पूजा में पढ़ा जाता है।
स्रोत
- श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामावलिः 1, sanskritdocuments.org (एन. बालसुब्रमणियन द्वारा लिप्यंतरित, एन. बालसुब्रमणियन और पीएसए ईश्वरन द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
- भगवान कृष्ण के 108 नाम (श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामावलिः), Drik Panchang
- श्रीकृष्ण अष्टोत्तरशतनामावली, “व्रत महिमा” (तंजावुर महाराजा सरफोजी सरस्वती महल ग्रंथमाला सं. 367) की archive.org पर छपी प्रति, OCR से पढ़ी गई
- श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली, bhaktinidhi.com और hariome.com (एक ही पाठ-परिवार)
- श्री कृष्णाष्टोत्तरशत नामावलिः, bhaktibharat.com, और “अष्टोत्तरशत नामावली संग्रह” (मानव विकास फाउंडेशन, मुंबई), archive.org (एक ही पाठ-परिवार)
- श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (पुष्पिका: नारदपंचरात्र), sanskritdocuments.org; वही पाठ Drik Panchang पर; बृहत्स्तोत्ररत्नाकर (1912), संस्कृत विकिस्रोत, पृष्ठ 293–295
- ब्रह्माण्ड पुराण, मध्यभाग, उपोद्घातपाद, भार्गवचरित, अध्याय 36 (श्लोक 21–41), sanskritdocuments.org और संस्कृत विकिस्रोत
- भागवत पुराण 10.42.9 (कुब्जा का प्रसंग, नाम 64 के पाठ-भेद के लिए), vedabase.io
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पाठ का मिलान: sanskritdocuments.org, drikpanchang.com, archive.org, bhaktinidhi.com, hariome.com, bhaktibharat.com, archive.org, sanskritdocuments.org, drikpanchang.com, sa.wikisource.org, sanskritdocuments.org, sa.wikisource.org, vedabase.io
