नामावलीविष्णु

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 8 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. 1

    ॐ विष्णवे नमः।

    सब जगह व्याप्त रहने वाले भगवान विष्णु को नमस्कार।

  2. 2

    ॐ जिष्णवे नमः।

    सदा विजय पाने वाले (जिष्णु) को नमस्कार।

  3. 3

    ॐ वषट्काराय नमः।

    यज्ञ में आहुति देते समय बोले जाने वाले ‘वषट्’ के स्वरूप को नमस्कार।

  4. 4

    ॐ देवदेवाय नमः।

    देवताओं के भी देव को नमस्कार।

  5. 5

    ॐ वृषाकपये नमः।

    परंपरागत व्याख्या में धर्म (वृष) और वराह (कपि) रूप वृषाकपि को नमस्कार।

  6. 6

    ॐ दामोदराय नमः।

    जिनकी कमर (उदर) में माता यशोदा ने रस्सी (दाम) बाँधी, उन श्रीकृष्ण को नमस्कार।

  7. 7

    ॐ दीनबन्धवे नमः।

    दीन-दुखियों के बंधु (सहायक) को नमस्कार।

  8. 8

    ॐ आदिदेवाय नमः।

    सबसे पहले (आदि) देव को नमस्कार।

  9. 9

    ॐ अदितेः सुताय नमः।

    अदिति के पुत्र (वामन रूप में उनसे जन्मे भगवान) को नमस्कार।

  10. 10

    ॐ पुण्डरीकाय नमः।

    श्वेत कमल (पुण्डरीक) के समान निर्मल भगवान को नमस्कार।

  11. 11

    ॐ परानन्दाय नमः।

    परम आनंद के स्वरूप को नमस्कार।

  12. 12

    ॐ परमात्मने नमः।

    सबके भीतर स्थित परम आत्मा को नमस्कार।

  13. 13

    ॐ परात्पराय नमः।

    श्रेष्ठ से भी श्रेष्ठ (परात्पर) को नमस्कार।

  14. 14

    ॐ परशुधारिणे नमः।

    परशु (फरसा) धारण करने वाले, परशुराम रूप को नमस्कार।

  15. 15

    ॐ विश्वात्मने नमः।

    पूरे विश्व की आत्मा को नमस्कार।

  16. 16

    ॐ कृष्णाय नमः।

    साँवले (श्याम) वर्ण वाले श्रीकृष्ण को नमस्कार।

  17. 17

    ॐ कलिमलापहाय नमः।

    कलियुग के मल (दोषों) को दूर करने वाले को नमस्कार।

  18. 18

    ॐ कौस्तुभोद्भासितोरस्काय नमः।

    कौस्तुभ मणि से चमकते वक्षःस्थल (छाती) वाले को नमस्कार।

  19. 19

    ॐ नराय नमः।

    नर-नारायण ऋषियों की जोड़ी में नर रूप को नमस्कार।

  20. 20

    ॐ नारायणाय नमः।

    जल (नार) में निवास करने वाले, सब जीवों के आश्रय नारायण को नमस्कार।

  21. 21

    ॐ हरये नमः।

    पाप और दुःख हर लेने वाले हरि को नमस्कार।

  22. 22

    ॐ हराय नमः।

    अंत में सब कुछ अपने में समेट लेने (हर लेने) वाले हर को नमस्कार।

  23. 23

    ॐ हरप्रियाय नमः।

    हर (भगवान शिव) के प्रिय को नमस्कार।

  24. 24

    ॐ स्वामिने नमः।

    सबके स्वामी (मालिक) को नमस्कार।

  25. 25

    ॐ वैकुण्ठाय नमः।

    वैकुण्ठ धाम के स्वामी, वैकुण्ठ नाम वाले भगवान को नमस्कार।

  26. 26

    ॐ विश्वतोमुखाय नमः।

    सब ओर मुख वाले, सब कुछ देखने वाले को नमस्कार।

  27. 27

    ॐ हृषीकेशाय नमः।

    इंद्रियों (हृषीक) के स्वामी को नमस्कार।

  28. 28

    ॐ अप्रमेयात्मने नमः।

    जिनके स्वरूप को मापा या पूरा जाना नहीं जा सकता, उन अप्रमेयात्मा को नमस्कार।

  29. 29

    ॐ वराहाय नमः।

    पृथ्वी को जल से उबारने वाले वराह अवतार को नमस्कार।

  30. 30

    ॐ धरणीधराय नमः।

    धरणी (पृथ्वी) को धारण करने वाले को नमस्कार।

  31. 31

    ॐ वामनाय नमः।

    तीन पग में तीनों लोक नापने वाले वामन अवतार को नमस्कार।

  32. 32

    ॐ वेदवक्त्रे नमः।

    वेदों का उपदेश करने वाले (वेदवक्ता) को नमस्कार।

  33. 33

    ॐ वासुदेवाय नमः।

    वसुदेव के पुत्र, सबमें बसने वाले वासुदेव को नमस्कार।

  34. 34

    ॐ सनातनाय नमः।

    सदा से विद्यमान, शाश्वत (सनातन) को नमस्कार।

  35. 35

    ॐ रामाय नमः।

    सबको आनंद देने वाले श्रीराम को नमस्कार।

  36. 36

    ॐ विरामाय नमः।

    जिनमें सब प्राणी अंत में विश्राम पाते हैं, उन विराम को नमस्कार।

  37. 37

    ॐ विरजाय नमः।

    रज (मल और रजोगुण) से रहित, निर्मल को नमस्कार।

  38. 38

    ॐ रावणारये नमः।

    रावण के शत्रु, श्रीराम को नमस्कार।

  39. 39

    ॐ रमापतये नमः।

    रमा (लक्ष्मी) के पति को नमस्कार।

  40. 40

    ॐ वैकुण्ठवासिने नमः।

    वैकुण्ठ धाम में निवास करने वाले को नमस्कार।

  41. 41

    ॐ वसुमते नमः।

    वसु (धन और ऐश्वर्य) से संपन्न को नमस्कार।

  42. 42

    ॐ धनदाय नमः।

    भक्तों को धन देने वाले को नमस्कार।

  43. 43

    ॐ धरणीधराय नमः।

    पृथ्वी का भार उठाने वाले धरणीधर को नमस्कार।

  44. 44

    ॐ धर्मेशाय नमः।

    धर्म के स्वामी को नमस्कार।

  45. 45

    ॐ धरणीनाथाय नमः।

    धरणी (पृथ्वी) के स्वामी को नमस्कार।

  46. 46

    ॐ ध्येयाय नमः।

    जिनका ध्यान करना चाहिए, उन ध्येय को नमस्कार।

  47. 47

    ॐ धर्मभृतां वराय नमः।

    धर्म धारण करने वालों में श्रेष्ठ को नमस्कार।

  48. 48

    ॐ सहस्रशीर्षाय नमः।

    पुरुष सूक्त में वर्णित हज़ारों सिरों वाले विराट पुरुष को नमस्कार।

  49. 49

    ॐ पुरुषाय नमः।

    परम पुरुष (विराट पुरुष) को नमस्कार।

  50. 50

    ॐ सहस्राक्षाय नमः।

    हज़ारों नेत्रों वाले को नमस्कार।

  51. 51

    ॐ सहस्रपादे नमः।

    हज़ारों पैरों वाले को नमस्कार।

  52. 52

    ॐ सर्वगाय नमः।

    सब जगह पहुँचे हुए, सर्वव्यापी को नमस्कार।

  53. 53

    ॐ सर्वविदे नमः।

    सब कुछ जानने वाले को नमस्कार।

  54. 54

    ॐ सर्वाय नमः।

    जो स्वयं सब कुछ हैं, उन सर्व को नमस्कार।

  55. 55

    ॐ शरण्याय नमः।

    शरण देने वाले, सबके आश्रय को नमस्कार।

  56. 56

    ॐ साधुवल्लभाय नमः।

    साधुओं (सज्जनों) के प्रिय को नमस्कार।

  57. 57

    ॐ कौसल्यानन्दनाय नमः।

    माता कौसल्या के पुत्र श्रीराम को नमस्कार।

  58. 58

    ॐ श्रीमते नमः।

    श्री (शोभा और लक्ष्मी) से युक्त को नमस्कार।

  59. 59

    ॐ रक्षःकुलविनाशकाय नमः।

    राक्षसों के कुल का नाश करने वाले को नमस्कार।

  60. 60

    ॐ जगत्कर्त्रे नमः।

    जगत की रचना करने वाले को नमस्कार।

  61. 61

    ॐ जगद्धर्त्रे नमः।

    जगत को धारण करने (सँभालने) वाले को नमस्कार।

  62. 62

    ॐ जगज्जेत्रे नमः।

    पूरे जगत को जीतने वाले को नमस्कार।

  63. 63

    ॐ जनार्तिघ्ने नमः।

    लोगों की पीड़ा (आर्ति) मिटाने वाले को नमस्कार।

  64. 64

    ॐ जानकीवल्लभाय नमः।

    जानकी (सीता) के प्रिय पति को नमस्कार।

  65. 65

    ॐ देवाय नमः।

    प्रकाशमान देव, भगवान को नमस्कार।

  66. 66

    ॐ जयरूपाय नमः।

    विजय के स्वरूप को नमस्कार।

  67. 67

    ॐ जलेश्वराय नमः।

    जल के स्वामी को नमस्कार।

  68. 68

    ॐ क्षीराब्धिवासिने नमः।

    क्षीरसागर (दूध के सागर) में निवास करने वाले को नमस्कार।

  69. 69

    ॐ क्षीराब्धितनयावल्लभाय नमः।

    क्षीरसागर की पुत्री लक्ष्मी के प्रिय पति को नमस्कार।

  70. 70

    ॐ शेषशायिने नमः।

    शेषनाग की शय्या पर शयन करने वाले को नमस्कार।

  71. 71

    ॐ पन्नगारिवाहनाय नमः।

    सर्पों के शत्रु गरुड़ पर सवारी करने वाले को नमस्कार।

  72. 72

    ॐ विष्टरश्रवसे नमः।

    शब्दार्थ के अनुसार दूर तक फैले यश (या विस्तृत कानों) वाले विष्टरश्रवा को नमस्कार।

  73. 73

    ॐ माधवाय नमः।

    मा (लक्ष्मी) के पति माधव को नमस्कार।

  74. 74

    ॐ मथुरानाथाय नमः।

    मथुरा के स्वामी श्रीकृष्ण को नमस्कार।

  75. 75

    ॐ मोहदाय नमः।

    अपनी माया से मोह उत्पन्न करने वाले को नमस्कार।

  76. 76

    ॐ मोहनाशनाय नमः।

    मोह (भ्रम) का नाश करने वाले को नमस्कार।

  77. 77

    ॐ दैत्यारये नमः।

    दैत्यों के शत्रु को नमस्कार।

  78. 78

    ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः।

    कमल जैसे नेत्रों वाले को नमस्कार।

  79. 79

    ॐ अच्युताय नमः।

    जो अपने स्वरूप से कभी नहीं गिरते, उन अच्युत को नमस्कार।

  80. 80

    ॐ मधुसूदनाय नमः।

    मधु नामक दैत्य का वध करने वाले को नमस्कार।

  81. 81

    ॐ सोमसूर्याग्निनयनाय नमः।

    चंद्रमा, सूर्य और अग्नि रूपी नेत्रों वाले को नमस्कार।

  82. 82

    ॐ नृसिंहाय नमः।

    प्रह्लाद की रक्षा करने वाले नृसिंह (नरसिंह) अवतार को नमस्कार।

  83. 83

    ॐ भक्तवत्सलाय नमः।

    भक्तों पर माता जैसा स्नेह रखने वाले को नमस्कार।

  84. 84

    ॐ नित्याय नमः।

    कभी नष्ट न होने वाले, नित्य भगवान को नमस्कार।

  85. 85

    ॐ निरामयाय नमः।

    हर रोग और दोष से रहित को नमस्कार।

  86. 86

    ॐ शुद्धाय नमः।

    पूर्ण रूप से शुद्ध (निर्मल) को नमस्कार।

  87. 87

    ॐ नरदेवाय नमः।

    मनुष्यों में देव, अर्थात राजा रूप को नमस्कार।

  88. 88

    ॐ जगत्प्रभवे नमः।

    जगत के प्रभु (स्वामी) को नमस्कार।

  89. 89

    ॐ हयग्रीवाय नमः।

    घोड़े जैसी ग्रीवा (गर्दन) वाले हयग्रीव अवतार को नमस्कार।

  90. 90

    ॐ जितरिपवे नमः।

    सब शत्रुओं को जीत लेने वाले को नमस्कार।

  91. 91

    ॐ उपेन्द्राय नमः।

    इंद्र के छोटे भाई (वामन रूप) उपेन्द्र को नमस्कार।

  92. 92

    ॐ रुक्मिणीपतये नमः।

    रुक्मिणी के पति श्रीकृष्ण को नमस्कार।

  93. 93

    ॐ सर्वदेवमयाय नमः।

    जिनमें सभी देवता समाए हैं, उन सर्वदेवमय को नमस्कार।

  94. 94

    ॐ श्रीशाय नमः।

    श्री (लक्ष्मी) के स्वामी को नमस्कार।

  95. 95

    ॐ सर्वाधाराय नमः।

    सबके आधार (सहारे) को नमस्कार।

  96. 96

    ॐ सनातनाय नमः।

    आदि और अंत से परे, सनातन भगवान को नमस्कार।

  97. 97

    ॐ सौम्याय नमः।

    शांत और कोमल स्वभाव वाले, सौम्य को नमस्कार।

  98. 98

    ॐ सौम्यप्रदाय नमः।

    शांति और शुभता (सौम्यता) देने वाले को नमस्कार।

  99. 99

    ॐ स्रष्ट्रे नमः।

    सृष्टि की रचना करने वाले स्रष्टा को नमस्कार।

  100. 100

    ॐ विष्वक्सेनाय नमः।

    सब दिशाओं में फैली सेना वाले विष्वक्सेन को नमस्कार।

  101. 101

    ॐ जनार्दनाय नमः।

    दुष्टों को दंड देने वाले और लोगों की प्रार्थना के आश्रय जनार्दन को नमस्कार।

  102. 102

    ॐ यशोदातनयाय नमः।

    माता यशोदा के पुत्र श्रीकृष्ण को नमस्कार।

  103. 103

    ॐ योगिने नमः।

    योग में स्थित, स्वयं महान योगी को नमस्कार।

  104. 104

    ॐ योगशास्त्रपरायणाय नमः।

    योग-शास्त्र में पूरी निष्ठा रखने वाले को नमस्कार।

  105. 105

    ॐ रुद्रात्मकाय नमः।

    रुद्र (शिव) जिनका स्वरूप है, उन रुद्रात्मक को नमस्कार।

  106. 106

    ॐ रुद्रमूर्तये नमः।

    रुद्र का रूप धारण करने वाले को नमस्कार।

  107. 107

    ॐ राघवाय नमः।

    रघुकुल में जन्मे श्रीराम (राघव) को नमस्कार।

  108. 108

    ॐ मधुसूदनाय नमः।

    मधु दैत्य को मारने वाले मधुसूदन को नमस्कार।

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम PDF डाउनलोड करें

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/vishnu-108-naam/

संक्षेप में

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली भगवान विष्णु के 108 नामों की सूची है, जिसमें हर नाम ‘ॐ … नमः’ के रूप में बोला जाता है। ये नाम उसी क्रम में ‘विष्णुर्जिष्णुर्वषट्कारो देवदेवो वृषाकपिः’ से शुरू होने वाले विष्णु अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र में आते हैं। परंपरा में विष्णु-पूजा में हर नाम पर एक तुलसी दल, फूल या अक्षत चढ़ाया जाता है। एकादशी, गुरुवार और सत्यनारायण पूजा पर इसका पाठ प्रचलित है।

यह वह नामावली है जो ‘ॐ विष्णवे नमः, ॐ जिष्णवे नमः, ॐ वषट्काराय नमः’ से शुरू होती है; इसके 108 नाम उसी क्रम में ‘विष्णुर्जिष्णुर्वषट्कारो देवदेवो वृषाकपिः’ से शुरू होने वाले स्तोत्र में हैं। इसी शीर्षक से एक अलग सूची भी खूब छपती है, जो ‘ॐ विष्णवे नमः, ॐ लक्ष्मीपतये नमः, ॐ कृष्णाय नमः, ॐ वैकुण्ठाय नमः, ॐ गरुडध्वजाय नमः’ से शुरू होती है; द्रिक पंचांग वही सूची देता है। इस सूची के पाठभेद: नाम 9 कई स्रोतों में ‘अदितेस्तुताय’ (अदिति द्वारा स्तुत) है, जबकि छपे स्तोत्र में ‘अदितेः सुतः’ है। नाम 75 ‘मोहदाय’ की जगह कई नामावलियों में ‘मुकुन्दाय’ है, पर स्तोत्र में ‘मोहदो’ है। नाम 17 कुछ स्रोतों में ‘कलिमलापहारिणे’ है। एक स्रोत में नाम 37 ‘विरताय’ और 98 ‘सौख्यप्रदाय’ है, 54-55 को एक नाम ‘सर्वशरण्याय’ और 81 को दो नाम (‘सोमाय’, ‘सूर्याग्निनयनाय’) गिना गया है। कुछ संस्करणों में नाम 31 से 43 (वामनाय से दूसरे धरणीधराय तक) नहीं हैं, नाम 28 को दो नाम (‘अप्रमेयाय’, ‘आत्मने’) गिना गया है, और अंत में स्तोत्र के समापन श्लोकों के शब्द (अतुलतेजसे, दिव्याय, सर्वपापहराय आदि) जोड़कर गिनती 108 की गई है। धरणीधराय (30 और 43), सनातनाय (34 और 96) और मधुसूदनाय (80 और 108) स्तोत्र में ही दो-दो बार आते हैं, इसलिए यहाँ भी दोहराए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली में कितने नाम हैं और यह कहाँ से ली गई है?

इसमें भगवान विष्णु के 108 नाम हैं। ये उसी क्रम में ‘विष्णुर्जिष्णुर्वषट्कारो…’ से शुरू होने वाले विष्णु अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र में आते हैं, जो ‘शाक्तप्रमोद’ नामक स्तोत्र-संग्रह में छपा है। जाँचे गए स्रोतों में इसका मूल कोई पुराण या तंत्र नहीं बताया गया है।

नामावली से विष्णु की अर्चना कैसे की जाती है?

परंपरा में भगवान विष्णु की प्रतिमा या शालग्राम के सामने हर नाम ‘ॐ … नमः’ कहकर बोला जाता है और हर नाम पर एक तुलसी दल, फूल या थोड़े अक्षत चढ़ाए जाते हैं। इस तरह 108 अर्पण पूरे होते हैं।

नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?

स्तोत्र में यही नाम श्लोकों में पिरोए गए हैं और उसका पाठ किया जाता है। नामावली में हर नाम अलग से ‘ॐ … नमः’ के साथ बोला जाता है, ताकि हर नाम पर अर्पण किया जा सके।

अलग-अलग पुस्तकों में विष्णु के 108 नाम अलग क्यों मिलते हैं?

एक ही शीर्षक से कई अलग सूचियाँ छपती हैं, जैसे ‘ॐ विष्णवे नमः, ॐ लक्ष्मीपतये नमः’ से शुरू होने वाली सूची, जो द्रिक पंचांग पर है। इस सूची में भी कुछ शब्दों के पाठभेद हैं, जो इस पेज की टिप्पणी में दिए गए हैं।

यह नामावली कब पढ़ी जाती है?

परंपरा में इसे रोज़ की विष्णु-पूजा में पढ़ा जाता है, और विशेष रूप से एकादशी, गुरुवार और सत्यनारायण पूजा पर।

स्रोत

  1. विष्णोरष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (श्लोक-रूप): शाक्तप्रमोद (राजा देवनन्दन सिंह बहादुर), खेमराज श्रीकृष्णदास का छपा संस्करण, archive.org स्कैन
  2. विष्णोरष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, sanskritdocuments.org (PSA Easwaran द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ; पुष्पिका: ‘इति शाक्तप्रमोदतः …’)
  3. विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली, vedadhara.com (रामस्वामी शास्त्री, विघ्नेश घनपाठी)
  4. विष्णु भगवान के 108 नाम, hindunidhi.com
  5. श्रीविष्ण्वष्टोत्तरशतनामावलिः, sanskritdocuments.org (Chandrasekhar Karumuri द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया; पाठभेदों के लिए)
  6. Sri Vishnu Ashtottara Shatanamavali, hariome.com (पाठभेदों के लिए)
  7. दूसरी सूची (ॐ विष्णवे, ॐ लक्ष्मीपतये …): द्रिक पंचांग
  8. सहस्रशीर्षा पुरुषः: पुरुष सूक्त, ऋग्वेद 10.90

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पाठ का मिलान: archive.org, sanskritdocuments.org, vedadhara.com, hindunidhi.com, searchfordivine.com, sanskritdocuments.org, hariome.com, drikpanchang.com