नामावलीशिव

श्री शिव अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 9 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. 1

    ॐ शिवाय नमः।

    कल्याणस्वरूप शिव को नमस्कार।

  2. 2

    ॐ महेश्वराय नमः।

    महान ईश्वर, महेश्वर को नमस्कार।

  3. 3

    ॐ शम्भवे नमः।

    सुख और कल्याण के स्रोत शम्भु को नमस्कार।

  4. 4

    ॐ पिनाकिने नमः।

    पिनाक नाम का धनुष धारण करने वाले को नमस्कार।

  5. 5

    ॐ शशिशेखराय नमः।

    मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले को नमस्कार।

  6. 6

    ॐ वामदेवाय नमः।

    सौम्य और सुंदर रूप वाले वामदेव (शिव के पाँच मुखों में से एक) को नमस्कार।

  7. 7

    ॐ विरूपाक्षाय नमः।

    असाधारण नेत्रों (तीन नेत्रों) वाले को नमस्कार।

  8. 8

    ॐ कपर्दिने नमः।

    जटाओं का जूड़ा (कपर्द) धारण करने वाले को नमस्कार।

  9. 9

    ॐ नीललोहिताय नमः।

    नीले और लाल वर्ण वाले नीललोहित को नमस्कार।

  10. 10

    ॐ शङ्कराय नमः।

    कल्याण करने वाले शंकर को नमस्कार।

  11. 11

    ॐ शूलपाणये नमः।

    हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले को नमस्कार।

  12. 12

    ॐ खट्वाङ्गिने नमः।

    खट्वांग (सिरे पर खोपड़ी लगा दंड) धारण करने वाले को नमस्कार।

  13. 13

    ॐ विष्णुवल्लभाय नमः।

    भगवान विष्णु के प्रिय को नमस्कार।

  14. 14

    ॐ शिपिविष्टाय नमः।

    किरणों से व्याप्त, तेजोमय शिपिविष्ट को नमस्कार।

  15. 15

    ॐ अम्बिकानाथाय नमः।

    अम्बिका (पार्वती) के स्वामी को नमस्कार।

  16. 16

    ॐ श्रीकण्ठाय नमः।

    विष के नीले चिह्न से शोभित सुंदर कंठ वाले को नमस्कार।

  17. 17

    ॐ भक्तवत्सलाय नमः।

    भक्तों पर माता-पिता जैसा स्नेह रखने वाले को नमस्कार।

  18. 18

    ॐ भवाय नमः।

    सबकी उत्पत्ति के स्रोत भव को नमस्कार।

  19. 19

    ॐ शर्वाय नमः।

    अंत में सबका संहार करने वाले शर्व को नमस्कार।

  20. 20

    ॐ त्रिलोकेशाय नमः।

    तीनों लोकों के स्वामी को नमस्कार।

  21. 21

    ॐ शितिकण्ठाय नमः।

    गहरे नीले कंठ वाले को नमस्कार।

  22. 22

    ॐ शिवाप्रियाय नमः।

    शिवा (पार्वती) के प्रिय को नमस्कार।

  23. 23

    ॐ उग्राय नमः।

    प्रचंड और तेजस्वी रूप वाले उग्र को नमस्कार।

  24. 24

    ॐ कपालिने नमः।

    हाथ में कपाल (खोपड़ी का पात्र) रखने वाले को नमस्कार।

  25. 25

    ॐ कामारये नमः।

    कामदेव को भस्म करने वाले, काम के शत्रु को नमस्कार।

  26. 26

    ॐ अन्धकासुरसूदनाय नमः।

    अंधक नाम के असुर का वध करने वाले को नमस्कार।

  27. 27

    ॐ गङ्गाधराय नमः।

    जटाओं में गंगा को धारण करने वाले को नमस्कार।

  28. 28

    ॐ ललाटाक्षाय नमः।

    माथे पर तीसरा नेत्र रखने वाले को नमस्कार।

  29. 29

    ॐ कालकालाय नमः।

    काल (मृत्यु) के भी काल को नमस्कार।

  30. 30

    ॐ कृपानिधये नमः।

    कृपा के भंडार को नमस्कार।

  31. 31

    ॐ भीमाय नमः।

    भय और विस्मय जगाने वाले भीम रूप को नमस्कार।

  32. 32

    ॐ परशुहस्ताय नमः।

    हाथ में परशु (फरसा) धारण करने वाले को नमस्कार।

  33. 33

    ॐ मृगपाणये नमः।

    हाथ में मृग (हिरन) धारण करने वाले को नमस्कार।

  34. 34

    ॐ जटाधराय नमः।

    सिर पर जटाएँ धारण करने वाले को नमस्कार।

  35. 35

    ॐ कैलासवासिने नमः।

    कैलास पर्वत पर निवास करने वाले को नमस्कार।

  36. 36

    ॐ कवचिने नमः।

    कवच धारण करने वाले को नमस्कार।

  37. 37

    ॐ कठोराय नमः।

    दृढ़ और अडिग रहने वाले कठोर को नमस्कार।

  38. 38

    ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः।

    त्रिपुर (असुरों के तीन नगरों) का अंत करने वाले को नमस्कार।

  39. 39

    ॐ वृषाङ्काय नमः।

    ध्वजा पर वृषभ (बैल) के चिह्न वाले को नमस्कार।

  40. 40

    ॐ वृषभारूढाय नमः।

    वृषभ (नंदी) पर सवार होने वाले को नमस्कार।

  41. 41

    ॐ भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः।

    पूरे शरीर पर भस्म रमाने वाले को नमस्कार।

  42. 42

    ॐ सामप्रियाय नमः।

    सामवेद के गान से प्रसन्न होने वाले को नमस्कार।

  43. 43

    ॐ स्वरमयाय नमः।

    स्वरों और नाद से बने स्वरूप वाले को नमस्कार।

  44. 44

    ॐ त्रयीमूर्तये नमः।

    तीनों वेदों (ऋक्, यजुः, साम) के मूर्त रूप को नमस्कार।

  45. 45

    ॐ अनीश्वराय नमः।

    जिनके ऊपर कोई स्वामी नहीं, ऐसे सर्वोच्च को नमस्कार।

  46. 46

    ॐ सर्वज्ञाय नमः।

    सब कुछ जानने वाले को नमस्कार।

  47. 47

    ॐ परमात्मने नमः।

    सबकी परम आत्मा, परमात्मा को नमस्कार।

  48. 48

    ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः।

    चंद्रमा, सूर्य और अग्नि रूपी तीन नेत्रों वाले को नमस्कार।

  49. 49

    ॐ हविषे नमः।

    यज्ञ में दी जाने वाली आहुति (हवि) के स्वरूप को नमस्कार।

  50. 50

    ॐ यज्ञमयाय नमः।

    यज्ञ-स्वरूप को नमस्कार।

  51. 51

    ॐ सोमाय नमः।

    सोम (चंद्रमा) स्वरूप, या उमा के साथ रहने वाले को नमस्कार।

  52. 52

    ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।

    पाँच मुखों वाले को नमस्कार।

  53. 53

    ॐ सदाशिवाय नमः।

    सदा कल्याणमय रहने वाले सदाशिव को नमस्कार।

  54. 54

    ॐ विश्वेश्वराय नमः।

    पूरे विश्व के स्वामी को नमस्कार।

  55. 55

    ॐ वीरभद्राय नमः।

    वीर और मंगलकारी वीरभद्र रूप को नमस्कार।

  56. 56

    ॐ गणनाथाय नमः।

    शिवगणों (शिव के सेवकों) के स्वामी को नमस्कार।

  57. 57

    ॐ प्रजापतये नमः।

    सभी प्राणियों के स्वामी प्रजापति को नमस्कार।

  58. 58

    ॐ हिरण्यरेतसे नमः।

    स्वर्ण जैसे तेजस्वी बीज वाले हिरण्यरेता को नमस्कार।

  59. 59

    ॐ दुर्धर्षाय नमः।

    जिन्हें कोई दबा या हरा न सके, उन अजेय को नमस्कार।

  60. 60

    ॐ गिरीशाय नमः।

    पर्वतों के स्वामी गिरीश को नमस्कार।

  61. 61

    ॐ गिरिशाय नमः।

    पर्वत (कैलास) पर निवास करने वाले गिरिश को नमस्कार।

  62. 62

    ॐ अनघाय नमः।

    पाप और दोष से रहित को नमस्कार।

  63. 63

    ॐ भुजङ्गभूषणाय नमः।

    सर्पों को आभूषण बनाकर पहनने वाले को नमस्कार।

  64. 64

    ॐ भर्गाय नमः।

    प्रकाश-स्वरूप, तेजस्वी भर्ग को नमस्कार।

  65. 65

    ॐ गिरिधन्वने नमः।

    पर्वत (परंपरा के अनुसार मेरु) को धनुष बनाने वाले को नमस्कार।

  66. 66

    ॐ गिरिप्रियाय नमः।

    पर्वतों से प्रेम करने वाले को नमस्कार।

  67. 67

    ॐ कृत्तिवाससे नमः।

    पशु की खाल (चर्म) को वस्त्र बनाकर पहनने वाले को नमस्कार।

  68. 68

    ॐ पुरारातये नमः।

    त्रिपुर नाम के असुर-नगरों के शत्रु को नमस्कार।

  69. 69

    ॐ भगवते नमः।

    ऐश्वर्य, ज्ञान आदि सभी दिव्य गुणों से संपन्न भगवान को नमस्कार।

  70. 70

    ॐ प्रमथाधिपाय नमः।

    प्रमथ गणों (शिव के अनुचरों) के स्वामी को नमस्कार।

  71. 71

    ॐ मृत्युञ्जयाय नमः।

    मृत्यु पर विजय पाने वाले को नमस्कार।

  72. 72

    ॐ सूक्ष्मतनवे नमः।

    इंद्रियों की पकड़ से परे, सूक्ष्म शरीर वाले को नमस्कार।

  73. 73

    ॐ जगद्व्यापिने नमः।

    पूरे जगत में व्याप्त रहने वाले को नमस्कार।

  74. 74

    ॐ जगद्गुरवे नमः।

    संपूर्ण जगत के गुरु को नमस्कार।

  75. 75

    ॐ व्योमकेशाय नमः।

    आकाश-रूपी केशों वाले को नमस्कार।

  76. 76

    ॐ महासेनजनकाय नमः।

    महासेन (कार्तिकेय) के पिता को नमस्कार।

  77. 77

    ॐ चारुविक्रमाय नमः।

    सुंदर और श्रेष्ठ पराक्रम वाले को नमस्कार।

  78. 78

    ॐ रुद्राय नमः।

    दुःख को दूर भगाने वाले रुद्र को नमस्कार।

  79. 79

    ॐ भूतपतये नमः।

    सभी प्राणियों और भूतगणों के स्वामी को नमस्कार।

  80. 80

    ॐ स्थाणवे नमः।

    स्तंभ की तरह स्थिर और अचल रहने वाले को नमस्कार।

  81. 81

    ॐ अहिर्बुध्न्याय नमः।

    ग्यारह रुद्रों में गिने जाने वाले अहिर्बुध्न्य (गहराई के नाग) को नमस्कार।

  82. 82

    ॐ दिगम्बराय नमः।

    दिशाओं को ही वस्त्र मानने वाले दिगंबर को नमस्कार।

  83. 83

    ॐ अष्टमूर्तये नमः।

    पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, सूर्य, चंद्रमा और यजमान, इन आठ रूपों वाले को नमस्कार।

  84. 84

    ॐ अनेकात्मने नमः।

    अनेक रूपों में एक ही आत्मा के रूप में स्थित को नमस्कार।

  85. 85

    ॐ सात्त्विकाय नमः।

    शुद्ध सत्त्व गुण से युक्त, शांत और निर्मल को नमस्कार।

  86. 86

    ॐ शुद्धविग्रहाय नमः।

    निर्मल और शुद्ध स्वरूप वाले को नमस्कार।

  87. 87

    ॐ शाश्वताय नमः।

    सदा रहने वाले, शाश्वत को नमस्कार।

  88. 88

    ॐ खण्डपरशवे नमः।

    खंडन करने वाला परशु (फरसा) धारण करने वाले को नमस्कार।

  89. 89

    ॐ अजाय नमः।

    जिनका जन्म नहीं होता, उन अजन्मा को नमस्कार।

  90. 90

    ॐ पाशविमोचकाय नमः।

    जीवों को बंधनों (पाशों) से छुड़ाने वाले को नमस्कार।

  91. 91

    ॐ मृडाय नमः।

    सुख देने वाले, दयालु मृड को नमस्कार।

  92. 92

    ॐ पशुपतये नमः।

    सभी जीवों (पशुओं) के स्वामी पशुपति को नमस्कार।

  93. 93

    ॐ देवाय नमः।

    प्रकाशमान देव को नमस्कार।

  94. 94

    ॐ महादेवाय नमः।

    देवों के भी देव, महादेव को नमस्कार।

  95. 95

    ॐ अव्ययाय नमः।

    कभी क्षीण या नष्ट न होने वाले को नमस्कार।

  96. 96

    ॐ हरये नमः।

    पाप और दुःख हरने वाले हरि (यह विष्णु का भी नाम है) को नमस्कार।

  97. 97

    ॐ पूषदन्तभिदे नमः।

    दक्ष के यज्ञ में पूषा देवता के दाँत तोड़ने वाले को नमस्कार।

  98. 98

    ॐ अव्यग्राय नमः।

    सदा शांत और अविचलित रहने वाले को नमस्कार।

  99. 99

    ॐ दक्षाध्वरहराय नमः।

    दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस करने वाले को नमस्कार।

  100. 100

    ॐ हराय नमः।

    पाप, बंधन और संसार के दुःख को हरने वाले हर को नमस्कार।

  101. 101

    ॐ भगनेत्रभिदे नमः।

    दक्ष के यज्ञ में भग देवता के नेत्र नष्ट करने वाले को नमस्कार।

  102. 102

    ॐ अव्यक्ताय नमः।

    इंद्रियों से न जाने जा सकने वाले, अव्यक्त को नमस्कार।

  103. 103

    ॐ सहस्राक्षाय नमः।

    हज़ारों (अनगिनत) नेत्रों वाले को नमस्कार।

  104. 104

    ॐ सहस्रपदे नमः।

    हज़ारों (अनगिनत) चरणों वाले को नमस्कार।

  105. 105

    ॐ अपवर्गप्रदाय नमः।

    अपवर्ग (मोक्ष) देने वाले को नमस्कार।

  106. 106

    ॐ अनन्ताय नमः।

    जिनका कोई अंत नहीं, उन अनंत को नमस्कार।

  107. 107

    ॐ तारकाय नमः।

    संसार-सागर से पार उतारने वाले तारक को नमस्कार।

  108. 108

    ॐ परमेश्वराय नमः।

    सर्वोच्च ईश्वर, परमेश्वर को नमस्कार।

श्री शिव अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम PDF डाउनलोड करें

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/shiv-108-naam/

संक्षेप में

यह भगवान शिव के 108 नामों की नामावली है; हर नाम “ॐ … नमः” के रूप में बोला जाता है। यह प्रचलित शिव अष्टोत्तर शतनामावली “शिवो महेश्वरः शम्भुः…” से शुरू होने वाले शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र से बनी है, जिसे स्तोत्र की पुष्पिका शिवरहस्य का अंश बताती है। परंपरा में अर्चना में हर नाम पर बिल्वपत्र, फूल या अक्षत चढ़ाते हैं, और सोमवार, सावन व महाशिवरात्रि पर इसका विशेष पाठ होता है।

यह सूची शिवाष्टोत्तरशतनामावली (शिव अष्टोत्तर शतनामावली) कहलाती है। इसका पद्य रूप शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र है, जिसके 13 श्लोकों में यही 108 नाम इसी क्रम में आते हैं। sanskritdocuments.org पर स्तोत्र की पुष्पिका इसे शिवरहस्य के अंतर्गत विष्णु द्वारा कहा गया बताती है, और वहीं नामावली की पुष्पिका इसे गौरी-नारायण संवाद कहती है; ड्रिक पंचांग का अंग्रेज़ी पृष्ठ अंत में शाक्तप्रमोद का नाम देता है। इसी शीर्षक से दूसरी सूचियाँ भी छपती हैं: गीता प्रेस के ‘शिवस्तोत्ररत्नाकर’ का शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र “जय …” वाले संबोधनों में है, और शिवपुराण (रुद्रसंहिता, युद्धखंड) में अंधक की स्तुति वाला 108 नामों का स्तोत्र “महादेवो विरूपाक्षः चन्द्रार्द्धकृतशेखरः” से शुरू होता है। स्रोतों के अंतर: नाम 11 कुछ स्रोतों में ‘शूलपाणिने’ है; नाम 20 sanskritdocuments की नामावली में ‘त्रिलोकीशाय’; नाम 65 ड्रिक पंचांग में ‘गिरिधन्विने’; नाम 90 sanskritdocuments की नामावली और स्वामी स्वयंप्रकाशगिरि की व्याख्या में ‘पाशविमोचनाय’। इन सबका अर्थ वही रहता है। नाम 60 गिरीशाय और 61 गिरिशाय अलग नाम हैं, दोहराव नहीं; 96 हरये और 100 हराय भी अलग हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिव के 108 नामों की यह सूची कहाँ से ली गई है?

यह शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र के 108 नामों की नामावली है। sanskritdocuments.org पर छपे स्तोत्र की पुष्पिका इसे शिवरहस्य का अंश बताती है, जिसमें ये नाम विष्णु कहते हैं। ड्रिक पंचांग का अंग्रेज़ी पृष्ठ इसे शाक्तप्रमोद से बताता है।

इस नामावली से अर्चना कैसे की जाती है?

परंपरा में हर नाम के साथ “ॐ … नमः” बोलकर शिवलिंग या शिव के चित्र पर एक बिल्वपत्र, फूल या अक्षत चढ़ाया जाता है। स्तोत्र की फलश्रुति में भी बिल्वपत्र, फूल, तिल और अक्षत आदि से पूजन का उल्लेख है। विधि के बारे में अपने पुरोहित या परिवार की परंपरा से पूछ लें।

नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?

स्तोत्र में यही 108 नाम 13 श्लोकों में पद्य के रूप में आते हैं, जैसे “शिवो महेश्वरः शम्भुः पिनाकी शशिशेखरः”। नामावली में हर नाम अलग करके “ॐ शिवाय नमः” की तरह चतुर्थी विभक्ति में बोला जाता है, ताकि हर नाम पर अर्पण किया जा सके।

अलग-अलग किताबों और वेबसाइटों में कुछ नाम अलग क्यों दिखते हैं?

प्रतियों में छोटे व्याकरण और वर्तनी के अंतर आ गए हैं, जैसे ‘शूलपाणये’ और ‘शूलपाणिने’, या ‘पाशविमोचकाय’ और ‘पाशविमोचनाय’; इनका अर्थ एक ही है। इसके अलावा शिव के 108 नामों की कुछ बिल्कुल अलग सूचियाँ भी इसी शीर्षक से छपती हैं।

इसका पाठ कब किया जाता है?

परंपरा में इसका पाठ रोज़ की शिव पूजा में किया जाता है, और सोमवार, सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से।

स्रोत

  1. श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामावलिः, sanskritdocuments.org (Varun Mandawara, PSA Easwaran और Ruma Dewan द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ; पुष्पिका: शिवरहस्य, गौरी-नारायण संवाद)
  2. श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, sanskritdocuments.org (Sunder Hattangadi, PSA Easwaran आदि द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ; पुष्पिका: शिवरहस्य, विष्णु द्वारा कहा गया)
  3. शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, प्रथम भाग (सं. रामस्वामी शास्त्री, वाविल्ला मुद्रणालय, मद्रास, 1953), संस्कृत विकिस्रोत पर प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ
  4. भगवान शिव की अष्टोत्तर शतनामावली, ड्रिक पंचांग (हिंदी और अंग्रेज़ी पृष्ठ)
  5. भगवान शिव शतनाम-नामावली स्तोत्रम्, भक्ति भारत
  6. श्री शिव अष्टोत्तरशतनामावली, mahanyasam.com
  7. श्रीशिवाष्टोत्तरशतनाम, व्याख्याकार स्वामी स्वयंप्रकाशगिरि (श्री दक्षिणामूर्ति मठ प्रकाशन, वाराणसी, 1998), archive.org स्कैन के OCR से कुछ श्लोक
  8. शिवस्तोत्ररत्नाकर, गीता प्रेस, गोरखपुर (अलग शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र की पहचान के लिए, archive.org)
  9. अन्धकध्यातं शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, sanskritdocuments.org (अलग सूची की पहचान के लिए)

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पाठ का मिलान: sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, sa.wikisource.org, drikpanchang.com, drikpanchang.com, bhaktibharat.com, mahanyasam.com, archive.org, archive.org, sanskritdocuments.org