व्रत और पर्व

लोहड़ी 2027 कब है: 14 जनवरी

गुरुवार, 14 जनवरी 2027

मकर संक्रांति से पहले की शाम; अगले दिन माघी

85 दिन बाद
कोड से बना चित्र: तारों भरी रात में लकड़ियों का जलता अलाव, उड़ती चिंगारियाँ, और पास में मूँगफली, मुरमुरे और रेवड़ी के कटोरे

लोहड़ी की शाम

सूर्यास्तअलाव परंपरा से सूर्यास्त के बाद
5:45 PM
मकर संक्रांति का क्षणपूरे भारत में एक ही
9:16 PM

लोहड़ी का कोई शास्त्रीय मुहूर्त नहीं है; अलाव का समय परिवार और मोहल्ला तय करते हैं। सूर्यास्त शहर के अनुसार है।

गुरुवार, 14 जनवरी 2027 के लिए, भारतीय मानक समय में, चुने हुए शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह-स्थिति से। अलग-अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है। गणना कैसे होती है

संक्षेप में

लोहड़ी 2027 में 14 जनवरी, गुरुवार को है। Drik Panchang लोहड़ी मकर संक्रांति से पहले के दिन देता है, और 2027 में मकर संक्रांति 15 जनवरी, शुक्रवार को है, क्योंकि सूर्य 14 जनवरी की रात 9:14 बजे मकर में आता है। लोहड़ी का अलाव परंपरा से सूर्यास्त के बाद जलता है: 14 जनवरी को नई दिल्ली में सूर्यास्त 5:45 PM पर, अमृतसर में 5:48 PM पर है। लोहड़ी का कोई शास्त्रीय मुहूर्त नहीं है; समय परिवार और मोहल्ला तय करते हैं।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 7 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

एक नज़र में

लोहड़ी
14 जनवरी 2027, गुरुवार की शाम (Drik Panchang; Prokerala)
सूर्यास्त
नई दिल्ली 5:45 PM, अमृतसर 5:48 PM, चंडीगढ़ 5:43 PM
अगले दिन
मकर संक्रांति और माघी, 15 जनवरी, शुक्रवार
कहाँ
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू
मुख्य रीति
शाम का अलाव, उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी, मूँगफली और मक्के के फूले डालना
विशेष
नवविवाहितों और नवजात शिशु की पहली लोहड़ी

लोहड़ी 13 को या 14 जनवरी को?

लोहड़ी मकर संक्रांति (पंजाब में माघी) से पहले की रात मनती है। Drik Panchang 2027 में लोहड़ी 14 जनवरी, गुरुवार को देता है, क्योंकि मकर संक्रांति 15 जनवरी को है, और Prokerala की तालिका में भी 2027 की लोहड़ी 14 जनवरी है। कुछ कैलेंडर और लेख लोहड़ी को हर साल 13 जनवरी को लिखते हैं: विकिपीडिया के अनुसार 19वीं सदी के अंत में लोहड़ी लगभग 11 जनवरी को पड़ती थी और अब प्रायः 13 या 14 जनवरी को, क्योंकि संक्रांति का दिन धीरे-धीरे आगे खिसकता है। 2023 में भी, जब संक्रांति 14 जनवरी की रात थी, Drik ने लोहड़ी 14 जनवरी को दी थी। अपने गुरुद्वारे या मोहल्ले का दिन भी देख लें।

अलाव और प्रसाद

सूर्यास्त के बाद घर के आँगन या मोहल्ले में अलाव जलाया जाता है। लोग उसकी परिक्रमा करते हैं और उसमें तिल, गुड़, मिश्री, रेवड़ी, मूँगफली और मक्के के फूले (पॉपकॉर्न) डालते हैं; यही चीज़ें प्रसाद के रूप में बँटती हैं। गजक, तिल के लड्डू और तिलचौली (गुड़, तिल और मुरमुरे) इस दिन के पकवान हैं, और रात के खाने में सरसों का साग और मक्की की रोटी। ढोल पर भांगड़ा और गिद्धा होता है। ये लोक परंपराएँ हैं।

पहली लोहड़ी

जिस घर में साल भर में विवाह हुआ हो या बच्चे का जन्म हुआ हो, वहाँ लोहड़ी और धूम से मनती है: रिश्तेदार और पड़ोसी इकट्ठे होते हैं और मिठाइयाँ बँटती हैं। विकिपीडिया 1907 के एक विवरण का हवाला देता है, जिसमें जन्म के बाद की पहली लोहड़ी पर ग़रीबों को ताँबे के सिक्के और कौड़ियाँ बाँटने की रीति लिखी है।

घर-घर गीत

लोहड़ी से पहले बच्चों की टोलियाँ घर-घर जाकर लोहड़ी के गीत गाती हैं और बदले में मिठाई, गुड़, मूँगफली या पैसे पाती हैं; उन्हें ख़ाली हाथ लौटाना अच्छा नहीं माना जाता। जो इकट्ठा होता है, वह रात को अलाव के पास बाँटा जाता है।

दुल्ला भट्टी: लोककथा

लोहड़ी के बहुत से गीतों में दुल्ला भट्टी का नाम आता है। लोककथा के अनुसार वह अकबर के समय पंजाब का एक ज़मींदार था, जो मुग़ल सत्ता के विरुद्ध खड़ा हुआ और बेची जा रही लड़कियों को छुड़ाकर उनका विवाह कराता था; जिन दो लड़कियों को उसने बचाया, सुंदरी और मुंदरी, वे पंजाबी लोकगीतों का हिस्सा हैं। यह लोक परंपरा की कथा है; लोहड़ी कब और कैसे शुरू हुई, इसका निश्चित इतिहास नहीं मिलता (Prokerala; विकिपीडिया)।

माघी: अगला दिन

लोहड़ी के अगले दिन, मकर संक्रांति पर, पंजाब में माघी मनती है। श्री मुक्तसर साहिब में माघी का मेला चालीस मुक्तों (चाली मुक्ते) की याद में लगता है। उत्तर भारत में इसी दिन स्नान-दान का पुण्य काल है; शहर के अनुसार समय मकर संक्रांति के पन्ने पर है।

पूजा विधि

  1. चरण 1

    तैयारी

    दिन में लकड़ियाँ, उपले, तिल, गुड़, रेवड़ी, मूँगफली और मक्के के फूले इकट्ठे करें।

  2. चरण 2

    सूर्यास्त के बाद अलाव

    खुली और सुरक्षित जगह पर अलाव जलाएँ; पास में पानी या रेत रखें, और बच्चों को आग से दूर रखें।

  3. चरण 3

    परिक्रमा और अर्पण

    परिवार के साथ अलाव की परिक्रमा करें और उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी और मूँगफली डालें (परंपरा)।

  4. चरण 4

    प्रसाद और भोजन

    वही चीज़ें प्रसाद के रूप में बाँटें, गीत गाएँ, और सरसों का साग और मक्की की रोटी का भोजन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोहड़ी 2027 कब है?

14 जनवरी, गुरुवार की शाम (Drik Panchang; Prokerala)। अगले दिन, 15 जनवरी, शुक्रवार को मकर संक्रांति और माघी है।

लोहड़ी 2027 का समय क्या है?

लोहड़ी का कोई शास्त्रीय मुहूर्त नहीं है। अलाव परंपरा से सूर्यास्त के बाद जलता है: 14 जनवरी को नई दिल्ली में 5:45 PM, अमृतसर में 5:48 PM, चंडीगढ़ में 5:43 PM और जम्मू में 5:46 PM। अपने शहर का सूर्यास्त ऊपर के बॉक्स में देखें।

लोहड़ी 13 जनवरी को है या 14 को?

2027 में 14 जनवरी, गुरुवार। लोहड़ी मकर संक्रांति से पहले की रात है, और इस बार संक्रांति 15 जनवरी को है (सूर्य 14 जनवरी की रात 9:14 बजे मकर में आता है)। जिन वर्षों में संक्रांति 14 जनवरी को होती है, उनमें लोहड़ी 13 जनवरी को पड़ती है।

लोहड़ी में आग में क्या डालते हैं?

परंपरा से तिल, गुड़, मिश्री, रेवड़ी, मूँगफली और मक्के के फूले (पॉपकॉर्न)। यही चीज़ें बाद में प्रसाद के रूप में बँटती हैं।

दुल्ला भट्टी कौन था?

लोककथा के अनुसार अकबर के समय का पंजाब का एक ज़मींदार, जो बेची जा रही लड़कियों को छुड़ाकर उनका विवाह कराता था; लोहड़ी के बहुत से गीतों में उसका नाम आता है। यह लोक परंपरा की कथा है।

पहली लोहड़ी क्या होती है?

विवाह या बच्चे के जन्म के बाद की पहली लोहड़ी, जिसे परिवार रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ विशेष रूप से मनाता है।

स्रोत

  1. Drik Panchang: हिंदू कैलेंडर 2027, नई दिल्ली (लोहड़ी 14 जनवरी, मकर संक्रांति 15 जनवरी), 30 सितंबर 2026 को पढ़ा; जनवरी 2027 के बंगाली, तमिल और मलयालम कैलेंडर में भी लोहड़ी "January 14th (Thursday)"
  2. Drik Panchang: मकर संक्रांति 2027 ("Makara Sankranti Moment - 09:14 PM, Jan 14")
  3. Prokerala, Lohri: 2027 की तालिका में गुरुवार, 14 जनवरी; अलाव, प्रसाद, घर-घर गीत, पहली लोहड़ी और दुल्ला भट्टी की कथा
  4. विकिपीडिया, Lohri: तारीख का खिसकना (19वीं सदी में लगभग 11 जनवरी), अलाव और पकवान, पहली लोहड़ी (1907 का विवरण), बच्चों के गीत, दुल्ला भट्टी, सुंदरी-मुंदरी, क्षेत्र
  5. विकिपीडिया, Makar Sankranti: माघी और श्री मुक्तसर साहिब का मेला
  6. रीतियाँ: लोक परंपरा
  7. संक्रांति का क्षण, पुण्य काल और सूर्यास्त: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang के मकर संक्रांति 2027 पृष्ठ (नई दिल्ली और छह और स्थान), थाई पोंगल 2027 पृष्ठ और जनवरी 2027 के तमिल, बंगाली और मलयालम कैलेंडर से मिलान (9 और 18 अक्टूबर 2026)

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