गुड़ी पड़वा 2027 में 7 अप्रैल, बुधवार को है। इस दिन सूर्योदय पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है: प्रतिपदा 7 अप्रैल की सुबह 5:22 बजे शुरू होकर 8 अप्रैल की सुबह 4:30 बजे तक रहती है (Drik Panchang: 5:20 और 4:28), और मुंबई में सूर्योदय 6:28 बजे है। इसी दिन मराठी नववर्ष, शालिवाहन शक 1949 (प्लवंग संवत्सर) शुरू होता है। Drik Panchang का मुंबई का मराठी कैलेंडर भी गुढीपाडवा 7 अप्रैल 2027 को देता है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार इस दिन घरों पर बाँस, रेशमी कपड़े, नीम की पत्तियों, फूलों, शक्कर की माला और ताँबे या चाँदी के लोटे से बनी गुड़ी खड़ी की जाती है।
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शहर-वार समय
प्रतिपदा हर शहर में एक ही क्षण पर है; सूर्योदय और सूर्यास्त शहर के अनुसार बदलते हैं। दूसरे शहर के लिए ऊपर के बॉक्स में शहर चुनें।
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| मुंबई | 6:28 AM | 6:54 PM |
| पुणे | 6:24 AM | 6:50 PM |
| नागपुर | 6:02 AM | 6:30 PM |
| नासिक | 6:24 AM | 6:51 PM |
| पणजी | 6:26 AM | 6:48 PM |
एक नज़र में
- तारीख
- 7 अप्रैल 2027, बुधवार
- तिथि
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा: 7 अप्रैल 5:22 AM से 8 अप्रैल 4:30 AM (Drik: 5:20 से 4:28)
- वर्ष
- शालिवाहन शक 1949, प्लवंग संवत्सर
- कहाँ
- महाराष्ट्र, गोवा (कोंकणी: संवत्सर पाडवो)
- मराठी नाम
- गुढीपाडवा (गुढी = ध्वज, पाडवा = प्रतिपदा)
- मुंबई में सूर्योदय
- 6:28 AM (हमारी गणना)
- मुख्य रीति
- घर पर गुड़ी खड़ी करना, नीम-गुड़ खाना, रंगोली
- व्यंजन
- पूरनपोळी, श्रीखंड-पूरी, बासुंदी (महाराष्ट्र पर्यटन)
- उसी दिन
- उगादि (दक्षिण), चैत्र नवरात्रि (उत्तर भारत)
गुड़ी पड़वा 2027 की तारीख
मराठी कैलेंडर अमांत है: वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, और जिस दिन सूर्योदय पर प्रतिपदा हो वही गुढीपाडवा है। 2027 में अमावस्या 7 अप्रैल की सुबह 5:22 बजे (Drik: 5:20) खत्म होती है, जो मुंबई (सूर्योदय 6:28), पुणे (6:24), नागपुर (6:02) और पणजी (6:26), सबके सूर्योदय से पहले है; प्रतिपदा अगली सुबह 4:30 बजे तक है। इसलिए पूरे महाराष्ट्र और गोवा में गुड़ी पड़वा 7 अप्रैल, बुधवार को है। 2026 में यह 19 मार्च को था; 2028 में 27 मार्च को होगा (Drik)।
गुड़ी में क्या-क्या लगता है
महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार गुड़ी एक बाँस की लाठी है, जिसे रेशमी कपड़े, फूलों, नीम की पत्तियों, शक्कर की माला और चाँदी या ताँबे के लोटे से सजाया जाता है, और घरों पर विजय और शुभ के चिह्न के रूप में खड़ा किया जाता है। विकिपीडिया के अनुसार चमकीला रेशमी कपड़ा बाँस के ऊपरी सिरे पर बाँधा जाता है, उसके साथ नीम और आम की टहनियाँ और फूलों की माला, और सबसे ऊपर चाँदी, काँसे या ताँबे का लोटा (हंडी या कलश) उल्टा रखा जाता है। शक्कर की माला को गाठी कहते हैं। गुड़ी आम तौर पर घर के दरवाज़े, खिड़की या छत पर, ऊँची जगह खड़ी की जाती है ताकि दूर से दिखे। गुड़ी की बनावट और कपड़े का रंग हर घर में अलग हो सकता है।
बाँस
लंबी बाँस की लाठी, जिस पर सब बाँधा जाता है।
महाराष्ट्र पर्यटनरेशमी कपड़ा
चमकीला, अक्सर ज़री किनारी वाला; रंग घर की रीति से।
महाराष्ट्र पर्यटन; विकिपीडियानीम और आम की पत्तियाँ
नीम की टहनी गुड़ी का अंग है; कई घर आम की पत्तियाँ भी लगाते हैं।
महाराष्ट्र पर्यटन; विकिपीडियाफूल और गाठी
फूलों की माला और शक्कर से बनी गाठी की माला।
महाराष्ट्र पर्यटनउल्टा लोटा
सबसे ऊपर चाँदी, ताँबे या काँसे का लोटा या कलश, मुँह नीचे की ओर।
विकिपीडियानीम और गुड़
महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार गुढीपाडवा पर कड़वी नीम और मीठे गुड़ का मिश्रण खाया जाता है, जिसे जीवन के सुख और कठिनाई दोनों को स्वीकार करने का प्रतीक माना जाता है। विकिपीडिया के अनुसार कई घरों में इसमें इमली और धनिया भी मिलाते हैं, और इसे स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है। दक्षिण के उगादि पच्चडि और कर्नाटक के बेवु-बेल्ल में भी यही भाव है।
शोभायात्रा और घर का उत्सव
महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार घर साफ़ करके दरवाज़े पर रंगोली बनाई जाती है, और मुंबई के गिरगाँव, पुणे और डोंबिवली की शोभायात्राएँ पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ निकलती हैं, जिनके रास्तों पर भी रंगोली सजाई जाती है। भोजन में पूरनपोळी (चने की दाल और गुड़ भरी रोटी), पूरी के साथ श्रीखंड और बासुंदी प्रमुख हैं। किसानों के लिए यह रबी की फ़सल के बाद नई फ़सल के आने का समय है।
परंपरा में गुढीपाडवा
राम की विजय
महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार परंपरा में माना जाता है कि श्रीराम रावण पर विजय के बाद इसी दिन अयोध्या लौटे, और गुड़ी उस विजय का चिह्न है।
महाराष्ट्र पर्यटनशालिवाहन शक
विकिपीडिया के अनुसार कुछ लोग इसे राजा शालिवाहन की विजय से जोड़ते हैं और इसी से शालिवाहन शक की गणना मानते हैं। शक संवत में 78 जोड़ने पर वह ईस्वी वर्ष आता है जिसमें शक वर्ष शुरू होता है: 1949 + 78 = 2027।
विकिपीडिया “Gudi Padwa”; mr.wikipedia “शालिवाहन शक”ब्रह्मा की सृष्टि
विकिपीडिया के अनुसार परंपरा इस दिन को ब्रह्मा द्वारा सृष्टि रचने का दिन मानती है, और कुछ लोग गुड़ी को ब्रह्मा का ध्वज (ब्रह्म पुराण के अनुसार) या इंद्र का ध्वज मानते हैं।
विकिपीडिया “Gudi Padwa”गोवा और कोंकणी परंपरा
विकिपीडिया के अनुसार गोवा और कोंकणी समाज (केरल के कोंकणी परिवारों सहित) में यह दिन संवत्सर पाडवो या सौसार पाडवो कहलाता है, और महाराष्ट्र के बाहर दमण में भी मनाया जाता है। पणजी में 2027 में सूर्योदय 6:26 बजे है, और यहाँ भी प्रतिपदा सूर्योदय पर है।
Drik Panchang से मिलान
Drik Panchang नई दिल्ली के लिए प्रतिपदा 7 अप्रैल 5:20 AM से 8 अप्रैल 4:28 AM देता है, और Prokerala (उज्जैन) 5:21 AM से 4:29 AM। हमारी गणना 5:22 AM से 4:30 AM देती है, लगभग 2 मिनट बाद। Drik के मुंबई के मराठी कैलेंडर में गुढीपाडवा 7 अप्रैल को है, और वर्ष 1 मई 2027 से “शक 1949 प्लवंग” है (18 अक्टूबर 2026 को पढ़ा)। Prokerala भी गुड़ी पड़वा 7 अप्रैल, बुधवार देता है। सूर्योदय के समय हमारी गणना से हैं; मुंबई के लिए वे Drik से एक मिनट के भीतर मिलते हैं (मराठी कैलेंडर की जाँच)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुड़ी पड़वा 2027 कब है?
7 अप्रैल, बुधवार को। इस दिन सूर्योदय पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है (7 अप्रैल 5:22 AM से 8 अप्रैल 4:30 AM; Drik: 5:20 से 4:28)। Drik के मुंबई के मराठी कैलेंडर और Prokerala में भी गुढीपाडवा 7 अप्रैल 2027 को है।
गुड़ी पड़वा 2027 से कौन सा शक संवत शुरू होगा?
शालिवाहन शक 1949, जिसका संवत्सर नाम प्लवंग है (Drik Panchang का मराठी कैलेंडर)। शक 1948 (पराभव) 19 मार्च 2026 को शुरू हुआ था।
मुंबई में गुड़ी पड़वा पर सूर्योदय कब है?
7 अप्रैल 2027 को 6:28 AM (हमारी गणना)। पुणे में 6:24, नागपुर में 6:02, नाशिक में 6:24 और पणजी में 6:26 बजे; अपने शहर का समय ऊपर के बॉक्स में चुनें।
गुड़ी कैसे बनाई जाती है?
बाँस की लाठी पर रेशमी कपड़ा, नीम (और कई घरों में आम) की पत्तियाँ, फूलों और शक्कर (गाठी) की माला बाँधकर ऊपर ताँबे, चाँदी या काँसे का लोटा उल्टा रखा जाता है (महाराष्ट्र पर्यटन, विकिपीडिया)। रंग और बनावट घर की रीति से।
गुड़ी पड़वा पर नीम क्यों खाते हैं?
नीम और गुड़ का मिश्रण जीवन के कड़वे और मीठे, दोनों अनुभवों को स्वीकार करने का प्रतीक माना जाता है (महाराष्ट्र पर्यटन); कई लोग इसे स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा मानते हैं (विकिपीडिया)।
गुड़ी पड़वा और उगादि में क्या अंतर है?
दिन, तिथि और शक वर्ष एक ही हैं: 7 अप्रैल 2027, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, शक 1949 प्लवंग। अंतर क्षेत्र और रीति का है: महाराष्ट्र-गोवा में गुड़ी और नीम-गुड़, आंध्र-तेलंगाना-कर्नाटक में उगादि पच्चडि या बेवु-बेल्ल और पंचांग श्रवण।
गोवा में गुड़ी पड़वा को क्या कहते हैं?
कोंकणी में संवत्सर पाडवो या सौसार पाडवो (विकिपीडिया)।
स्रोत
- Drik Panchang: मराठी मासिक पंचांग, मुंबई, मार्च 2026 से अप्रैल 2028 (गुढीपाडवा 7 अप्रैल 2027; 1 मई 2027 का पन्ना “शक 1949 प्लवंग”), 18 अक्टूबर 2026 को पढ़ा (docs/checks/lunar-calendars-2026-27.md)
- Drik Panchang: हिंदू कैलेंडर 2027, नई दिल्ली (गुड़ी पड़वा 7 अप्रैल; प्रतिपदा 5:20 AM से 4:28 AM), 30 सितंबर 2026 को पढ़ा
- Prokerala, Gudi Padwa 2027: 7 अप्रैल, बुधवार; प्रतिपदा 5:21 AM से 4:29 AM, उज्जैन
- महाराष्ट्र पर्यटन विभाग (maharashtratourism.gov.in): “Gudi Padwa” (गुड़ी की सामग्री, नीम-गुड़, रंगोली, गिरगाँव-पुणे-डोंबिवली शोभायात्रा, पूरनपोळी-श्रीखंड-बासुंदी, राम की विजय, रबी फ़सल)
- विकिपीडिया: “Gudi Padwa” (गुड़ी की बनावट, उल्टा लोटा, नीम-गुड़-इमली, कोंकणी नाम, ब्रह्मा, शालिवाहन और राम से जुड़ी मान्यताएँ)
- mr.wikipedia: “शालिवाहन शक” (शक + 78 = ईस्वी वर्ष)
- गुड़ी, नीम-गुड़ और शोभायात्रा की रीतियाँ: लोक परंपरा
- तिथि और सूर्योदय: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang (नई दिल्ली, 2027 की तिथि; हैदराबाद का तेलुगु और मुंबई का मराठी कैलेंडर, 18 अक्टूबर 2026 को पढ़े) से मिलान
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