मकर संक्रांति 2027 में 15 जनवरी, शुक्रवार को है। सूर्य 14 जनवरी, गुरुवार की रात 9:14 बजे (Drik Panchang; हमारी गणना 9:16) मकर राशि में प्रवेश करता है। संक्रांति सूर्यास्त के बाद है, इसलिए स्नान-दान का पुण्य काल अगले दिन, 15 जनवरी को है: नई दिल्ली में सुबह 7:15 से शाम 5:46 तक, और महा पुण्य काल सुबह 7:15 से 9:00 तक। अपने शहर का समय ऊपर के बॉक्स में देखें। लोहड़ी 14 जनवरी की शाम, पोंगल 15 जनवरी और असम का माघ बिहू भी 15 जनवरी को है।
हर सुबह तिथि, राहु काल और आने वाले व्रत-त्योहार, WhatsApp पर एक छोटे संदेश में।चैनल फ़ॉलो करें
शहर-वार समय
संक्रांति का क्षण हर शहर में एक ही है; पुण्य काल शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त से बदलता है। दूसरे शहर के लिए ऊपर के बॉक्स में शहर चुनें।
| शहर | पुण्य काल | महा पुण्य काल |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 7:15 AM–5:46 PM | 7:15–9:00 AM |
| मुंबई | 7:15 AM–6:21 PM | 7:15–9:06 AM |
| कोलकाता | 6:19 AM–5:13 PM | 6:19–8:08 AM |
| चेन्नई | 6:35 AM–6:01 PM | 6:35–8:29 AM |
| बेंगलुरु | 6:46 AM–6:12 PM | 6:46–8:40 AM |
| हैदराबाद | 6:49 AM–6:01 PM | 6:49–8:41 AM |
| अहमदाबाद | 7:23 AM–6:15 PM | 7:23–9:12 AM |
| प्रयागराज | 6:50 AM–5:34 PM | 6:50–8:37 AM |
| पटना | 6:37 AM–5:20 PM | 6:37–8:25 AM |
| गुवाहाटी | 6:12 AM–4:53 PM | 6:12–7:59 AM |
एक नज़र में
- मकर संक्रांति
- 15 जनवरी 2027, शुक्रवार (Drik Panchang, नई दिल्ली)
- संक्रांति का क्षण
- 14 जनवरी, रात 9:16 बजे (Drik Panchang: 9:14 PM)
- पुण्य काल (नई दिल्ली)
- 15 जनवरी, सुबह 7:15 से शाम 5:46 तक
- महा पुण्य काल (नई दिल्ली)
- 15 जनवरी, सुबह 7:15 से 9:00 तक
- लोहड़ी
- 14 जनवरी, गुरुवार की शाम
- पोंगल
- भोगी 14, थाई पोंगल 15, मट्टू पोंगल 16, कानुम पोंगल 17 जनवरी
- माघ (भोगाली) बिहू
- 15 जनवरी; उरुका 14 जनवरी की रात (Drik Panchang)
- खरमास समाप्त
- धनु संक्रांति (16 दिसंबर 2026) से चला खरमास मकर संक्रांति पर पूरा
- आगे
- प्रयाग के माघ मेले का प्रमुख स्नान; गंगासागर मेला
मकर संक्रांति 14 को या 15 जनवरी को?
सूर्य जिस क्षण एक राशि से दूसरी में जाता है, उसे संक्रांति कहते हैं; मकर संक्रांति वह क्षण है जब सूर्य (निरयन, लाहिड़ी अयनांश से) मकर राशि में आता है। 2027 में यह 14 जनवरी, गुरुवार की रात 9:14 बजे है (Drik Panchang)। यह क्षण पूरे भारत में एक ही है। पर स्नान-दान दिन में होता है, और जब संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो पंचांग पुण्य काल अगले दिन देते हैं; इसलिए Drik Panchang और हमारा कैलेंडर मकर संक्रांति 15 जनवरी, शुक्रवार को देते हैं। 2023 में भी यही हुआ था: संक्रांति 14 जनवरी की रात 8:57 बजे थी और पर्व 15 जनवरी को मना। जिन राज्यों के सौर कैलेंडर का नियम दूसरा है, वहाँ दिन अलग हो सकता है: Drik का ओडिया पंचांग "उत्तरायण मकर संक्रांति" 14 जनवरी को देता है, क्योंकि ओडिया महीना संक्रांति के दिन से ही गिना जाता है।
पुण्य काल और महा पुण्य काल
संक्रांति के आसपास का समय स्नान, दान और जप के लिए पुण्य काल माना जाता है। रात की संक्रांति के लिए Drik Panchang 2027 में पूरा 15 जनवरी का दिन, सूर्योदय से सूर्यास्त तक, पुण्य काल देता है, और उसका पहला छठा भाग (दिन की 30 घटियों में से पहली 5 घटी) महा पुण्य काल। सूर्योदय और सूर्यास्त शहर के अनुसार बदलते हैं, इसलिए पुण्य काल भी हर शहर में थोड़ा अलग है: नई दिल्ली में 7:15 AM–5:46 PM, कोलकाता में 6:19 AM–5:13 PM, मुंबई में 7:15 AM–6:21 PM। नीचे की तालिका और ऊपर के बॉक्स में शहर चुनकर अपना समय देखें। स्नान-दान का ठीक समय अपनी कुल-परंपरा और पुरोहित से भी पूछ लें।
उत्तरायण: शास्त्र क्या कहते हैं
मनुस्मृति (1.67) के अनुसार मनुष्यों का एक वर्ष देवताओं का एक दिन-रात है: उत्तरायण उनका दिन और दक्षिणायन उनकी रात। भगवद्गीता (8.24) उत्तरायण के छह महीनों को उस "शुक्ल" मार्ग में गिनती है जिससे ब्रह्म को जानने वाले जाते हैं; श्लोक नीचे है। महाभारत के अनुसार भीष्म युद्ध के दसवें दिन बाणों से गिरे और देह त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की (भीष्म पर्व, अध्याय 116–120; अनुशासन पर्व, अध्याय 167–168)। परंपरा मकर संक्रांति को उत्तरायण का आरंभ मानती है। खगोल की दृष्टि से सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा शीत अयनांत (लगभग 21–22 दिसंबर) से शुरू होती है; मकर संक्रांति निरयन (नक्षत्रों के सापेक्ष) गणना है, इसलिए दोनों में अब लगभग तीन हफ़्ते का अंतर है, और यह अंतर हर 72 वर्ष में लगभग एक दिन बढ़ता है।
एक पर्व, कई नाम: राज्यों की परंपराएँ
मकर संक्रांति पूरे भारत में मनती है, पर हर क्षेत्र का नाम और रीति अलग है। नीचे की रीतियाँ लोक परंपरा हैं, शास्त्र के नियम नहीं; हर परिवार और गाँव में अंतर मिलता है।
गुजरात: उत्तरायण
पतंगों का पर्व। विकिपीडिया के अनुसार गुजरात में 14 जनवरी उत्तरायण और 15 जनवरी वासी उत्तरायण के रूप में दो दिन पतंग उड़ती है; उंधियू और चिक्की खाई जाती है। Drik का गुजराती कैलेंडर 2027 में उत्तरायण 15 जनवरी को देता है। पतंग का मांझा पक्षियों और राहगीरों के लिए ख़तरनाक हो सकता है; सावधानी रखें।
विकिपीडिया, Makar Sankranti; Drik Panchang, गुजराती कैलेंडर जनवरी 2027उत्तर प्रदेश और बिहार: खिचड़ी
पूर्वांचल और अवध में पर्व का नाम ही खिचड़ी है: स्नान के बाद खिचड़ी बनती और दान होती है, और गोरखपुर में गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा है। बिहार में दही-चूड़ा और तिलकुट।
विकिपीडिया, Makar Sankranti; लोक परंपरापंजाब: लोहड़ी और माघी
संक्रांति से पहले की शाम लोहड़ी का अलाव, और संक्रांति के दिन माघी। श्री मुक्तसर साहिब में माघी का मेला चालीस मुक्तों (चाली मुक्ते) की याद में लगता है।
विकिपीडिया, Makar Sankranti और Lohriतमिलनाडु: पोंगल
चार दिन का पर्व: भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल। थाई पोंगल तमिल महीने थाई के पहले दिन है, 2027 में 15 जनवरी।
Drik Panchang, तमिल कैलेंडर; Prokeralaअसम: माघ (भोगाली) बिहू
नीचे अलग खंड देखें। "भोगाली" का अर्थ है भोग, यानी भोजन और आनंद का पर्व।
विकिपीडिया, Magh Bihuआंध्र प्रदेश और तेलंगाना: संक्रांति
चार दिन: भोगी, पेद्द पंडुगा (संक्रांति), कनुमा और मुक्कनुमा। घरों के आगे चावल के आटे से रंगीन मुग्गु बनाए जाते हैं।
विकिपीडिया, Makar Sankrantiकर्नाटक: सुग्गि और एळ्ळु-बेल्ल
फ़सल का पर्व। "एळ्ळु बीरोदु" की रीति में तिल, गुड़, मूँगफली और नारियल का मिश्रण (एळ्ळु-बेल्ल) एक-दूसरे को दिया जाता है।
विकिपीडिया, Makar Sankrantiमहाराष्ट्र: तिलगुल
तिल-गुड़ के लड्डू देते हुए कहा जाता है "तिळगुळ घ्या, गोड गोड बोला" (तिल-गुड़ लो, मीठा-मीठा बोलो)। सर्दी के कारण काले कपड़े पहनने की रीति भी है।
विकिपीडिया, Makar Sankrantiबंगाल: पौष संक्रांति और गंगासागर
बंगाल में पौष संक्रांति; इसी दिन सागर द्वीप पर गंगासागर मेला लगता है (नीचे देखें)। बंगाली महीना माघ 2027 में 15 जनवरी से शुरू होता है।
विकिपीडिया, Gangasagar Mela; Drik Panchang, बंगाली पंजिकाओडिशा: मकर चाउळ
नए कच्चे चावल और दूसरी चीज़ों से बना मकर चाउळ भोग के रूप में चढ़ता है; कोणार्क के सूर्य मंदिर और पुरी में विशेष पूजा होती है।
विकिपीडिया, Makar Sankrantiकेरल: मकरविलक्कु
सबरीमाला के मंडल-मकरविलक्कु मौसम का मुख्य दिन मकर संक्रांति पर होता है; दिन और समय Travancore Devaswom Board घोषित करता है।
Kerala Tourism; सबरीमाला का पन्नामाघ (भोगाली) बिहू 2027: उरुका 14 जनवरी, बिहू 15 जनवरी
असम में मकर संक्रांति माघ बिहू या भोगाली बिहू के रूप में मनती है। Drik Panchang इसे 2027 में 15 जनवरी, शुक्रवार को देता है; इससे पहले की रात, 14 जनवरी को, उरुका है। 2023 में भी संक्रांति 14 जनवरी की रात थी, और असम सरकार की छुट्टियों की सूची में माघ बिहू 15 और 16 जनवरी 2023 को था। असम सरकार की 2027 की सूची अभी नहीं आई है; छुट्टी के दिन उसी से पक्के करें। विकिपीडिया के अनुसार उरुका की रात परिवार और गाँव मिलकर भोज (भुज) करते हैं, युवा खेतों में बाँस और पुआल की अस्थायी झोपड़ी (भेलाघर) बनाकर अलाव के पास रात बिताते हैं, और बिहू की सुबह खेतों में मेजि (अलाव) जलाकर पूर्वजों के देवताओं की प्रार्थना होती है; उसकी राख पेड़ों और खेतों में डाली जाती है। तिल पीठा, सुंगा पीठा और नारियल के लारू इस पर्व के पकवान हैं। ये लोक परंपराएँ हैं।
गंगासागर और प्रयाग: संक्रांति का स्नान
मकर संक्रांति पर गंगा और दूसरी पवित्र नदियों में स्नान की परंपरा है। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना ज़िले में सागर द्वीप पर, जहाँ हुगली (गंगा) बंगाल की खाड़ी से मिलती है, मकर संक्रांति पर गंगासागर मेला लगता है, जिसे राज्य सरकार आयोजित करती है; यहाँ कपिल मुनि का मंदिर है। परंपरा के अनुसार कपिल मुनि के क्रोध से राजा सगर के साठ हज़ार पुत्र भस्म हुए थे, और उनके उद्धार के लिए भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए; गंगा यहीं सागर में मिलीं। प्रयागराज में संगम पर हर वर्ष माघ मेला लगता है, और मकर संक्रांति उसका एक प्रमुख स्नान है। 2026-27 के सभी स्नान दिन और स्नान का समय गंगा स्नान के पन्ने पर हैं।
दान और भोजन: परंपरा से
संक्रांति के पुण्य काल में स्नान के बाद दान की परंपरा है। उत्तर भारत में तिल, गुड़, खिचड़ी (चावल और उड़द की दाल), कंबल और गरम कपड़ों का दान आम है, और घरों में तिल-गुड़ के लड्डू, गजक और खिचड़ी बनती है। क्या दान करें, यह कुल-परंपरा से तय होता है; ये परंपराएँ हैं, किसी एक शास्त्र का निश्चित नियम नहीं। ज़रूरतमंद को उपयोगी वस्तु देना हर रीति का सार है।
खरमास का अंत और विवाह मुहूर्त
धनु संक्रांति (16 दिसंबर 2026) से मकर संक्रांति तक सूर्य धनु राशि में रहता है, जिसे खरमास कहते हैं; इसमें विवाह के मुहूर्त नहीं निकाले जाते। Drik Panchang की 2027 की विवाह मुहूर्त सूची 15 जनवरी से शुरू होती है। खरमास के नियम और तारीखें खरमास के पन्ने पर, और जनवरी 2027 के विवाह मुहूर्त अलग पन्ने पर देखें।
Drik Panchang से मिलान
इस पन्ने के समय हमारी पंचांग गणना से हैं (भारतीय मानक समय, लाहिड़ी अयनांश)। Drik Panchang मकर संक्रांति का क्षण 14 जनवरी 2027, 9:14 PM देता है; हमारी गणना 9:15:36, यानी लगभग 2 मिनट बाद, जो हमारे सभी संक्रांति-क्षणों में दिखता है। Drik का पुण्य काल नई दिल्ली के लिए 15 जनवरी, 7:15 AM–5:46 PM है, और Vijayawada, चिकमगलूर, गोकर्ण, दुर्गापुर, मोगा और मौर के उसके पुण्य काल और महा पुण्य काल हमारी गणना से मिनट तक मिलते हैं (जैसे दुर्गापुर: 6:25 AM–5:15 PM और 6:25–8:13 AM)। Prokerala उज्जैन के लिए दूसरे अयनांश से संक्रांति 9:06 PM देता है; दिन वही है।
पूजा विधि
- चरण 1
सुबह स्नान
पुण्य काल में, हो सके तो महा पुण्य काल में, किसी पवित्र नदी में या घर पर पानी में थोड़ा गंगाजल और तिल डालकर स्नान करें (परंपरा)।
- चरण 2
सूर्य को अर्घ्य
ताँबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें (परंपरा)।
- चरण 3
दान
तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल या गरम कपड़े, अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार, ज़रूरतमंद को दें।
- चरण 4
तिल-गुड़ और खिचड़ी
घर में तिल-गुड़ के लड्डू या गजक और खिचड़ी बनाकर पहले भोग लगाएँ, फिर परिवार के साथ खाएँ।
श्लोक
अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम्।तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः॥अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति 2027 कब है?
15 जनवरी, शुक्रवार को। सूर्य 14 जनवरी, गुरुवार की रात 9:14 बजे (Drik Panchang) मकर राशि में आता है; संक्रांति सूर्यास्त के बाद होने से स्नान-दान का पुण्य काल 15 जनवरी को है।
मकर संक्रांति 2027 का पुण्य काल क्या है?
नई दिल्ली में 15 जनवरी को सुबह 7:15 से शाम 5:46 तक पुण्य काल, और सुबह 7:15 से 9:00 तक महा पुण्य काल (Drik Panchang की रीति, हमारी गणना)। दूसरे शहरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के साथ समय बदलता है: मुंबई 7:15 AM–6:21 PM, कोलकाता 6:19 AM–5:13 PM, चेन्नई 6:35 AM–6:01 PM।
इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को क्यों नहीं है?
संक्रांति का क्षण 14 जनवरी की रात 9:14 बजे है, सूर्यास्त के बाद। पंचांग रात की संक्रांति का पुण्य काल अगले दिन देते हैं, इसलिए पर्व 15 जनवरी को है। ऐसा 2023 में भी हुआ था। कुछ राज्यों के सौर कैलेंडर (जैसे ओडिया) दिन संक्रांति के दिन से ही गिनते हैं, इसलिए वहाँ 14 जनवरी भी लिखा मिलता है।
लोहड़ी, पोंगल और बिहू 2027 कब हैं?
लोहड़ी 14 जनवरी, गुरुवार की शाम। पोंगल: भोगी 14, थाई पोंगल 15, मट्टू पोंगल 16 और कानुम पोंगल 17 जनवरी। असम में उरुका 14 जनवरी की रात और माघ बिहू 15 जनवरी (Drik Panchang)।
मकर संक्रांति पर क्या दान करें?
परंपरा से तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल और गरम कपड़े। दान कुल-परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार होता है; ज़रूरतमंद को उपयोगी वस्तु देना ही मुख्य है।
मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों खाते हैं?
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और अवध में पर्व का नाम ही खिचड़ी है: नए चावल और दाल की खिचड़ी बनती, दान होती और गोरखपुर में गुरु गोरखनाथ को चढ़ाई जाती है। यह लोक परंपरा है।
गंगासागर मेला 2027 कब है?
गंगासागर मेला मकर संक्रांति पर लगता है; 2027 में संक्रांति 14 जनवरी की रात और पुण्य काल 15 जनवरी को है। मेले की तारीखें और व्यवस्था पश्चिम बंगाल सरकार घोषित करती है।
मकर संक्रांति के बाद विवाह मुहूर्त कब से हैं?
मकर संक्रांति पर खरमास पूरा होता है। Drik Panchang की 2027 की विवाह मुहूर्त सूची 15 जनवरी से शुरू होती है; जनवरी 2027 के सभी दिन विवाह मुहूर्त के पन्ने पर हैं।
उत्तरायण क्या है?
सूर्य का उत्तर की ओर चलना। मनुस्मृति (1.67) उत्तरायण को देवताओं का दिन कहती है, और परंपरा इसे मकर संक्रांति से गिनती है। खगोल में सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा 21–22 दिसंबर के शीत अयनांत से शुरू होती है।
स्रोत
- Drik Panchang: मकर संक्रांति 2027 (नई दिल्ली; "Makara Sankranti Moment - 09:14 PM, Jan 14", पुण्य काल 7:15 AM–5:46 PM, 15 जनवरी), 9 अक्टूबर 2026 को पढ़ा; यही पृष्ठ Vijayawada, Chikmagalur, Gokarna, Durgapur, Moga और Maur के लिए (पुण्य काल और महा पुण्य काल), 18 अक्टूबर 2026 को खोज-परिणामों में पढ़ा
- Drik Panchang: हिंदू कैलेंडर 2027, नई दिल्ली (लोहड़ी 14 जनवरी, मकर संक्रांति 15 जनवरी); संक्रांति सूची 2027
- Drik Panchang: जनवरी 2027 के तमिल (चेन्नई), बंगाली (कोलकाता), मलयालम, ओडिया और गुजराती कैलेंडर (भोगी, पोंगल, मट्टू पोंगल, माघ बिहू, उत्तरायण), 18 अक्टूबर 2026 को पढ़े
- Drik Panchang: मकर संक्रांति 2023 (संक्रांति 14 जनवरी 8:57 PM, पर्व 15 जनवरी)
- असम सरकार, छुट्टियों की सूची 2023 (माघ बिहू 15 और 16 जनवरी 2023)
- Prokerala: Pongal (2027: 14–17 जनवरी; संक्रांति 9:06 PM, उज्जैन) और Lohri (2027: 14 जनवरी)
- मनुस्मृति 1.67; भगवद्गीता 8.24 (holy-bhagavad-gita.org और vedabase.io पर पाठ मिलाया); महाभारत, भीष्म पर्व 116–120 और अनुशासन पर्व 167–168
- विकिपीडिया: Makar Sankranti (राज्यों के नाम और रीतियाँ, उत्तरायण और निरयन गणना), Magh Bihu, Lohri, Gangasagar Mela
- खरमास और विवाह मुहूर्त: SanatanBodh का खरमास पन्ना (Drik Panchang की संक्रांति और विवाह सूचियों से मिलान)
- दान, भोजन और राज्यों की रीतियाँ: लोक परंपरा
- संक्रांति का क्षण, पुण्य काल और सूर्यास्त: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang के मकर संक्रांति 2027 पृष्ठ (नई दिल्ली और छह और स्थान), थाई पोंगल 2027 पृष्ठ और जनवरी 2027 के तमिल, बंगाली और मलयालम कैलेंडर से मिलान (9 और 18 अक्टूबर 2026)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
