मंत्रशिव

ॐ नमः शिवाय

परंपरा में: सोमवार

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 3 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
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  1. मंत्र

    ॐ नमः शिवाय॥

    शब्दार्थ: ॐ = प्रणव, पवित्र अक्षर; नमः = नमस्कार; शिवाय = शिव को (‘शिव’ का अर्थ है मंगलमय, कल्याणकारी)। भावार्थ: ॐ, मंगलमय भगवान शिव को नमस्कार है।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/om-namah-shivaya/

संक्षेप में

“ॐ नमः शिवाय” भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध मंत्र है। “नमः शिवाय” के पाँच अक्षरों (न, मः, शि, वा, य) के कारण इसे पंचाक्षर मंत्र कहते हैं। “नमः शिवाय” शब्द यजुर्वेद के श्री रुद्रम् में आते हैं, और शिव पुराण में पंचाक्षर मंत्र की महिमा बताई गई है। परंपरा में इसका जप शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय, सोमवार को, सावन में और महाशिवरात्रि पर होता है।

स्रोत के बारे में: ‘नमः शिवाय’ शब्द कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता (4.5.8.1) के श्री रुद्रम् में “नमः शिवाय च शिवतराय च” (शिव को और उनसे भी अधिक मंगलमय को नमस्कार) के रूप में आते हैं; शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयि संहिता (16.41) में भी यही वाक्य है। वेद में यह ‘ॐ’ के साथ अलग मंत्र के रूप में नहीं आता; ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप-मंत्र रूप परंपरा और पुराणों से है। शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता (अध्याय 10) में शिव ओंकार का उपदेश देते हैं और कहते हैं कि उसी से पंचाक्षर मंत्र प्रकट हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसे पंचाक्षर मंत्र क्यों कहते हैं?

“नमः शिवाय” में पाँच अक्षर हैं: न, मः, शि, वा, य। आरंभ में ‘ॐ’ जोड़कर इसका जप किया जाता है।

“नमः शिवाय” किस वेद में है?

यजुर्वेद के श्री रुद्रम् में: तैत्तिरीय संहिता 4.5.8.1 और वाजसनेयि संहिता 16.41 में “नमः शिवाय च शिवतराय च” वाक्य आता है। ‘ॐ नमः शिवाय’ का पूरा जप-मंत्र रूप परंपरा से है।

शिव पुराण इस मंत्र के बारे में क्या कहता है?

शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता (अध्याय 10) में शिव ओंकार का उपदेश देते हैं और कहते हैं कि उसी से पंचाक्षर मंत्र प्रकट हुआ।

इस मंत्र का जप कब किया जाता है?

परंपरा में शिवलिंग पर जल या बेलपत्र चढ़ाते समय, सोमवार को, सावन के महीने में और महाशिवरात्रि पर। बहुत से लोग रुद्राक्ष की माला पर 108 बार जप करते हैं; यह संख्या परंपरा की है। इसे मन में भी जपा जाता है।

स्रोत

  1. कृष्ण यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता 4.5.8.1 (श्री रुद्रम्), संस्कृत विकिस्रोत
  2. शुक्ल यजुर्वेद, वाजसनेयि माध्यन्दिन संहिता 16.41, संस्कृत विकिस्रोत
  3. शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता, अध्याय 10, संस्कृत विकिस्रोत

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