व्रत और पर्व

पोंगल 2027 कब है: 15 जनवरी

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027

तमिल माह थाई 1 (मकर संक्रांति); भोगी से कानुम पोंगल तक चार दिन

86 दिन बाद
कोड से बना चित्र: आँगन में लकड़ी की आग पर उफनता मिट्टी का पोंगल का बर्तन, गले में हल्दी के पत्ते, दोनों ओर गन्ने, आगे चावल के आटे का कोलम और सुबह का सूरज

पोंगल के चार दिन

पूरे भारत में एक ही समय
भोगीमार्गऴी का अंतिम दिन
गुरुवार, 14 जनवरी
थाई पोंगलथाई 1; सूर्य को पोंगल का भोग
शुक्रवार, 15 जनवरी
मट्टू पोंगलगाय-बैलों का दिन
शनिवार, 16 जनवरी
कानुम पोंगलपरिवार और मेल-मिलाप का दिन
रविवार, 17 जनवरी
मकर संक्रांति का क्षण
9:16 PM (14 जन॰)

तमिल महीना थाई मकर संक्रांति से शुरू होता है; संक्रांति चेन्नई के सूर्यास्त के बाद हो तो थाई 1 अगले दिन। संक्रांति का क्षण पूरे भारत में एक ही है।

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 के लिए, भारतीय मानक समय में, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से। अलग-अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है। गणना कैसे होती है

संक्षेप में

पोंगल 2027 में थाई पोंगल 15 जनवरी, शुक्रवार को है, तमिल महीने थाई के पहले दिन। चार दिन का पर्व 14 जनवरी, गुरुवार को भोगी से शुरू होता है; 16 जनवरी, शनिवार को मट्टू पोंगल और 17 जनवरी, रविवार को कानुम पोंगल है। सूर्य 14 जनवरी की रात 9:14 बजे (Drik Panchang) मकर राशि में आता है, चेन्नई के सूर्यास्त के बाद, इसलिए थाई 1 15 जनवरी है। Drik Panchang और Prokerala पोंगल का अलग मुहूर्त नहीं देते; परंपरा से पोंगल थाई 1 की सुबह आँगन में, धूप में पकाया जाता है।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 7 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

एक नज़र में

भोगी
14 जनवरी 2027, गुरुवार (मार्गऴी 30)
थाई पोंगल
15 जनवरी 2027, शुक्रवार (थाई 1)
मट्टू पोंगल
16 जनवरी 2027, शनिवार
कानुम पोंगल
17 जनवरी 2027, रविवार
मकर संक्रांति का क्षण
14 जनवरी, रात 9:16 बजे (Drik Panchang: 9:14 PM)
मुहूर्त
Drik Panchang अलग मुहूर्त नहीं देता; परंपरा से सुबह
कहाँ
तमिलनाडु, पुदुच्चेरी और दुनिया भर के तमिल
पकवान
सक्करै पोंगल (गुड़ वाला) और वेन पोंगल

पोंगल 2027 की तारीखें कैसे निकलती हैं

तमिल कैलेंडर सौर है: हर महीना उस संक्रांति से शुरू होता है जब सूर्य अगली राशि में जाता है, और थाई मकर संक्रांति से। Drik Panchang के तमिल कैलेंडर की रीति से, संक्रांति सूर्यास्त से पहले हो तो उसी दिन महीने का पहला दिन होता है, बाद में हो तो अगले दिन। 2027 में मकर संक्रांति 14 जनवरी की रात 9:14 बजे है, चेन्नई में सूर्यास्त (6:01 PM) के बाद; इसलिए थाई 1, यानी थाई पोंगल, 15 जनवरी, शुक्रवार है। Drik का जनवरी 2027 का तमिल कैलेंडर (चेन्नई) भोगी 14, पोंगल 15 और मट्टू पोंगल 16 जनवरी को देता है, और Prokerala चारों दिन 14 से 17 जनवरी देता है। तमिलनाडु सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची अभी नहीं आई है; दफ़्तर की छुट्टी उसी से पक्की करें।

चार दिन, चार रीतियाँ

ये रीतियाँ विकिपीडिया के "Pongal (festival)" लेख में दी गई पुस्तकों के अनुसार हैं, और लोक परंपरा हैं; परिवारों और ज़िलों में अंतर मिलता है। शहरों और विदेश में बसे तमिल अक्सर एक या दो दिन ही मनाते हैं।

भोगी (14 जनवरी)

मार्गऴी का अंतिम दिन। घर की सफ़ाई और सजावट होती है; पुरानी, बेकार चीज़ें इकट्ठी करके अलाव में जलाई जाती हैं, और नई चीज़ों का स्वागत होता है। कई जगह वर्षा के लिए इंद्र की प्रार्थना की जाती है।

थाई पोंगल (15 जनवरी)

मुख्य दिन, सूर्य देव का। नए मिट्टी के बर्तन के गले में हल्दी का पौधा या फूलों की माला बाँधकर, उसे धूप में गन्नों के साथ रखकर नए चावल, दूध और गुड़ का पोंगल पकाया जाता है। जब दूध उफनकर बाहर गिरता है, तो शंख बजाते या "पोंगलो पोंगल" कहते हैं। पोंगल पहले सूर्य और गणेश को चढ़ता है, फिर बाँटा जाता है।

मट्टू पोंगल (16 जनवरी)

गाय-बैलों का दिन। उन्हें नहलाकर, सींग चमकाकर और रंगकर, माला पहनाई जाती है और जुलूस निकलता है; कई लोग उन्हें मिठाई खिलाकर प्रणाम करते हैं। इसी दिन स्त्रियाँ और लड़कियाँ "कनु पिडि" में घर के बाहर हल्दी के पत्ते पर पक्षियों (ख़ासकर कौवों) के लिए पोंगल और भोजन रखकर भाइयों की कुशल की प्रार्थना करती हैं। तमिलनाडु के कुछ ज़िलों में इन दिनों जल्लीकट्टू (बैल को काबू करने का खेल) होता है, जो राज्य के क़ानून और ज़िला प्रशासन की अनुमति से होता है।

कानुम पोंगल (17 जनवरी)

पर्व का समापन। परिवार मिलते हैं, युवा बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं और बड़े बच्चों को उपहार देते हैं; लोग घूमने और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं।

कोलम

पोंगल के दिनों में घर के आगे चावल के आटे से कोलम बनाया जाता है: बिंदुओं की जाली के चारों ओर रेखाओं, घुमावों और फंदों के ज्यामितीय नमूने। थाई पोंगल पर कोलम में अक्सर पोंगल का बर्तन, गन्ना और सूरज बनाए जाते हैं (परंपरा)।

इतिहास में पोंगल

विकिपीडिया के अनुसार, जो Kasturi और Madhavan की पुस्तक "South India Heritage" का हवाला देता है, चोल राजा कुलोत्तुंग प्रथम (1070–1122 ई.) का एक शिलालेख वीरराघव स्वामी मंदिर में वार्षिक पोंगल उत्सव के लिए भूमि-दान दर्ज करता है, और नौवीं सदी के माणिक्कवाचकर के शैव भक्ति-ग्रंथ "तिरुवेम्पावै" में भी इस पर्व का वर्णन है। Andrea Gutiérrez (2018) के अनुसार चोल और विजयनगर काल के मंदिर-शिलालेखों में आज के पोंगल जैसे पकवान की विधियाँ मिलती हैं।

मकर संक्रांति, पोंगल और संक्रांति: एक ही दिन

थाई पोंगल वही दिन है जिसे उत्तर भारत मकर संक्रांति, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना संक्रांति (पेद्द पंडुगा), और केरल मकरविलक्कु के रूप में मनाता है। उत्तर भारत में संक्रांति का पुण्य काल भी 15 जनवरी को है; शहर के अनुसार समय मकर संक्रांति के पन्ने पर है।

पूजा विधि

  1. चरण 1

    भोगी पर सफ़ाई

    घर साफ़ करें, पुरानी बेकार चीज़ें हटाएँ और आँगन या दरवाज़े पर कोलम बनाएँ (परंपरा)। अलाव में प्लास्टिक या टायर न जलाएँ; धुआँ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

  2. चरण 2

    बर्तन सजाएँ

    नए मिट्टी या पीतल के बर्तन के गले में हल्दी का पौधा या हल्दी की गाँठ और फूल बाँधें; पास में गन्ने रखें।

  3. चरण 3

    पोंगल पकाएँ

    थाई 1 की सुबह, धूप में, नए चावल को दूध में पकाएँ और गुड़, घी, इलायची और काजू डालें। दूध उफनने पर "पोंगलो पोंगल" कहें।

  4. चरण 4

    सूर्य को भोग

    केले के पत्ते पर पोंगल, गन्ना, केले और नारियल रखकर सूर्य को अर्पित करें, फिर परिवार और पड़ोसियों में बाँटें।

  5. चरण 5

    मट्टू पोंगल

    अगले दिन गाय-बैलों को नहलाएँ, सजाएँ और पोंगल खिलाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोंगल 2027 कब है?

थाई पोंगल 15 जनवरी, शुक्रवार को है। चार दिन: भोगी 14 जनवरी (गुरुवार), थाई पोंगल 15 (शुक्रवार), मट्टू पोंगल 16 (शनिवार) और कानुम पोंगल 17 जनवरी (रविवार)।

पोंगल 2027 का मुहूर्त क्या है?

Drik Panchang और Prokerala पोंगल पकाने का अलग मुहूर्त नहीं देते; Drik केवल संक्रांति का क्षण देता है: 14 जनवरी, रात 9:14 बजे। परंपरा से पोंगल थाई 1 (15 जनवरी) की सुबह, सूर्योदय के बाद धूप में पकाया जाता है। अपने मंदिर या परिवार की रीति भी देखें।

भोगी 2027 कब है?

14 जनवरी, गुरुवार, तमिल महीने मार्गऴी का अंतिम दिन (Drik Panchang, चेन्नई)। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी संक्रांति से पहले का दिन भोगी है।

मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल कब हैं?

मट्टू पोंगल 16 जनवरी, शनिवार (Drik Panchang) और कानुम पोंगल 17 जनवरी, रविवार (Prokerala; चौथा दिन)।

पोंगल 15 जनवरी को क्यों है, 14 को क्यों नहीं?

थाई पोंगल थाई महीने का पहला दिन है। मकर संक्रांति 14 जनवरी की रात 9:14 बजे है, चेन्नई के सूर्यास्त के बाद, इसलिए तमिल कैलेंडर में थाई 1 अगले दिन, 15 जनवरी है। जिस वर्ष संक्रांति दिन में होती है, उस वर्ष पोंगल 14 जनवरी को पड़ता है।

पोंगल शब्द का अर्थ क्या है?

तमिल में "पोंगल" उफनने या उबलकर ऊपर आने को कहते हैं; इसी नाम का पकवान, नए चावल, दूध और गुड़ से, इस दिन पकाया जाता है।

पोंगल पर कौन सा पकवान बनता है?

सक्करै पोंगल (गुड़, घी, इलायची और काजू वाला मीठा पोंगल) और वेन पोंगल (नमकीन, काली मिर्च और जीरे वाला)। थाई पोंगल पर मीठा पोंगल सूर्य को चढ़ाया जाता है।

स्रोत

  1. Drik Panchang: थाई पोंगल 2027 (शुक्रवार 15 जनवरी; "Thai Pongal Sankranti Moment" 09:14 PM, 14 जनवरी, नई दिल्ली), खोज-परिणाम से, 18 अक्टूबर 2026
  2. Drik Panchang: तमिल कैलेंडर जनवरी 2027, चेन्नई (भोगी पंडिगै 14, मकर संक्रांति और पोंगल 15, मट्टू पोंगल 16 जनवरी; थाई 1 = 15 जनवरी), 18 अक्टूबर 2026 को पढ़ा
  3. Prokerala, Pongal: 2027 में भोगी 14, सूर्य पोंगल 15, मट्टू पोंगल 16 और कानुम पोंगल 17 जनवरी; अलग मुहूर्त नहीं
  4. विकिपीडिया, Pongal (festival): चार दिन, बर्तन और "पोंगलो पोंगल", कोलम, कनु पिडि, जल्लीकट्टू; कुलोत्तुंग प्रथम का शिलालेख और तिरुवेम्पावै (Kasturi और Madhavan, South India Heritage); Andrea Gutiérrez (2018)
  5. SanatanBodh तमिल कैलेंडर (lib/solar-calendar.ts): थाई 1 = 15 जनवरी 2027, Drik के तमिल कैलेंडर से हर महीने मिलान
  6. रीतियाँ और पकवान: लोक परंपरा
  7. संक्रांति का क्षण, पुण्य काल और सूर्यास्त: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang के मकर संक्रांति 2027 पृष्ठ (नई दिल्ली और छह और स्थान), थाई पोंगल 2027 पृष्ठ और जनवरी 2027 के तमिल, बंगाली और मलयालम कैलेंडर से मिलान (9 और 18 अक्टूबर 2026)

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