सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप ।
न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह ॥ ९ ॥
evamuktvā hṛṣīkeśaṃ guḍākeśaḥ parantapa
na yotsya iti govindamuktvā tūṣṇīṃ babhūva ha
evamuktvaa hrisheekesham gudaakeshah parantapa
na yotsya iti govindamuktvaa tooshneem babhoova ha
evamuktvā hṛṣīkeśaṃ guḍākeśaḥ parantapa
na yotsya iti govindamuktvā tūṣṇīṃ babhūva ha
पद-अर्थ
अनुवाद
संजय बोले: हे राजन्, निद्रा को जीतने वाले अर्जुन हृषीकेश से ऐसा कहकर, और फिर गोविंद से "मैं युद्ध नहीं करूँगा" कहकर चुप हो गए।
Sanjaya said: Having spoken thus to Hrishikesha, O King, Gudakesha said to Govinda, "I will not fight," and fell silent.
भावार्थ
अर्जुन का अंतिम निर्णय: "न योत्स्ये" (मैं युद्ध नहीं करूँगा)। संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं कि यह कहकर अर्जुन मौन हो गए। आगे का सारा संवाद इसी मौन को तोड़ने के लिए है।
यह श्लोक किससे जुड़ा है
स्रोत
- मूल पाठ: भगवद्गीता (महाभारत, भीष्म पर्व)
- हिंदी व अंग्रेज़ी अनुवाद, भावार्थ: SanatanBodh संपादकीय टीम
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