वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥ २२ ॥
vāsāṃsi jīrṇāni yathā vihāya navāni gṛhṇāti naro'parāṇi
tathā śarīrāṇi vihāya jīrṇānyanyāni saṃyāti navāni dehī
vaasaansi jeernaani yathaa vihaaya navaani grihnaati naroparaani
tathaa shareeraani vihaaya jeernaanyanyaani sanyaati navaani dehee
vāsāṃsi jīrṇāni yathā vihāya navāni gṛhṇāti naro'parāṇi
tathā śarīrāṇi vihāya jīrṇānyanyāni saṃyāti navāni dehī
पद-अर्थ
अनुवाद
जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र छोड़कर दूसरे नए वस्त्र पहन लेता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर छोड़कर दूसरे नए शरीर प्राप्त करता है।
As a man casts off worn-out clothes and puts on others that are new, so the embodied self casts off worn-out bodies and enters others that are new.
भावार्थ
गीता का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण: शरीर वस्त्र की तरह है और आत्मा उसे पहनने वाला। वस्त्र बदलने पर पहनने वाला नहीं बदलता। यही पुनर्जन्म का सिद्धांत है, जिसे 2.13 में बचपन-जवानी-बुढ़ापे के उदाहरण से समझाया गया था।
यह श्लोक किससे जुड़ा है
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा ।अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गीता में शरीर की तुलना वस्त्र से कहाँ की गई है?
भगवद्गीता 2.22 में: जैसे मनुष्य पुराने कपड़े छोड़कर नए पहनता है, वैसे ही आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नया शरीर धारण करता है।
स्रोत
- मूल पाठ: भगवद्गीता (महाभारत, भीष्म पर्व)
- हिंदी व अंग्रेज़ी अनुवाद, भावार्थ: SanatanBodh संपादकीय टीम
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