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श्री शिव अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/shiv-108-naam/
यह भगवान शिव के 108 नामों की नामावली है; हर नाम “ॐ … नमः” के रूप में बोला जाता है। यह प्रचलित शिव अष्टोत्तर शतनामावली “शिवो महेश्वरः शम्भुः…” से शुरू होने वाले शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र से बनी है, जिसे स्तोत्र की पुष्पिका शिवरहस्य का अंश बताती है। परंपरा में अर्चना में हर नाम पर बिल्वपत्र, फूल या अक्षत चढ़ाते हैं, और सोमवार, सावन व महाशिवरात्रि पर इसका विशेष पाठ होता है।
यह सूची शिवाष्टोत्तरशतनामावली (शिव अष्टोत्तर शतनामावली) कहलाती है। इसका पद्य रूप शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र है, जिसके 13 श्लोकों में यही 108 नाम इसी क्रम में आते हैं। sanskritdocuments.org पर स्तोत्र की पुष्पिका इसे शिवरहस्य के अंतर्गत विष्णु द्वारा कहा गया बताती है, और वहीं नामावली की पुष्पिका इसे गौरी-नारायण संवाद कहती है; ड्रिक पंचांग का अंग्रेज़ी पृष्ठ अंत में शाक्तप्रमोद का नाम देता है। इसी शीर्षक से दूसरी सूचियाँ भी छपती हैं: गीता प्रेस के ‘शिवस्तोत्ररत्नाकर’ का शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र “जय …” वाले संबोधनों में है, और शिवपुराण (रुद्रसंहिता, युद्धखंड) में अंधक की स्तुति वाला 108 नामों का स्तोत्र “महादेवो विरूपाक्षः चन्द्रार्द्धकृतशेखरः” से शुरू होता है। स्रोतों के अंतर: नाम 11 कुछ स्रोतों में ‘शूलपाणिने’ है; नाम 20 sanskritdocuments की नामावली में ‘त्रिलोकीशाय’; नाम 65 ड्रिक पंचांग में ‘गिरिधन्विने’; नाम 90 sanskritdocuments की नामावली और स्वामी स्वयंप्रकाशगिरि की व्याख्या में ‘पाशविमोचनाय’। इन सबका अर्थ वही रहता है। नाम 60 गिरीशाय और 61 गिरिशाय अलग नाम हैं, दोहराव नहीं; 96 हरये और 100 हराय भी अलग हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिव के 108 नामों की यह सूची कहाँ से ली गई है?
यह शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र के 108 नामों की नामावली है। sanskritdocuments.org पर छपे स्तोत्र की पुष्पिका इसे शिवरहस्य का अंश बताती है, जिसमें ये नाम विष्णु कहते हैं। ड्रिक पंचांग का अंग्रेज़ी पृष्ठ इसे शाक्तप्रमोद से बताता है।
इस नामावली से अर्चना कैसे की जाती है?
परंपरा में हर नाम के साथ “ॐ … नमः” बोलकर शिवलिंग या शिव के चित्र पर एक बिल्वपत्र, फूल या अक्षत चढ़ाया जाता है। स्तोत्र की फलश्रुति में भी बिल्वपत्र, फूल, तिल और अक्षत आदि से पूजन का उल्लेख है। विधि के बारे में अपने पुरोहित या परिवार की परंपरा से पूछ लें।
नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?
स्तोत्र में यही 108 नाम 13 श्लोकों में पद्य के रूप में आते हैं, जैसे “शिवो महेश्वरः शम्भुः पिनाकी शशिशेखरः”। नामावली में हर नाम अलग करके “ॐ शिवाय नमः” की तरह चतुर्थी विभक्ति में बोला जाता है, ताकि हर नाम पर अर्पण किया जा सके।
अलग-अलग किताबों और वेबसाइटों में कुछ नाम अलग क्यों दिखते हैं?
प्रतियों में छोटे व्याकरण और वर्तनी के अंतर आ गए हैं, जैसे ‘शूलपाणये’ और ‘शूलपाणिने’, या ‘पाशविमोचकाय’ और ‘पाशविमोचनाय’; इनका अर्थ एक ही है। इसके अलावा शिव के 108 नामों की कुछ बिल्कुल अलग सूचियाँ भी इसी शीर्षक से छपती हैं।
इसका पाठ कब किया जाता है?
परंपरा में इसका पाठ रोज़ की शिव पूजा में किया जाता है, और सोमवार, सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से।
स्रोत
- श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामावलिः, sanskritdocuments.org (Varun Mandawara, PSA Easwaran और Ruma Dewan द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ; पुष्पिका: शिवरहस्य, गौरी-नारायण संवाद)
- श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, sanskritdocuments.org (Sunder Hattangadi, PSA Easwaran आदि द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ; पुष्पिका: शिवरहस्य, विष्णु द्वारा कहा गया)
- शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, प्रथम भाग (सं. रामस्वामी शास्त्री, वाविल्ला मुद्रणालय, मद्रास, 1953), संस्कृत विकिस्रोत पर प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ
- भगवान शिव की अष्टोत्तर शतनामावली, ड्रिक पंचांग (हिंदी और अंग्रेज़ी पृष्ठ)
- भगवान शिव शतनाम-नामावली स्तोत्रम्, भक्ति भारत
- श्री शिव अष्टोत्तरशतनामावली, mahanyasam.com
- श्रीशिवाष्टोत्तरशतनाम, व्याख्याकार स्वामी स्वयंप्रकाशगिरि (श्री दक्षिणामूर्ति मठ प्रकाशन, वाराणसी, 1998), archive.org स्कैन के OCR से कुछ श्लोक
- शिवस्तोत्ररत्नाकर, गीता प्रेस, गोरखपुर (अलग शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र की पहचान के लिए, archive.org)
- अन्धकध्यातं शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, sanskritdocuments.org (अलग सूची की पहचान के लिए)
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