भगवद्गीता 2.12

अध्याय 2 · सांख्य योगवक्ता: श्रीकृष्णश्रोता: अर्जुन
समीक्षक: Aditi Tripathiअंतिम समीक्षा: 2 स्रोतगलती बताएँ

न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः ।
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम् ॥ १२ ॥

na tvevāhaṃ jātu nāsaṃ na tvaṃ neme janādhipāḥ
na caiva na bhaviṣyāmaḥ sarve vayamataḥ param

पद-अर्थ

न तु एवऐसा नहीं कि
अहम् जातु न आसम्मैं कभी नहीं था
न त्वम्न तू
न इमे जनाधिपाःन ये राजा
न च एव न भविष्यामःऔर न ऐसा कि हम नहीं रहेंगे
सर्वे वयम्हम सब
अतः परम्इसके बाद

अनुवाद

हिंदी

ऐसा कभी नहीं था कि मैं नहीं था, या तू नहीं था, या ये राजा नहीं थे; और न ऐसा होगा कि इसके बाद हम सब नहीं रहेंगे।

ENGLISH

Never was there a time when I did not exist, nor you, nor these kings; nor will any of us ever cease to be hereafter.

भावार्थ

आत्मा की नित्यता का पहला सूत्र: जो सचमुच "मैं" है, वह न जन्म से पहले शून्य था, न मृत्यु के बाद मिटेगा। शरीर बदलते हैं, पर उनमें रहने वाला चेतन तत्व बना रहता है।

यह श्लोक किससे जुड़ा है

स्रोत

  1. मूल पाठ: भगवद्गीता (महाभारत, भीष्म पर्व)
  2. हिंदी व अंग्रेज़ी अनुवाद, भावार्थ: SanatanBodh संपादकीय टीम

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