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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/om-namo-bhagavate-vasudevaya/
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” भगवान विष्णु का बारह अक्षरों वाला मंत्र है, इसलिए इसे द्वादशाक्षर मंत्र कहते हैं। भागवत पुराण (4.8.54) में देवर्षि नारद यह मंत्र बालक ध्रुव को देते हैं और इसी मंत्र से भगवान की पूजा करने को कहते हैं। वैष्णव परंपरा में इसका जप एकादशी पर, जन्माष्टमी पर और विष्णु तथा श्रीकृष्ण की पूजा में होता है।
स्रोत के बारे में: भागवत पुराण के चौथे स्कंध के आठवें अध्याय में नारद ध्रुव से कहते हैं कि अब परम गोपनीय जप सुनो (4.8.53)। अगले श्लोक (4.8.54) के आरंभ में यह मंत्र आता है, और उसके बाद कहा गया है कि इसी मंत्र से देश और काल के अनुसार विविध सामग्री से भगवान की पूजा करनी चाहिए। बारह अक्षर इस तरह गिने जाते हैं: ॐ, न, मो, भ, ग, व, ते, वा, सु, दे, वा, य। कुछ लोग अंत में ‘नमः’ जोड़कर भी बोलते हैं, पर भागवत का पाठ ऊपर दिए अनुसार है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह मंत्र किस ग्रंथ में है?
भागवत पुराण 4.8.54 में। वहाँ देवर्षि नारद बालक ध्रुव को यह मंत्र देते हैं और इससे भगवान की पूजा करने को कहते हैं।
इसे द्वादशाक्षर मंत्र क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसमें बारह अक्षर हैं: ॐ, न, मो, भ, ग, व, ते, वा, सु, दे, वा, य।
वासुदेव कौन हैं?
‘वासुदेव’ भगवान विष्णु का नाम है। वसुदेव के पुत्र होने से श्रीकृष्ण भी वासुदेव कहलाते हैं, और वे विष्णु के अवतार माने जाते हैं। इसलिए यह मंत्र विष्णु और कृष्ण दोनों की उपासना में जपा जाता है।
इसका जप कब किया जाता है?
परंपरा में एकादशी पर, जन्माष्टमी पर और विष्णु या श्रीकृष्ण की पूजा में। कई लोग तुलसी की माला पर 108 बार जप करते हैं; यह संख्या परंपरा की है।
स्रोत
- भागवत पुराण 4.8.53–54 (GRETIL का पाठ)
- श्रीमद्भागवतम् 4.8.54 (भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट का पाठ, vedabase.io)
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पाठ का मिलान: gretil.sub.uni-goettingen.de, vedabase.io
