अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च ।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥ २४ ॥
acchedyo'yamadāhyo'yamakledyo'śoṣya eva ca
nityaḥ sarvagataḥ sthāṇuracalo'yaṃ sanātanaḥ
achchhedyoyamadaahyoyamakledyoshoshya eva cha
nityah sarvagatah sthaanurachaloyam sanaatanah
acchedyo'yamadāhyo'yamakledyo'śoṣya eva ca
nityaḥ sarvagataḥ sthāṇuracalo'yaṃ sanātanaḥ
पद-अर्थ
अच्छेद्यःकाटा न जा सकने वाला
अदाह्यःजलाया न जा सकने वाला
अक्लेद्यःगीला न किया जा सकने वाला
अशोष्यःसुखाया न जा सकने वाला
नित्यःनित्य
सर्वगतःसर्वव्यापी
स्थाणुःस्थिर
अचलःअचल
सनातनःसनातन
अनुवाद
हिंदी
यह आत्मा काटा नहीं जा सकता, जलाया नहीं जा सकता, गीला नहीं किया जा सकता और सुखाया नहीं जा सकता। यह नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर, अचल और सनातन है।
ENGLISH
It cannot be cut, burnt, wetted or dried. It is eternal, all-pervading, stable, immovable and everlasting.
भावार्थ
पिछले श्लोक की बात दोहराकर आत्मा के और गुण बताए गए हैं। "सनातन", यानी सदा रहने वाला, यह शब्द यहाँ आत्मा के लिए आया है।
यह श्लोक किससे जुड़ा है
स्रोत
- मूल पाठ: भगवद्गीता (महाभारत, भीष्म पर्व)
- हिंदी व अंग्रेज़ी अनुवाद, भावार्थ: SanatanBodh संपादकीय टीम
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